75 फीट ऊंची सदाशिव प्रतिमा का लोकार्पण, सात दिवसीय महोत्सव शुरू !

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सागर: रावतपुरा सरकार आश्रम में संत रविशंकर महाराज का जन्मोत्सव व 75 फीट ऊंची सदाशिव प्रतिमा का लोकार्पण, सात दिवसीय महोत्सव शुरू

सागर के रावतपुरा सरकार आश्रम वेदांती परिसर में संत रविशंकर महाराज के जन्मोत्सव और 75 फीट ऊंची सदाशिव प्रतिमा के लोकार्पण के उपलक्ष्य में सात दिवसीय भव्य महोत्सव की शुरुआत रविवार को कलश यात्रा से होगी। यह आयोजन रावतपुरा सरकार लोक कल्याण ट्रस्ट की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है।

5 जुलाई को मुख्यमंत्री करेंगे लोकार्पण

रावतपुरा सरकार आश्रम के मीडिया संयोजक विकास द्विवेदी ने बताया कि दो वर्षों की मेहनत से राजस्थान और छत्तीसगढ़ के मूर्तिकारों द्वारा निर्मित 75 फीट ऊंची भव्य ‘सदाशिव प्रतिमा’ का लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 5 जुलाई को दोपहर 1 बजे अभिजित मुहूर्त में किया जाएगा। उसी दिन लक्ष्मीनारायण महायज्ञ की पूर्णाहुति एवं भंडारे का आयोजन भी होगा।

राजनीतिक और सांस्कृतिक हस्तियां रहेंगी उपस्थित

इस आयोजन में कई प्रमुख राजनेता भाग लेंगे। इनमें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक, उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल, गोविंद सिंह राजपूत, पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, सांसद डॉ. लता वानखेड़े, महापौर संगीता तिवारी और क्षेत्रीय विधायक शामिल होंगे।

महोत्सव में सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों की भरमार

सात दिवसीय आयोजन के तहत प्रतिदिन विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे:

  • 29 जून: रात 8 बजे से प्रख्यात कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक संध्या।
  • 30 जून: रात 8 बजे कवि सम्मेलन – जिसमें राव अजातशत्रु, शंभू शिखर, डॉ. रुचि चतुर्वेदी, शशि श्रेया, योगेन्द्र शर्मा व अन्य कवि काव्यपाठ करेंगे। सूत्रधार होंगे सुमित ओरछा।
  • 3 जुलाई: प्रसिद्ध बुंदेली गायिका कविता शर्मा की प्रस्तुति।
  • 4 जुलाई: मां राज राजेश्वरी विद्या द्वादश लक्ष्यार्चन का आयोजन शाम 7 बजे से।
  • 5 जुलाई: महायज्ञ की पूर्णाहुति, भंडारा और बुंदेली कलाकार जित्तू खरे की प्रस्तुति के साथ महोत्सव का समापन।

सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम

यह आयोजन न केवल संत रविशंकर महाराज की साधना और सेवा को समर्पित है, बल्कि बुंदेलखंड की सांस्कृतिक चेतना, भक्ति, और लोक परंपराओं को भी समृद्ध करता है। श्रद्धालुओं और श्रद्धेय संतों के बीच यह आयोजन आध्यात्मिक ऊर्जा और जनकल्याण की प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की है।

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