उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से सागर में आर्मी भर्ती में शामिल होने आए एक युवक का ऑटो में छूटा बैग सागर पुलिस ने करीब 20 दिन की मेहनत के बाद ढूंढ निकालकर उसे सुरक्षित लौटा दिया। बैग में युवक के सभी मूल दस्तावेज थे, जिनके खो जाने से वह भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पाया था और निराश होकर घर लौट गया था। शनिवार को जब युवक सागर पहुंचा और पुलिस ने उसे उसका बैग सौंपा, तो उसके चेहरे पर राहत और खुशी साफ झलक रही थी।
दरअसल, बांदा जिले के बदौसा थाना अंतर्गत ग्राम उतरवा निवासी रामभजन निषाद 4 दिसंबर को अपने दोस्तों के साथ सागर में आयोजित टीआरसी आर्मी भर्ती में शामिल होने आया था। वे सभी ट्रेन से सागर रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां से ऑटो में सवार होकर भर्ती केंद्र के लिए रवाना हुए। भर्ती स्थल पर पहुंचने के बाद रामभजन को पता चला कि उसका बैग ऑटो में ही छूट गया है। बैग में उसके सभी जरूरी मूल दस्तावेज, प्रमाण पत्र और अन्य कागजात रखे हुए थे।

रामभजन ने तत्काल ऑटो चालक की तलाश की और आसपास काफी खोजबीन की, लेकिन बैग का कोई पता नहीं चला। दस्तावेजों के अभाव में वह भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सका और मायूस होकर अपने गांव लौट गया। मूल दस्तावेज खोने की वजह से वह मानसिक रूप से भी काफी परेशान था, क्योंकि दोबारा दस्तावेज बनवाने में लंबा समय और खर्च लगता, साथ ही भविष्य की भर्तियों और परीक्षाओं में भी दिक्कत आ रही थी।
इधर, बैग गुम होने की सूचना सागर पुलिस कंट्रोल रूम को भी मिली। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बैग की तलाश शुरू की और सोशल मीडिया के माध्यम से भी जानकारी साझा की। इसी दौरान एक ऑटो चालक स्वयं सागर कंट्रोल रूम पहुंचा और पुलिस को एक बैग सौंपा। उसने बताया कि कुछ दिन पहले उसकी ऑटो में यह बैग छूट गया था, जिसे वह अब पुलिस के हवाले कर रहा है।
पुलिस ने जब बैग खोलकर उसमें रखे दस्तावेज देखे तो वे उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के ग्राम उतरवा निवासी रामभजन निषाद के निकले। इसके बाद सागर कंट्रोल रूम प्रभारी उप निरीक्षक आरकेएस चौहान ने बांदा जिला कंट्रोल रूम से संपर्क किया, लेकिन गांव छोटा होने के कारण तत्काल जानकारी नहीं मिल सकी। इसके बाद बांदा जिले के विभिन्न थानों से संपर्क किया गया, जिससे पता चला कि उतरवा गांव बदौसा थाना क्षेत्र में आता है। वहां के ग्राम प्रधान से संपर्क कर रामभजन तक सूचना पहुंचाई गई।
सूचना मिलते ही रामभजन शनिवार को सागर पहुंचा। सागर कंट्रोल रूम में विधिवत कार्रवाई के बाद पुलिस ने उसे उसका बैग सुरक्षित लौटा दिया। बैग पाकर भावुक हुए रामभजन ने कहा, “इस बैग में मेरे पूरे जीवन की कमाई और भविष्य से जुड़े दस्तावेज थे। इनके बिना मैं किसी भी परीक्षा या भर्ती में शामिल नहीं हो पा रहा था। दोबारा दस्तावेज बनवाना बहुत मुश्किल था, लेकिन सागर पुलिस ने 20 दिन बाद भी मेरी मदद कर बैग लौटा दिया।”
इस सराहनीय कार्य में सागर पुलिस कंट्रोल रूम प्रभारी उप निरीक्षक आरकेएस चौहान, प्रधान आरक्षक आशीष दुबे और आरक्षक गौरव कोरी की अहम भूमिका रही। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस की ईमानदारी और संवेदनशीलता की सराहना की है। यह मामला न केवल पुलिस की कार्यशैली को दर्शाता है, बल्कि समाज में भरोसा और मानवता की मिसाल भी पेश करता है।