122 साल बाद पितृपक्ष में दोग्रहण: खगोलीय संयोग पर वैज्ञानिक तथ्य रखे ;

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सागर, 05 सितंबर 2025।
इस वर्ष पितृपक्ष की शुरुआत और समापन, दोनों ही खगोलीय घटनाओं से जुड़ रहे हैं। रविवार 07 सितंबर को पितृपक्ष की पूर्णिमा पर पूर्ण चंद्रग्रहण होगा, जबकि 21 सितंबर को पितृमोक्ष अमावस्या पर आंशिक सूर्यग्रहण पड़ेगा। खास बात यह है कि चंद्रग्रहण भारत में दिखाई देगा, लेकिन सूर्यग्रहण भारत से नहीं देखा जा सकेगा।

नेशनल अवॉर्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि यह संयोग बेहद रोचक है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसके संबंध में भ्रामक जानकारियाँ फैलाई जा रही हैं। कहा जा रहा है कि 122 साल बाद पितृपक्ष में दो ग्रहण हो रहे हैं और इसके उदाहरण के तौर पर सन 1903 का उल्लेख किया जा रहा है। जबकि तथ्य यह है कि उस समय की परिस्थितियाँ बिल्कुल अलग थीं।


1903 की घटना और वास्तविकता

सारिका ने स्पष्ट किया कि वर्ष 1903 में 21 सितंबर को पितृमोक्ष अमावस्या पर पूर्ण सूर्यग्रहण हुआ था। इसके बाद 06 अक्टूबर को आंशिक चंद्रग्रहण हुआ। लेकिन 6 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा थी और पितृपक्ष समाप्त हुए 15 दिन बीत चुके थे
इस प्रकार 1903 की घटना को पितृपक्ष से जोड़ना भ्रामक है। गलत तथ्यों को आधार बनाकर यह कहना कि 122 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है, वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं है।


पहले भी हो चुके हैं ऐसे संयोग

सारिका घारू ने बताया कि पितृपक्ष की शुरुआत और समापन पर ग्रहण का होना कोई अद्वितीय घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार यह संयोग बन चुका है—

  • वर्ष 2006 :
    • 07 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा पर आंशिक चंद्रग्रहण भारत में दिखाई दिया।
    • 22 सितंबर को पितृमोक्ष अमावस्या पर वलयाकार सूर्यग्रहण हुआ, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं दिया।
  • वर्ष 1978 :
    • 16 सितंबर को पितृपक्ष की शुरुआत पूर्ण चंद्रग्रहण से हुई।
    • 02 अक्टूबर को पितृमोक्ष अमावस्या पर आंशिक सूर्यग्रहण हुआ।

इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि यह खगोलीय संयोग पहले भी सामने आते रहे हैं।


वैज्ञानिक तथ्यों पर न लगाएँ “ग्रहण”

सारिका ने चिंता जताई कि आज के दौर में सोशल मीडिया पर बिना पड़ताल के फैलाई जा रही बातें वैज्ञानिक तथ्यों पर ग्रहण लगाने जैसा काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान और खगोलशास्त्र की सटीक जानकारी को गलत ढंग से प्रस्तुत करना लोगों में भ्रम और अंधविश्वास फैलाता है।

उन्होंने अपील की कि इस बार के पितृपक्ष को हम अपने पूर्वजों की स्मृति और वैज्ञानिक जानकारी के साथ मनाएँ। श्रद्धा और विज्ञान का संतुलन ही हमें सच्चे अर्थों में सही मार्गदर्शन देता है।


📊 पितृपक्ष से जुड़े ग्रहणों का तथ्यात्मक रिकॉर्ड (सारिका घारू द्वारा प्रस्तुत)

वर्षतिथिअवसरग्रहण का प्रकारभारत में दृश्यता
190321 सितंबर (पितृमोक्ष अमावस्या)सूर्यग्रहणपूर्णभारत में नहीं दिखा
06 अक्टूबर (शरद पूर्णिमा)चंद्रग्रहणआंशिकभारत में दिखा
200607 सितंबर (भाद्रपद पूर्णिमा)चंद्रग्रहणआंशिकभारत में दिखा
22 सितंबर (पितृमोक्ष अमावस्या)सूर्यग्रहणवलयाकारभारत में नहीं दिखा
197816 सितंबर (भाद्रपद पूर्णिमा)चंद्रग्रहणपूर्णभारत में दिखा
02 अक्टूबर (पितृमोक्ष अमावस्या)सूर्यग्रहणआंशिकभारत में नहीं दिखा

निष्कर्ष

इस बार का पितृपक्ष खगोलीय दृष्टि से खास है क्योंकि इसकी शुरुआत और समापन दोनों ग्रहण से जुड़े हैं। लेकिन इसे 122 साल बाद होने वाली दुर्लभ घटना बताना तथ्यों से छेड़छाड़ करना है।

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