सीधी। नवरात्रि के दौरान जिले के रामगढ़ पंचायत की कोलान बस्ती से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। यहां कल्लू बाई नामक महिला ने अपने पोते की बीमारी ठीक होने की मन्नत पूरी होने पर मां दुर्गा को अपनी जीभ काटकर अर्पित कर दी। जीभ काटने के बाद महिला करीब 13 घंटे तक खून से लथपथ वहीं पड़ी रही। जैसे ही यह खबर फैली, पंडाल में भीड़ उमड़ पड़ी और लोग भजन-कीर्तन करने लगे।

मन्नत और आस्था की कहानी
- कल्लू बाई का पोता अनंत कोल (16) एक साल पहले तेज बुखार के बाद गंभीर रूप से बीमार हो गया था।
- कई महीनों तक बिस्तर पर पड़ा रहा और धीरे-धीरे चलने-फिरने में असमर्थ हो गया।
- डॉक्टरों ने उसे लकवाग्रस्त (पोलियोग्रस्त) घोषित कर दिया और रीवा या जबलपुर ऑपरेशन के लिए रेफर कर दिया।
- पोते की इस स्थिति से व्यथित होकर दादी ने मां दुर्गा से मन्नत मांगी थी—अगर पोता ठीक हो गया तो वह अपनी जीभ मां के चरणों में अर्पित करेगी।
नवरात्र पर पूरी की मन्नत
- शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे कल्लू बाई ने दुर्गा पंडाल में जाकर अपनी जीभ काट ली और प्लेट में रखकर प्रतिमा के चरणों में अर्पित कर दी।
- इसके बाद वह वहीं बैठी रहीं।
- देर रात करीब 11 बजे जब उन्होंने मुंह खोला तो लोगों के बीच यह चर्चा फैल गई कि उनकी जीभ फिर से आ गई है।
- लोगों ने इसे मां दुर्गा का चमत्कार बताया और पंडाल में भजन-कीर्तन शुरू हो गया।

महिला की जुबानी
कल्लू बाई ने मीडिया से बातचीत में कहा –
- “माता ने मेरे पोते को ठीक किया है। मैंने जीभ चढ़ाने की बात कही तो माता ने सपने में कहा—घर या मंदिर में नहीं, पंडाल में अर्पित करना। मुझे तकलीफ भी कम हुई और ज्यादा खून भी नहीं निकला।”
- उन्होंने यह भी बताया कि 8 साल पहले भी उन्होंने जीभ चढ़ाई थी। तब उनके पति बीमार थे और काम नहीं कर पा रहे थे। शहडोल जिले के एक मंदिर में उन्होंने जीभ अर्पित की थी और उसके बाद पति स्वस्थ हो गए थे।
भीड़ और श्रद्धालु
- महिला द्वारा जीभ चढ़ाने की खबर फैलते ही पंडाल में भारी भीड़ जमा हो गई।
- लोग इसे आस्था और चमत्कार से जोड़कर देखने लगे।
- श्रद्धालुओं ने मौके पर भजन-कीर्तन शुरू कर दिया।

डॉक्टरों की चेतावनी
- जिला अस्पताल सीधी के सिविल सर्जन ने बताया कि महिला की हालत फिलहाल स्थिर है।
- उन्होंने कहा कि इस तरह का कृत्य बेहद खतरनाक और जानलेवा है।
- जीभ काटने से अत्यधिक खून बह सकता है, जिससे जान पर बन आती है।
- डॉक्टरों ने लोगों से अपील की कि धार्मिक आस्था के नाम पर अपनी जान को खतरे में न डालें।
धार्मिक आस्था बनाम चिकित्सीय विज्ञान
- यह घटना एक ओर जहां अटूट आस्था और विश्वास का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर यह अंधविश्वास और अज्ञानता का भी उदाहरण है।
- लोग इसे देवी का चमत्कार मान रहे हैं, जबकि चिकित्सा विज्ञान ऐसे मामलों को गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बताता है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परंपराओं को रोकने और लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।