युवा नेता अविराज सिंह ने हनुमान प्राकट्योत्सव के अवसर पर भगवान हनुमान के व्यक्तित्व और उनके आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए युवाओं को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान शक्ति, बुद्धि, विनम्रता और निस्वार्थ सेवा के अद्वितीय संगम हैं, जिनका जीवन हर युग में मानवता को दिशा देने वाला रहा है।
अविराज सिंह ने कहा कि हनुमान जी में महाशक्ति और ज्ञान का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है। वे अहंकार से पूर्णतः मुक्त हैं, यही कारण है कि उनकी शक्ति असीम और लोककल्याणकारी है। उन्होंने बताया कि हनुमान जी को भगवान शिव का अंशावतार माना जाता है, जो सेवा, समर्पण और भक्ति का संदेश देते हैं। कलियुग में उन्हें जागृत देवता के रूप में पूजा जाता है और सच्चे मन से स्मरण करने पर वे भक्तों के कष्टों का निवारण करते हैं।
उन्होंने कहा कि हनुमान जी का जीवन निस्वार्थ सेवा का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने अपनी अपार शक्ति और सामर्थ्य का उपयोग कभी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं किया, बल्कि सदैव लोककल्याण के लिए समर्पित रखा। यही कारण है कि वे जन-जन के आराध्य हैं और उनके चरित्र से हर व्यक्ति प्रेरणा ले सकता है।

अविराज सिंह ने श्रीमद्भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बताए गए ‘निष्काम कर्मयोग’ का सबसे सशक्त और व्यावहारिक उदाहरण हनुमान जी हैं। उन्होंने अपने जीवन में हर कार्य को पूर्ण निष्ठा, समर्पण और बिना किसी अपेक्षा के किया। वे हर परिस्थिति में समाधान प्रस्तुत करते थे और अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखते थे।
उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जब समुद्र पार करने के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं था, तब हनुमान जी ने अपने आत्मबल और दृढ़ संकल्प के बल पर असंभव को संभव कर दिखाया। यह प्रसंग आज के युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश है कि संसाधनों की कमी कभी भी सफलता में बाधा नहीं बनती, यदि व्यक्ति के भीतर दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास हो।
अविराज सिंह ने कहा कि हनुमान जी ‘संकल्प शक्ति’ के प्रतीक हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मन में दृढ़ निश्चय हो, तो कोई भी कठिनाई बड़ी नहीं होती। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को हनुमान जी के आदर्शों को अपनाते हुए अपने जीवन में अनुशासन, संयम और सेवा की भावना विकसित करनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि हनुमान जी का जीवन राष्ट्र निर्माण के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश देता है। उन्होंने भगवान श्रीराम के प्रति अपनी निस्वार्थ सेवा और समर्पण से यह सिद्ध किया कि सच्ची सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति इसी भावना से कार्य करे, तो एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण संभव है।
इस अवसर पर अविराज सिंह ने विभिन्न धार्मिक आयोजनों में भाग लेकर अपनी आस्था व्यक्त की। उन्होंने बालाजी रेसिडेंसी स्थित श्री अनुराग प्यासी के निवास पर आयोजित भगवान हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में सहभागिता की। यहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की।
इसके साथ ही वे ग्राम ललोई (बांदरी) पहुंचे, जहां रज बाबा हनुमान मंदिर में आयोजित सुंदरकांड पाठ, पूजा-पाठ और भंडारे में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ धार्मिक वातावरण का अनुभव किया और आयोजन की सराहना की।
अविराज सिंह ने ग्राम ग्रन्ट रजवांस में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा एवं सवा लाख महामृत्युंजय जाप में भी सहभागिता की। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना का संचार करते हैं, जिससे सामाजिक एकता मजबूत होती है।

इसके अलावा वे देव पातालिया हनुमान मंदिर में आयोजित भव्य शोभायात्रा और भंडारे में भी शामिल हुए, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म और संस्कृति के ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं।
कार्यक्रमों की श्रृंखला में उन्होंने श्री सिद्धेश्वरी चिंताहरण हनुमान मंदिर में आयोजित श्री हनुमंत पालकी शोभायात्रा में भी भाग लिया। इस दौरान उन्होंने भगवान हनुमान के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की और कहा कि समाज में बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि लोगों में धार्मिक चेतना और आस्था निरंतर सुदृढ़ हो रही है।
समग्र रूप से, अविराज सिंह का यह संदेश युवाओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा। उन्होंने हनुमान जी के आदर्शों को अपनाकर जीवन में सफलता, अनुशासन और सेवा की भावना विकसित करने का आह्वान किया। उनके अनुसार, यदि व्यक्ति संकल्प शक्ति, आत्मविश्वास और निस्वार्थ भाव से कार्य करे, तो वह किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है और समाज के साथ-साथ राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।