92 करोड़ की एमडी ड्रग फैक्ट्री कांड में आरोपी रज्जाक की कहानी: परिवार बोला;

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मध्यप्रदेश के विदिशा जिले का छोटा सा गांव दाऊद बासौदा अचानक सुर्खियों में है। कारण है यहां का निवासी रज्जाक खान, जो 16 अगस्त को डायरेक्टोरेट रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) की गिरफ्त में आया। आरोप है कि वह अपने दोस्त फैजल कुरैशी के साथ मिलकर एमडी ड्रग (मेफेड्रोन) बनाने के कारोबार में शामिल था। इस मामले ने तब सनसनी फैलाई, जब डीआरआई ने जगदीशपुरा (इस्लामनगर) स्थित फैक्ट्री पर छापा मारकर 92 करोड़ की ड्रग्स बरामद की।

इस कार्रवाई में 61.20 किलो लिक्विड मेफेड्रोन और 541 किलो से ज्यादा कच्चा माल मिला। मौके से रज्जाक और फैजल को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा एजेंसी ने अलग-अलग जगहों से 5 और आरोपियों को पकड़ा है।

लेकिन जब भास्कर की टीम रज्जाक के पैतृक गांव दाऊद बासौदा पहुंची, तो यहां परिवार के दर्द और उलझन की तस्वीर सामने आई।


150 बीघे से 20 बीघा तक सिमटी पुश्तैनी जमीन

गांव में करीब 1500 की आबादी है और ज्यादातर लोग खेती करते हैं। रज्जाक का परिवार भी इसी परंपरा से जुड़ा है। कभी दादा हाजी मंगत खान के पास 150 बीघा जमीन थी। बंटवारे के बाद उनके हिस्से में 50 बीघा आई और आगे तीन बेटों में बांटने पर रज्जाक के पिता वाहिद खान को 20 बीघा जमीन मिली।
आज परिवार खेती करता है, लेकिन रज्जाक ने गांव छोड़कर अलग रास्ता चुना।


भाई बोले- हमें तो पुलिस से पहले कुछ पता ही नहीं था

गांव पहुंचने पर रज्जाक के बड़े भाई सलीम खान और छोटे भाई अलीम खान मिले। सलीम बताते हैं—
“हमें उसकी गिरफ्तारी का पता तब चला, जब उसकी पत्नी कौसर ने फोन कर बताया कि पुलिस ने उसे पकड़ लिया है। हमने पूछा किस मामले में? तो उसने कहा कि दोस्त फैजल ने फंसा दिया।”

सलीम का कहना है कि रज्जाक भोपाल में रह रहा था। एक महीने पहले ही फैजल उसे लेकर इस्लामनगर के जगदीशपुरा आया और मकान उसके नाम पर खरीदवाया। मकान की कीमत करीब 13 लाख रुपए थी।


गांव वालों की समझ: नशा मतलब सिर्फ तंबाकू

सलीम बताते हैं कि उनके गांव में न तो चाय-पान की दुकान है और न ही शराब का कोई ठिकाना। यहां लोग नशा शब्द को सिर्फ तंबाकू तक ही समझते हैं।
“हमारे लिए तो यही नशा है, वो भी हाथ से घिसकर खाने वाला। ड्रग्स का नाम तक यहां किसी ने नहीं सुना।”

छोटे भाई अलीम ने बताया कि रज्जाक ने गांव से स्कूली पढ़ाई करने के बाद विदिशा पॉलिटेक्निक कॉलेज से डिप्लोमा किया। इसी दौरान उसकी फैजल से दोस्ती हुई। बाद में फैजल गुजरात चला गया और रज्जाक भोपाल में टेलीकॉम कंपनी में नौकरी करने लगा।


2014 तक नौकरी, फिर ठेकेदारी; 2018 में शादी

2014 तक रज्जाक अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों में नौकरी करता रहा। बाद में उसने मोबाइल टावरों पर मशीनें लगाने का ठेका लेना शुरू कर दिया। साल 2018 में उसकी शादी कौसर से हुई। एक साल तक दोनों गांव में रहे, फिर भोपाल शिफ्ट हो गए।

परिवार के मुताबिक, कोरोना काल के बाद उसका गांव आना-जाना कम हो गया।
बड़े भाई सलीम बताते हैं—
“पिछले 1-1.5 साल से रिश्ते और खराब हो गए थे। वह अक्सर जमीन में हिस्सेदारी मांगता था। मैंने कहा था कि छोटे भाई अलीम की शादी हो जाने के बाद तुम भी ले लेना।”


मुंबई-गुजरात कनेक्शन और सोशल मीडिया सबूत

परिवार का कहना है कि रज्जाक पिछले दो सालों में मुंबई और गुजरात गया। उसके सोशल मीडिया अकाउंट से पता चला कि वह दिसंबर 2023 और मार्च 2024 में मुंबई गया था। उसने समुद्र किनारे और अंबानी के एंटालिया निवास के बाहर वीडियो पोस्ट किए।
इसी तरह 2024 में वह गुजरात भी गया था और परिवार को खुद बताया था कि फैजल से मिलने जा रहा है।

डीआरआई को यही यात्राएं उसके नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में मदद कर रही हैं।


गांव में पुलिस की लगातार दबिश, लेकिन कुछ नहीं मिला

जगदीशपुरा फैक्ट्री से भारी मात्रा में ड्रग्स बरामद होने के बाद से पुलिस और एजेंसियां लगातार गांव पहुंच रही हैं। रज्जाक के पुश्तैनी मकान की कई बार तलाशी ली गई, लेकिन कुछ भी बरामद नहीं हुआ।
सलीम बताते हैं—
“हमने वो कमरा दिखाया जहां उसका सामान रखा था। उसमें सिर्फ शादी का पलंग और कुछ कपड़े हैं। पुलिस ने पूछताछ की, हमने सब सच बता दिया।”


पिता जमात में, मां को नहीं बताया गया सच

रज्जाक के पिता वाहिद खान धार्मिक किस्म के इंसान हैं और इस वक्त जमात में गए हुए हैं। तीन दिन बाद घर लौटेंगे।
घर पर मां जाहिद रहती हैं, जो बीमार रहती हैं। सलीम बताते हैं—
“मां को अभी तक नहीं बताया कि रज्जाक गिरफ्तार हुआ है। वो उसे रज्जू कहकर पुकारती हैं। अगर पता चला तो उन्हें बड़ा सदमा लगेगा।”


परिवार का दावा: रज्जाक निर्दोष है

परिवार का साफ कहना है कि रज्जाक निर्दोष है और उसे फैजल ने फंसाया है।
“वो सीधा-सादा लड़का है। अपने काम से काम रखने वाला। वो नशा तो दूर, तंबाकू तक नहीं खाता था।”
हालांकि, एजेंसियों के हाथ लगे सबूत बताते हैं कि रज्जाक की गतिविधियां भोपाल, मुंबई और गुजरात तक फैली थीं।


नतीजा

दाऊद बासौदा गांव का रज्जू, जो कभी खेतों में हल चलाता था और मोबाइल टावरों के ठेके का काम करता था, आज देश के सबसे बड़े एमडी ड्रग रैकेट के आरोपियों में से एक बन गया है।
परिवार भरोसा नहीं कर पा रहा कि उनका बेटा ड्रग माफिया बन गया, जबकि जांच एजेंसियां मान रही हैं कि उसका नेटवर्क गहरा है।

अब असली सवाल यह है कि क्या वाकई रज्जाक सिर्फ फैजल का मोहरा था या फिर वह भी इस करोड़ों के ड्रग कारोबार में सक्रिय भागीदार? इसका जवाब तो आगे की जांच और अदालत ही दे पाएगी।

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