देवरीकलां। देवरीकलां में जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई है। नगर की जीवनदायिनी सुखचैन नदी के पुनर्जीवन, साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण का कार्य “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत विधिवत रूप से प्रारंभ कर दिया गया है।
यह अभियान प्रदेश स्तर पर डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित किया जा रहा है, जिसका तीसरा चरण 19 मार्च 2026 (गुड़ी पड़वा) से शुरू होकर 139 दिनों तक चलेगा। इस दौरान प्रदेश की नदियों, कुओं और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का लक्ष्य रखा गया है।
पूजा-अर्चना के साथ हुआ शुभारंभ
अभियान की शुरुआत नगर पालिका द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के साथ की गई। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष नेहा अलकेश जैन, तहसीलदार प्रीतिरानी चौरसिया और मुख्य नगर पालिका अधिकारी केबीएस बघेल सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
पूजा के बाद जेसीबी मशीनों के माध्यम से नदी की सफाई और गहरीकरण का कार्य शुरू किया गया। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कार्यों का निरीक्षण भी किया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

नदी का होगा कायाकल्प
अभियान के तहत सुखचैन नदी में कई महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे:
- नदी की साफ-सफाई
- गहरीकरण (डिसिल्टिंग)
- जलधारण क्षमता में वृद्धि
- किनारों का सौंदर्यीकरण
- आसपास के क्षेत्र का विकास
इन कार्यों के माध्यम से नदी को पुनर्जीवित कर उसे स्थायी जल स्रोत के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
जल संकट से निपटने की पहल
नगर पालिका अध्यक्ष नेहा जैन ने कहा कि “जल गंगा संवर्धन अभियान” केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि जन-जन की भागीदारी से जल संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि सुखचैन नदी का पुनर्जीवन नगर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र के जल संकट को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
प्रशासन और जनता का सहयोग जरूरी
तहसीलदार प्रीतिरानी चौरसिया ने कहा कि यह अभियान भविष्य में जल स्तर बढ़ाने और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने आम नागरिकों से भी इस अभियान में सहयोग करने की अपील की।
मुख्य नगर पालिका अधिकारी केबीएस बघेल ने बताया कि कलेक्टर संदीप जीआर के निर्देशन में यह कार्य किया जा रहा है और इसका उद्देश्य नगर की जीवनदायिनी नदी को फिर से जीवित करना है।
पर्यावरण संतुलन की दिशा में प्रयास
इस अभियान का व्यापक उद्देश्य केवल एक नदी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में जल स्रोतों का संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना है। इसके अंतर्गत:
- नदियों का पुनर्जीवन
- ऐतिहासिक घाटों का जीर्णोद्धार
- प्राचीन कुओं की सफाई
- जल संरक्षण के प्रति जागरूकता
जैसे कार्य किए जा रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी
इस मौके पर पार्षद संजय चौरसिया, काशीराम पटेल, नारायण बाल्मिक, पटवारी रशीद खान, सोनू साहू, मुकेश नामदेव, संदीप पाठक सहित कई जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर इस अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया।
भविष्य में मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के अभियान के कई दीर्घकालिक लाभ होते हैं:
- भूजल स्तर में वृद्धि
- जल संकट में कमी
- पर्यावरण संरक्षण
- जैव विविधता का संरक्षण
- स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
देवरीकलां में सुखचैन नदी के पुनर्जीवन का यह अभियान न केवल एक विकास कार्य है, बल्कि यह जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल भी है। यदि प्रशासन और जनता मिलकर इस अभियान को सफल बनाते हैं, तो आने वाले समय में यह क्षेत्र जल संकट से काफी हद तक राहत पा सकता है।
यह पहल इस बात का उदाहरण है कि सामूहिक प्रयासों से प्राकृतिक संसाधनों को बचाया और पुनर्जीवित किया जा सकता है।