इंदौर कोर्ट का बड़ा फैसला: छेड़छाड़, पीछा करने और अश्लील टिप्पणी के मामले में आरोपी को 2 साल की सजा
इंदौर जिला कोर्ट ने महिला से छेड़छाड़, पीछा करने, अश्लील टिप्पणी करने और बुरी नीयत से हाथ पकड़ने के गंभीर मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए दो साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पर 500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह मामला इंदौर के मल्हारगंज थाना क्षेत्र का है, जिसमें कोर्ट ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी के खिलाफ सख्त निर्णय दिया।
घटना कैसे हुई थी?
यह घटना 10 जुलाई 2022 की रात लगभग 10 बजे की है। पीड़िता अपनी बहन के साथ पास की किराना दुकान से मैगी लेने गई थी। खरीदारी के बाद जब दोनों घर लौट रही थीं, तभी आरोपी केशव उर्फ केशु पिता दिलीप राठौर उनके पीछे-पीछे चलने लगा।
आरोपी ने रास्ते में महिलाओं को देखकर अश्लील टिप्पणियां करनी शुरू कर दीं। उसने आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि उसे कोई बात करने वाला मिल जाए तो उसे अच्छा लगेगा और चांद से जुड़ी आपत्तिजनक तुलना भी की। उसकी ये हरकतें लगातार बढ़ती गईं और वह महिलाओं का पीछा करता रहा।
हाथ पकड़ने और धमकी देने की घटना
पीड़िता ने जब आरोपी की हरकतों का विरोध किया तो उसने बुरी नीयत से उसका हाथ पकड़ लिया। यह स्थिति देखते ही पीड़िता और उसकी बहन ने शोर मचाया। शोर सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए।

भीड़ और विरोध बढ़ने पर आरोपी ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी भी दी और वहां से भागने की कोशिश की। इस पूरी घटना को पीड़िता की बहन और आसपास मौजूद लोगों ने देखा, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
पुलिस जांच और कार्रवाई
घटना की शिकायत मल्हारगंज थाने में दर्ज कराई गई। पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज करते हुए भारतीय दंड संहिता (IPC) की छेड़छाड़, पीछा करने, अश्लील हरकत और धमकी देने जैसी धाराओं में जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने:
- घटनास्थल का नक्शा तैयार किया
- पीड़िता और गवाहों के बयान दर्ज किए
- आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी सुनिश्चित की
पुलिस की जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर मामले को मजबूत माना गया और इसे गंभीर श्रेणी में रखा गया।
कोर्ट में सुनवाई और सबूत
मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मिनी गुप्ता की अदालत में चला। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी स्वाति पाराशर ने पैरवी की।
सरकारी पक्ष ने अदालत में सात महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज कराए, जिनमें पीड़िता, उसकी बहन और आसपास के प्रत्यक्षदर्शी शामिल थे। इसके अलावा पुलिस जांच रिपोर्ट, घटनास्थल नक्शा और अन्य दस्तावेज भी कोर्ट में पेश किए गए।
अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी की हरकतें केवल छेड़छाड़ नहीं बल्कि सुनियोजित उत्पीड़न और डराने-धमकाने की श्रेणी में आती हैं, जिससे पीड़िता की सुरक्षा और गरिमा पर गंभीर असर पड़ा।
कोर्ट का फैसला
सभी साक्ष्यों और गवाहों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत दोषी करार दिया। कोर्ट ने माना कि आरोपी की हरकतें महिलाओं की गरिमा के खिलाफ गंभीर अपराध हैं और इन्हें किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अदालत ने आरोपी को:
- 2 वर्ष का सश्रम कारावास
- 500 रुपये का अर्थदंड
की सजा सुनाई।
फैसले का महत्व
यह फैसला महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों में न्याय व्यवस्था की गंभीरता को दर्शाता है। कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के साथ छेड़छाड़, पीछा करना और धमकी देना किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस तरह के मामलों में तेजी से जांच, गवाहों की गवाही और मजबूत सबूतों के आधार पर दोष सिद्ध होने से यह संदेश भी जाता है कि कानून व्यवस्था ऐसे अपराधों पर सख्त रुख अपनाती है।
सामाजिक संदेश
यह मामला केवल एक कानूनी फैसला नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी है कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है। सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली ऐसी घटनाएं न केवल पीड़ित व्यक्ति को प्रभावित करती हैं, बल्कि पूरे समाज में असुरक्षा की भावना पैदा करती हैं।
कोर्ट का यह निर्णय यह भी दिखाता है कि यदि पीड़िता साहस के साथ शिकायत दर्ज कराए और पुलिस व न्याय प्रणाली उचित तरीके से काम करे, तो न्याय
Indore District Court का यह फैसला छेड़छाड़ और उत्पीड़न के मामलों में एक मजबूत उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि महिलाओं के खिलाफ किसी भी तरह की अभद्रता, पीछा करना या धमकी देना गंभीर अपराध है, जिसके लिए सख्त सजा तय है।
यह निर्णय न केवल पीड़िता के लिए न्याय है, बल्कि समाज में ऐसी घटनाओं के खिलाफ एक सख्त चेतावनी भी है कि कानून ऐसे अपराधों को हल्के में नहीं लेगा।