नई दिल्ली।
देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के IPO को लेकर लंबे समय से चला आ रहा इंतज़ार अब खत्म होने की कगार पर है। करीब एक दशक तक कानूनी और रेगुलेटरी अड़चनों में फंसे NSE को आखिरकार मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) से बड़ी राहत मिल गई है। सेबी ने NSE को IPO के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी कर दिया है, जिससे एक्सचेंज अब औपचारिक रूप से IPO प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकेगा।
इस मंजूरी के बाद NSE मर्चेंट बैंकरों और लॉ फर्म्स के साथ मिलकर अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) तैयार करेगा। बाजार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सभी प्रक्रियाएं तय समय पर पूरी रहीं तो 8 से 9 महीनों में IPO लॉन्च किया जा सकता है।
2016 से अटका था IPO, जांचों ने रोकी रफ्तार
NSE ने पहली बार वर्ष 2016 में IPO के लिए DRHP फाइल किया था, लेकिन उस समय को-लोकेशन और डार्क फाइबर जैसे मामलों में गंभीर आरोपों और जांचों के चलते उसे DRHP वापस लेना पड़ा। इन मामलों में सेबी की जांच, SAT और सुप्रीम कोर्ट में लंबित केस के कारण IPO की प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई थी।

इन कानूनी विवादों के चलते NSE कई वर्षों तक लिस्टिंग से दूर रहा, जबकि उसी दौरान उसके प्रतिद्वंद्वी BSE पहले ही शेयर बाजार में लिस्ट होकर निवेशकों को रिटर्न दे चुका था।
₹1,400 करोड़ के सेटलमेंट से खुला रास्ता
IPO की राह आसान बनाने के लिए NSE ने जून 2025 में सेबी के सामने सेटलमेंट एप्लीकेशन दाखिल की। इसके तहत एक्सचेंज ने लगभग ₹1,400 करोड़ का सेटलमेंट अमाउंट चुकाने पर सहमति जताई।
नवंबर 2025 की फाइनेंशियल रिपोर्ट में NSE ने
- ₹1,297 करोड़ का प्रोविजन
- पहले से जमा ₹100 करोड़
दिखाए थे, जिससे साफ हो गया था कि एक्सचेंज सेटलमेंट के लिए पूरी तरह तैयार है।
सेबी के भीतर मिल चुकी है इन-प्रिंसिपल मंजूरी
सूत्रों के अनुसार, सेबी के कई विभाग सेटलमेंट पर इन-प्रिंसिपल सहमति दे चुके हैं। अब यह मामला
- हाई पावर्ड एडवाइजरी कमिटी (HPAC)
- और फिर सेबी के दो Whole Time Members के पैनल
के पास जाएगा, जहां से अंतिम मंजूरी मिलेगी।
फाइनल अप्रूवल के बाद NSE सुप्रीम कोर्ट में लंबित केस को वापस ले सकेगा। लीगल एक्सपर्ट्स का कहना है कि NSE पहले ही SAT में केस जीत चुका था और सुप्रीम कोर्ट में भी सेबी को कोई बड़ी राहत नहीं मिली थी, लेकिन शेयरहोल्डर्स के दबाव और अनिश्चितता खत्म करने के लिए NSE ने सेटलमेंट का रास्ता चुना।

IPO पूरी तरह OFS होगा, कंपनी को नहीं मिलेगा नया फंड
NSE का प्रस्तावित IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा।
इसका मतलब है कि:
- कंपनी को IPO से कोई नया पैसा नहीं मिलेगा
- मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचेंगे
- लिस्टिंग के बाद NSE एक पब्लिकली लिस्टेड कंपनी बन जाएगी
मार्केट में चल रही डील्स के आधार पर NSE का अनुमानित मार्केट कैप करीब ₹5 लाख करोड़ आंका जा रहा है। इस वैल्यूएशन पर लिस्टिंग होने पर NSE भारत की सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनी बन सकती है।
NSE चेयरपर्सन का बयान
NSE के चेयरपर्सन श्रीनिवास इंजेटी ने कहा,
“SEBI से IPO की मंजूरी मिलना हमारी ग्रोथ जर्नी का एक अहम माइलस्टोन है। यह सभी स्टेकहोल्डर्स के लिए वैल्यू क्रिएशन का नया अध्याय शुरू करेगा और भारतीय अर्थव्यवस्था में NSE की भूमिका को और मजबूत बनाएगा।”
आगे क्या होगा: IPO का पूरा रोडमैप
अब आगे की प्रक्रिया कुछ इस तरह होगी—
- NSE मर्चेंट बैंकरों और लीगल एडवाइजर्स की नियुक्ति करेगा
- DRHP तैयार कर सेबी के पास फाइल किया जाएगा
- सेबी DRHP की जांच कर अंतिम मंजूरी देगा
- बाजार की स्थिति के अनुसार IPO लॉन्च किया जाएगा
- लिस्टिंग 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में संभव
भारतीय कैपिटल मार्केट के लिए ऐतिहासिक इवेंट
NSE का IPO भारतीय कैपिटल मार्केट के इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे अहम इवेंट माना जा रहा है। इससे
- मार्केट ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी
- कॉर्पोरेट गवर्नेंस मजबूत होगी
- और निवेशकों को देश के सबसे बड़े एक्सचेंज में हिस्सेदारी का मौका मिलेगा
करीब 10 साल के इंतज़ार के बाद NSE की लिस्टिंग न सिर्फ एक्सचेंज के लिए, बल्कि पूरे भारतीय शेयर बाजार के लिए एक नया युग साबित हो सकती है।