संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के झूठे दावों को लेकर भारत ने मंगलवार को तीखा जवाब दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने ओपन डिबेट के दौरान कहा —
“पाकिस्तान एक ऐसा देश है जो अपने ही नागरिकों पर बम गिराता है, नरसंहार करता है और फिर मानवाधिकारों पर भाषण देता है। जिस देश ने चार लाख महिलाओं के साथ बलात्कार किया, उसे दूसरों को सिखाने का कोई हक नहीं।”
🇵🇰 कश्मीर पर झूठ फैलाने में जुटा पाकिस्तान
दरअसल, एक पाकिस्तानी अधिकारी ने संयुक्त राष्ट्र मंच से आरोप लगाया था कि कश्मीर में भारतीय सुरक्षा बल दशकों से महिलाओं पर अत्याचार कर रहे हैं। इसके जवाब में भारत ने साफ शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है — था, है और रहेगा।
हरीश ने कहा कि पाकिस्तान बार-बार झूठ बोलकर दुनिया का ध्यान भटकाने की कोशिश करता है,
“जो देश अपने यहां निर्दोषों पर बम बरसाता है, धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करता है और आतंकियों को पालता है, वह मानवाधिकार की बात करने का अधिकारी नहीं है।”
⚔️ 1971 के नरसंहार की याद दिलाई
भारतीय राजदूत ने पाकिस्तान को उसके ही इतिहास की याद दिलाते हुए कहा —
“दुनिया नहीं भूली है कि पाकिस्तान ने 1971 में ऑपरेशन सर्चलाइट चलाकर 30 लाख लोगों की हत्या की थी। उस अभियान में पाकिस्तानी सेना ने चार लाख महिलाओं के साथ बलात्कार किया था।”
हरीश ने कहा कि यह वही पाकिस्तान है, जो आज भी अपनी सेना के अत्याचारों को सही ठहराने की कोशिश करता है, जबकि सच्चाई यह है कि उसके झूठ अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने उजागर हो चुके हैं।
💣 22 सितंबर को खुद की जनता पर बम गिराया
भारत ने हालिया उदाहरण देते हुए कहा कि 22 सितंबर को पाकिस्तान की वायुसेना ने खैबर पख्तूनख्वा की तिराह घाटी में बिना चेतावनी बमबारी की, जिसमें 30 से ज्यादा नागरिक मारे गए। पाकिस्तान ने दावा किया कि यह हमला तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के आतंकियों पर था, लेकिन स्थानीय रिपोर्टों ने बताया कि अधिकतर मृतक निर्दोष आम नागरिक थे।
🇮🇳 भारत ने कहा – पाकिस्तान का असली चेहरा बेनकाब
पिछले हफ्ते भी जिनेवा में मानवाधिकार परिषद (UNHRC) की बैठक में भारत ने पाकिस्तान को कठघरे में खड़ा किया था। भारतीय प्रतिनिधि के.एस. मोहम्मद हुसैन ने कहा था —
“जो देश अपने यहां धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों पर जुल्म करता है, वह दूसरों को मानवाधिकार का पाठ नहीं पढ़ा सकता। पाकिस्तान का असली चेहरा अब पूरी दुनिया देख चुकी है।”