अमेरिका के मिनेसोटा राज्य के कोलंबिया हाइट्स में मंगलवार को इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (ICE) एजेंट्स ने 5 साल के लियाम कोनेजो रामोस को उसके पिता के साथ हिरासत में लिया। दोनों को टेक्सास के साउथ टेक्सास फैमिली रेजिडेंशियल सेंटर भेजा गया।
स्कूल सुपरिटेंडेंट जेना स्टेनविक ने बताया कि एजेंट्स ने बच्चे को चलती गाड़ी से उतारा और फिर घर का दरवाजा खटखटाने को कहा। पिता ने डर के कारण तुरंत दरवाजा नहीं खोला, लेकिन कुछ देर बाद जैसे ही दरवाजा खोला गया, एजेंट्स ने पिता को गिरफ्तार कर लिया और बच्चे को भी अपने साथ ले गए।
ICE प्रवक्ता ट्रिशिया मैकलॉफलिन ने कहा कि बच्चा टारगेट नहीं था, बल्कि सुरक्षा कारणों से उसे पिता के साथ रखा गया। बच्चे के माता-पिता का शरण (Asylum) मामला अभी एक्टिव है और उन्हें अमेरिका छोड़ने का कोई आदेश नहीं मिला था।

पूर्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने घटना की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि लियाम सिर्फ बच्चा है और उसे अपने परिवार के साथ घर में होना चाहिए।
स्कूलों में डर का माहौल:
कोलंबिया हाइट्स पब्लिक स्कूल में हाल के हफ्तों में छात्रों की उपस्थिति काफी कम हो गई है। स्कूल प्रशासन के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में एक दिन में करीब एक-तिहाई छात्र स्कूल नहीं आए। ICE के गश्त और बच्चों की हिरासत ने छात्रों और परिवारों में डर पैदा कर दिया है।

साउथ टेक्सास फैमिली रेजिडेंशियल सेंटर:
टेक्सास के डिली शहर में स्थित यह अमेरिका का सबसे बड़ा इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर है। यहां मुख्य रूप से महिलाओं और बच्चों को रखा जाता है। सेंटर में कॉटेज-जैसे घर, खेल का मैदान, लाइब्रेरी, जिम, कैफेटेरिया और मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह सेंटर पहले बाइडन प्रशासन के दौरान बंद था, लेकिन ट्रम्प प्रशासन ने इसे फिर से खोला।

मिनेसोटा में हालात:
ICE एजेंट्स ने हाल ही में मिनेसोटा में 3,000 लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें लगभग 400 बच्चे शामिल हैं। स्थानीय लोग इसे नस्लीय भेदभाव और डराने-धमकाने के रूप में देख रहे हैं। हाल में एक फेडरल अधिकारी ने एक वेनेजुएला नागरिक को गोली मार दी, जिससे इलाके में तनाव और बढ़ गया।

ICE एजेंसी क्या करती है:
ICE अमेरिका की फेडरल एजेंसी है, जो अवैध इमिग्रेशन रोकने, डिपोर्टेशन और क्रॉस-बॉर्डर अपराधों पर कार्रवाई करती है। यह डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के तहत काम करती है। ICE बिना वैध दस्तावेज़ वाले लोगों की पहचान करती है, उन्हें हिरासत में रखती है और कोर्ट के आदेश के बाद देश से बाहर भेजती है।
विशेषज्ञों और अधिकारों के समूहों ने कहा है कि बच्चों का डिटेंशन मानवाधिकार के खिलाफ है। चिल्ड्रेंस राइट्स संगठन की लीशिया वेल्च के अनुसार कई बच्चे 100 दिनों से अधिक समय तक हिरासत में रह चुके हैं और उनमें गंभीर शारीरिक व मानसिक समस्याएं हैं।