20 वर्ल्ड कप विजेता बेटियों पर उठे सवाल, CM मोहन यादव ने बुलाया मुख्यमंत्री निवास !

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भोपाल। देश को पहला ब्लाइंड विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप जिताने वाली मध्य प्रदेश की बेटियों को लेकर उठे सवालों के बाद अब राज्य सरकार की ओर से पहल हुई है। दैनिक भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्ल्ड चैंपियन खिलाड़ियों को मुख्यमंत्री निवास बुलाया और उनसे मुलाकात की।

पहले ब्लाइंड विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम पूरे टूर्नामेंट में अपराजित रही। फाइनल मुकाबले में भारत ने नेपाल को 7 विकेट से हराकर ऐतिहासिक खिताब अपने नाम किया। इस जीत में मध्य प्रदेश की तीन खिलाड़ियों— सुनीता सराठे (नर्मदापुरम), सुषमा पटेल (दमोह) और दुर्गा येवले (बैतूल) — की अहम भूमिका रही।

इतिहास रचने के बावजूद इन खिलाड़ियों को अब तक न तो राज्य सरकार की ओर से कोई औपचारिक सम्मान मिला था और न ही पुरस्कार राशि या नौकरी को लेकर कोई घोषणा हुई थी। इसी को लेकर सरकार के रवैये पर सवाल खड़े हुए।

अन्य राज्यों ने किया सम्मान, MP में चुप्पी

जहां मध्य प्रदेश में चुप्पी देखने को मिली, वहीं अन्य राज्यों ने अपनी खिलाड़ियों के लिए तुरंत सम्मान और घोषणाएं कीं।

  • ओडिशा: 11 लाख रुपए और नौकरी
  • कर्नाटक: 10 लाख रुपए और नौकरी
  • आंध्र प्रदेश: 15 लाख रुपए इनाम

दिलचस्प बात यह रही कि मध्य प्रदेश की तीनों खिलाड़ी आंध्र प्रदेश में सम्मानित की गईं, जहां डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने तीनों को 5-5 लाख रुपए का पुरस्कार दिया। अपने ही राज्य में सम्मान न मिलने को लेकर खिलाड़ियों और खेल संगठनों में नाराजगी भी सामने आई।

“एक अपॉइंटमेंट तक नहीं मिल पा रहा था”

क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड, मध्य प्रदेश के जनरल सेक्रेटरी, कोच और पूर्व भारतीय खिलाड़ी सोनू गोलकर ने कहा कि वर्ल्ड कप जीत के बाद कई खिलाड़ियों को तुरंत फोन और घोषणाएं मिलीं, लेकिन मध्य प्रदेश की इन बेटियों के लिए एक अपॉइंटमेंट तक नहीं मिल पा रहा था। उन्होंने बताया कि वे एक हफ्ते से प्रयास कर रहे थे, लेकिन सफलता नहीं मिली।

दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए अलग स्पोर्ट्स पॉलिसी की मांग

सोनू गोलकर ने कहा, “मैंने भी तीन वर्ल्ड कप खेले हैं, कभी किसी नेता का व्यक्तिगत फोन नहीं आया। लेकिन आज अगर इन लड़कियों के लिए लड़ना पड़े तो पीछे नहीं हटूंगा। ये बेटियां भी इसी देश की हैं। क्या सिर्फ इसलिए इन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है क्योंकि ये दिव्यांग हैं?”

उन्होंने कहा कि दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए अलग और स्पष्ट स्पोर्ट्स पॉलिसी आए बिना हालात नहीं सुधरेंगे। अगर आज इन खिलाड़ियों को सम्मान नहीं मिलता तो यह भेदभाव होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अन्य क्षेत्रों में खजाना खोला जा सकता है, तो वर्ल्ड चैंपियन बेटियां किस गुनाह की सजा भुगत रही हैं।

CM हाउस में मुलाकात

दैनिक भास्कर की खबर के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तीनों वर्ल्ड चैंपियन खिलाड़ियों को मुख्यमंत्री निवास बुलाया और उनसे मुलाकात की। इस पहल को खिलाड़ियों और खेल जगत के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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