स्थापना दिवस समारोह में गूंजा ‘वन नेशन-वन इलेक्शन, राज्य निर्वाचन आयोगों की भूमिका पर जोर !

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भोपाल। ओपी रावत ने कहा कि बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) से लेकर चीफ इलेक्शन ऑफिसर तक सभी निर्वाचन प्रक्रिया की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। चुनाव केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक समन्वित तंत्र है जिसमें हर स्तर की भूमिका अहम होती है। वे मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के 32वें स्थापना दिवस समारोह में “वन नेशन-वन इलेक्शन में स्थानीय निर्वाचन की भूमिका” विषय पर संबोधित कर रहे थे।

रावत ने कहा कि ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ पर चर्चा वर्ष 2015 से चल रही है और भारत निर्वाचन आयोग ने भी इस पर सहमति जताई है। हालांकि इसे लागू किए जाने की स्थिति में भी राज्य निर्वाचन आयोगों की भूमिका कम नहीं होगी। पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव राज्य निर्वाचन आयोगों के माध्यम से ही होने चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि इस प्रस्ताव का ड्राफ्ट भविष्य में स्वीकृत होगा। रावत ने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट पर भी विस्तार से चर्चा की।

पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त आर. परशुराम ने कहा कि नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। “हर वोट-हर निकाय” लोकतंत्र की मजबूती का आधार है। उन्होंने चुनाव प्रबंधन में “प्रिपेयर, प्रिपेयर और प्रिपेयर” के सिद्धांत पर जोर दिया और नई तकनीकों को अपनाने की वकालत की।

दैनिक भास्कर स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के विभागाध्यक्ष नरेन्द्र कुमार सिंह ने 1952 से अब तक के चुनावी अनुभव साझा करते हुए कहा कि 1977 का चुनाव मतदाता जागरूकता का बड़ा उदाहरण रहा। उन्होंने भारत में स्वतंत्रता के साथ सार्वभौमिक मताधिकार लागू किए जाने को ऐतिहासिक कदम बताया।

वरिष्ठ अधिवक्ता चेतन सेठ ने स्थानीय चुनावों में न्यायालयीन प्रक्रियाओं की जानकारी दी और संविधान को जीवंत दस्तावेज बताया।

राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि हालिया बैठक में मध्यप्रदेश को राज्य निर्वाचन आयोगों का “वर्ल्ड बैंक” कहा गया। समारोह में ‘निर्वाचन साहित्य ई-बुक’ का विमोचन और ‘प्रेक्षा मोबाइल ऐप’ का शुभारंभ किया गया। उल्लेखनीय कार्य करने वाले अधिकारियों को सम्मानित भी किया गया। सचिव दीपक सिंह ने आभार व्यक्त किया।

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