हेमंत सोरेन चौथी बार बने झारखंड के मुख्यमंत्री, 23 नवंबर के चुनावी नतीजे के बाद उठाया बड़ा कदम !

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रांची में शपथ ग्रहण समारोह:

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के प्रमुख हेमंत सोरेन ने गुरुवार, 28 नवंबर 2024 को चौथी बार झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। यह ऐतिहासिक क्षण था, जो रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित हुआ। झारखंड के गवर्नर संतोष गंगवार ने उन्हें शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में राज्य के राजनीतिक हलकों के लिए बड़ी धूमधाम देखने को मिली। इस अवसर पर 10 पार्टियों के 18 प्रमुख नेताओं ने शिरकत की, जिनमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख अखिलेश यादव, और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव शामिल थे।

हेमंत सोरेन और शिबू सोरेन का भावुक पल:

हेमंत सोरेन के शपथ ग्रहण समारोह में एक बेहद भावुक क्षण था, जब उन्होंने अपने पिता और झारखंड के कद्दावर नेता शिबू सोरेन को मंच तक ले जाने के लिए उनका हाथ थामा। यह दृश्य न केवल उनकी पारिवारिक और राजनीतिक एकता का प्रतीक था, बल्कि झारखंड की राजनीति में उनके परिवार के योगदान की पुष्टि भी करता है। शिबू सोरेन, जो खुद झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता हैं, उनके साथ यह पल जुड़ा हुआ था, जब हेमंत सोरेन ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में फिर से शपथ ली।

समारोह में शामिल प्रमुख नेता और पार्टी गठबंधन:

समारोह में शामिल नेताओं और पार्टियों के विभिन्न राजनीतिक उद्देश्यों और झारखंड के विकास के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता को लेकर चर्चाएं हुईं। झारखंड में विधानसभा चुनाव के बाद, 23 नवंबर को आए परिणामों में JMM-लेड INDIA ब्लॉक ने शानदार जीत दर्ज की। इस ब्लॉक ने 81 विधानसभा सीटों में से 56 सीटों पर कब्जा किया। इसमें JMM ने 34 सीटें, कांग्रेस ने 16, राजद ने 4 और माले ने 2 सीटें जीतीं। इस जीत के बाद हेमंत सोरेन ने राज्य के विकास की दिशा में और अधिक मजबूती से कदम बढ़ाने का संकल्प लिया।

आंदोलन की विरासत और पार्टी की एकता:

हेमंत सोरेन ने शपथ लेने से पहले संबोधन में कहा, “आज का दिन ऐतिहासिक है, क्योंकि यह केवल एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि झारखंड के लोगों की मेहनत और उनके संघर्ष का प्रतीक है। हमारी एकता ही हमारा सबसे बड़ा हथियार है। हमें न विभाजित किया जा सकता है, न ही शांत किया जा सकता है। हम झारखंडी हैं और झारखंडी कभी नहीं झुकते।” हेमंत ने यह भी कहा कि उनका लक्ष्य राज्य को और अधिक प्रगति की दिशा में ले जाना है, और इसके लिए उनकी पार्टी और गठबंधन के सभी नेता मिलकर काम करेंगे।

JMM का प्रभाव और चुनावी जीत:

JMM की सत्ता में यह वापसी, 2014 और 2019 के चुनावों में मिली हार के बाद एक महत्वपूर्ण मोड़ है। पार्टी और उसके नेतृत्व ने राज्य के कई मुद्दों पर जनता से समर्थन प्राप्त किया है। 23 नवंबर को चुनावी नतीजों में उनकी पार्टी ने कांग्रेस और राजद के साथ गठबंधन कर एक मजबूती से चुनाव लड़ा और शानदार जीत दर्ज की। इस जीत के बाद झारखंड की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत की उम्मीद जताई जा रही है।

चुनावी गठबंधन और राज्य के लिए भविष्य की योजना:

JMM का नेतृत्व करते हुए, हेमंत सोरेन ने घोषणा की कि उनकी पार्टी का उद्देश्य झारखंड के विकास में तेजी लाना है। सरकार की प्राथमिकताओं में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, और झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल शामिल है। राज्य के युवा और आदिवासी समाज के लिए नीतियां तैयार की जाएंगी, जो उनकी बेहतर सामाजिक और आर्थिक स्थिति सुनिश्चित करें।

निष्कर्ष:

हेमंत सोरेन का चौथा कार्यकाल राज्य के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है। उनकी पार्टी ने 23 नवंबर के चुनाव परिणामों में शानदार जीत हासिल की है, जिससे यह संकेत मिलता है कि राज्य के लोग उनकी नेतृत्व क्षमता और विकास की दिशा में विश्वास रखते हैं। उनके नेतृत्व में गठबंधन सरकार की स्थिरता और विकास की दिशा पर आधारित योजनाओं को जल्द ही क्रियान्वित किया जाएगा। यह शपथ ग्रहण समारोह ना केवल एक राजनीतिक घटना है, बल्कि राज्य के भावी विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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