मध्य प्रदेश के भिंड जिले में करीब तीन साल पहले हुए दर्दनाक करंट हादसे के मामले में सत्र न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने युवक की मौत के लिए जिम्मेदार लापरवाह आरोपी केशव सिंह को दोषी ठहराते हुए 7 साल के सश्रम कारावास और कुल 10 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। इस फैसले को लापरवाही के मामलों में एक सख्त उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
यह पूरा मामला भिंड जिले के नयागांव थाना क्षेत्र के ग्राम सगरा का है, जहां अवैध रूप से डाले गए बिजली तारों ने एक युवक की जान ले ली थी। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी और अब कोर्ट के फैसले के साथ पीड़ित परिवार को न्याय मिला है।
खेत में काम करते समय हुआ हादसा
मृतक की पहचान भोलू उर्फ आदित्य के रूप में हुई थी, जो गांव में बटाई पर खेत लेकर खेती करता था। घटना वाले दिन वह ट्रैक्टर से खेत की जुताई कर रहा था। इसी दौरान खेत में नीचे की ओर झूल रहे बिजली के अवैध तारों से ट्रैक्टर टकरा गया। तारों की प्लास्टिक कोटिंग पहले ही खराब हो चुकी थी, जिससे वे पूरी तरह खुले और अत्यंत खतरनाक बन चुके थे।
जैसे ही ट्रैक्टर इन तारों के संपर्क में आया, उसमें करंट फैल गया और भोलू इसकी चपेट में आ गया। करंट इतना तेज था कि उसे संभलने का मौका तक नहीं मिला और मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ा दी थी।

ट्यूबवेल के लिए अवैध कनेक्शन बना जानलेवा
जांच में सामने आया कि आरोपी केशव सिंह ने अपने ट्यूबवेल को चलाने के लिए एलटी (लो टेंशन) लाइन से अवैध रूप से बिजली कनेक्शन लिया हुआ था। उसने खेत में खंभे गाड़कर नीचे से तार बिछाए थे, जो समय के साथ जर्जर हो गए थे। तारों की सुरक्षा पर ध्यान न देने के कारण उनकी प्लास्टिक कोटिंग उतर गई थी और वे खुले रूप में लटक रहे थे।
ग्रामीणों ने कई बार आरोपी को इन खतरनाक तारों को हटाने या ठीक कराने की सलाह दी थी। लोगों ने संभावित खतरे को देखते हुए चेतावनी भी दी थी, लेकिन आरोपी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उसकी यही लापरवाही आखिरकार एक युवक की जान पर भारी पड़ गई।
पुलिस जांच और कोर्ट में सुनवाई
हादसे के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू की। साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 और 238 के तहत मामला दर्ज किया गया। जांच पूरी होने के बाद प्रकरण को सत्र न्यायालय में पेश किया गया।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूत पक्ष रखा। मृतक के परिजनों, प्रत्यक्षदर्शियों, चिकित्सकों और पुलिस अधिकारियों सहित कुल 13 गवाहों को पेश किया गया। सभी गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने पाया कि आरोपी की लापरवाही सीधे तौर पर युवक की मौत का कारण बनी।
दो धाराओं में सजा, जेल भेजा गया आरोपी
सत्र न्यायालय ने आरोपी केशव सिंह को दोषी मानते हुए कड़ी सजा सुनाई। अदालत ने धारा 105 के तहत 7 वर्ष का सश्रम कारावास और 7000 रुपए का जुर्माना तथा धारा 238 के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास और 3000 रुपए का जुर्माना लगाया। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। इस फैसले से मृतक के परिवार को कुछ हद तक न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
लापरवाही पर सख्त संदेश
यह मामला केवल एक हादसा नहीं, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी भी है। अवैध बिजली कनेक्शन और सुरक्षा नियमों की अनदेखी किस तरह जानलेवा साबित हो सकती है, यह घटना इसका उदाहरण है। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर लोग बिना सुरक्षा उपायों के बिजली का उपयोग करते हैं, जिससे ऐसे हादसे होने की आशंका बनी रहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली से जुड़े कार्यों में थोड़ी सी भी लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है। प्रशासन और बिजली विभाग को भी ऐसे अवैध कनेक्शनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
न्याय के साथ जागरूकता की जरूरत
भिंड कोर्ट का यह फैसला न केवल आरोपी को सजा देने तक सीमित है, बल्कि यह समाज को भी एक सख्त संदेश देता है कि लापरवाही और नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही यह भी जरूरी है कि ग्रामीण स्तर पर लोगों को बिजली सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए।
भोलू उर्फ आदित्य की मौत एक दुखद घटना थी, लेकिन इस फैसले से उम्मीद है कि भविष्य में लोग अधिक सतर्क रहेंगे और ऐसी लापरवाही से बचेंगे, ताकि किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े।