नई दिल्ली। पिछले एक साल में सोने की कीमतों में अभूतपूर्व तेजी के बीच भारतीय निवेशकों का रुझान डिजिटल गोल्ड की तरफ तेजी से बढ़ा है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 31 जनवरी 2026 तक गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) का नेट एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) पिछले साल के मुकाबले ढाई गुना से भी ज्यादा हो गया है। सिर्फ जनवरी महीने में ही गोल्ड ETF में 24,000 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश दर्ज किया गया।
जनवरी में गोल्ड ETF में 24,040 करोड़ का निवेश
AMFI के लेटेस्ट डेटा के मुताबिक, जनवरी 2026 में गोल्ड ETF में 24,039.96 करोड़ रुपए का नेट इनफ्लो हुआ। यदि इसकी तुलना जनवरी 2025 से करें, तो तब यह आंकड़ा मात्र 3,751.42 करोड़ रुपए था। यानी सिर्फ एक साल में मंथली इनफ्लो में 540.82% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। वहीं दिसंबर 2025 (₹11,646 करोड़) के मुकाबले भी जनवरी में निवेश में 106% की वृद्धि देखी गई।
गोल्ड ETF का नेट AUM अब 1.84 लाख करोड़ रुपए
निवेशकों के बढ़ते भरोसे के कारण गोल्ड ETF का नेट एसेट अंडर मैनेजमेंट भी तेजी से बढ़ा। 31 जनवरी 2026 को यह आंकड़ा 1,84,276.96 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। एक साल पहले 31 जनवरी 2025 को यह मात्र 51,839 करोड़ रुपए था, यानी 255% की ग्रोथ दर्ज हुई। दिसंबर 2025 (₹1,27,896 करोड़) की तुलना में भी जनवरी में 44% की तेजी आई। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से बताते हैं कि अब निवेशक फिजिकल गोल्ड के बजाय डिजिटल या पेपर गोल्ड को सुरक्षित और आसान निवेश मान रहे हैं।

फिजिकल गोल्ड की कीमतों में 100% तक की तेजी
विशेषज्ञों के अनुसार, गोल्ड ETF में निवेश बढ़ने का मुख्य कारण फिजिकल गोल्ड की कीमतों में जबरदस्त तेजी है। पिछले एक साल में सोने के दाम 90% से 100% तक बढ़ चुके हैं। 29 जनवरी 2026 को 24 कैरेट गोल्ड ने 1,76,121 रुपए प्रति 10 ग्राम का ऑल टाइम हाई दर्ज किया।
एवरेज नेट AUM में 213% का उछाल
जनवरी 2026 में गोल्ड ETF के एवरेज नेट AUM में भी बढ़ोतरी देखी गई। यह आंकड़ा ₹1,50,380.66 करोड़ रहा, जबकि जनवरी 2025 में यह मात्र ₹47,940.63 करोड़ था। साल-दर-साल तुलना में इसमें 213.68% की बढ़त हुई।
गोल्ड ETF के फायदे
विशेषज्ञ बताते हैं कि निवेशक गोल्ड ETF की ओर इसलिए रुख कर रहे हैं क्योंकि इसमें कई फायदे हैं:
- सुरक्षा: डिजिटल गोल्ड डीमैट अकाउंट में रहता है, इसलिए चोरी या सुरक्षा की चिंता नहीं रहती।
- शुद्धता: यह अंतरराष्ट्रीय मानक के गोल्ड पर आधारित होता है, इसलिए शुद्धता की चिंता नहीं होती।
- लिक्विडिटी: शेयर बाजार के समय किसी भी समय खरीदा या बेचा जा सकता है।
- मेकिंग चार्ज नहीं: फिजिकल ज्वेलरी की तरह इसमें मेकिंग चार्ज या लॉकर शुल्क नहीं देना पड़ता।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की कीमतों में तेजी और डिजिटल गोल्ड की सुरक्षा व सुविधा ने निवेशकों को गोल्ड ETF की ओर आकर्षित किया है। भविष्य में भी गोल्ड ETF में निवेश का रुझान बढ़ने की संभावना है।