83 साल के हुए सुभाष घई, बोले– अब सिनेमा के साथ समाज और देश के लिए काम प्राथमिकता !

Spread the love

हिंदी सिनेमा को कालीचरण, कर्ज, हीरो, कर्मा और राम लखन जैसी सुपरहिट फिल्में देने वाले दिग्गज निर्देशक सुभाष घई आज अपना 83वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास मौके पर उन्होंने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अपने जीवन, सिनेमा, संस्कार और भविष्य की सोच को लेकर खुलकर बात की। घई ने कहा कि अब उनके जीवन का फोकस सेहत, आध्यात्म, परिवार, समाज और देशहित पर है।

सुभाष घई ने बताया कि बचपन में उनका जन्मदिन बेहद सादगी से मनाया जाता था। “चार दोस्त आ गए, बत्ती जली और केक कट गया, बस उसी में खुशी मिल जाती थी। संघर्ष के दिनों में तो जन्मदिन मनाने का सवाल ही नहीं उठता था।” उन्होंने कहा कि जब वे निर्देशक-निर्माता बने, तब जन्मदिन को एक तरह से मार्केटिंग से जोड़ दिया गया, लेकिन अब हर जन्मदिन पर वे खुद से यह सवाल करते हैं कि क्या वे मानसिकता, चरित्र और समाज के लिए अपने योगदान में आगे बढ़े हैं या नहीं।

24 जनवरी की तारीख उनके लिए खास है। उन्होंने बताया कि उनका नाम उनके नानाजी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस से प्रेरित होकर रखा था। “मैं नागपुर में पैदा हुआ था। नानाजी नेताजी के बड़े प्रशंसक थे। 23 जनवरी को नेताजी का जन्मदिन मनाने के बाद जब 24 जनवरी को मेरा जन्म हुआ, तो उन्होंने मेरा नाम सुभाष रख दिया।” घई ने यह भी बताया कि पांच साल की उम्र में जब उन्होंने अपनी मां से ‘सुभाष’ नाम का अर्थ पूछा और मां ने ‘अच्छी भाषा बोलने वाला’ बताया, तब से उन्होंने कटु भाषा न बोलने का संकल्प ले लिया।

उन्होंने कहा कि उनके जीवन में दो दिन बेहद अहम हैं—24 जनवरी (जन्मदिन) और 24 अक्टूबर (शादी की सालगिरह)। 24 अक्टूबर 1970 को उनकी शादी मुक्ता से हुई थी। घई के अनुसार, ये दोनों तारीखें उनके लिए कमिटमेंट और आत्ममंथन के दिन हैं। व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल की स्थापना से लेकर मुक्ता आर्ट्स से जुड़े कई अहम फैसले उन्होंने इन्हीं तारीखों के आसपास किए।

शूटिंग के दौरान जन्मदिन मनाने के किस्से साझा करते हुए घई ने बताया कि वे कभी शूटिंग छोड़कर जन्मदिन नहीं मनाते थे। राम लखन की शूटिंग के दौरान अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ, माधुरी दीक्षित और राखी ने सेट पर ही उनका जन्मदिन मनाया था।

सुभाष घई ने पश्चिमी शैली में जन्मदिन मनाने पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि केक काटना और इंग्लिश में गाना 200 साल पुरानी परंपरा है। “मैं चाहता हूं कि लोग अपने भारतीय रीति-रिवाज से जन्मदिन मनाएं। बच्चों से कहता हूं कि केक-कैंडल की जगह लड्डू और दीया लेकर आया करें।”

अपने मौजूदा जीवन के बारे में उन्होंने बताया कि अब वे शिक्षा और समाज सेवा पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। व्हिसलिंग वुड्स में छात्रों को अपना अनुभव देना, किताबें पढ़ना, कविताएं और नाटक लिखना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है।

उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें 26 जनवरी को राष्ट्रपति भवन से आमंत्रण मिला है। “यह मेरे लिए सम्मान की बात है। 50 साल की फिल्म मेकिंग और 25 साल शिक्षा के क्षेत्र में दिए योगदान को मान्यता मिलना गर्व का विषय है।”

83 साल की उम्र में भी सुभाष घई का सक्रिय और सकारात्मक नजरिया उन्हें भारतीय सिनेमा की एक प्रेरणादायक शख्सियत बनाए हुए है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *