मध्य प्रदेश के इंदौर में जल संकट एक बार फिर गंभीर रूप लेता जा रहा है। भागीरथपुरा में हुए जल कांड की भयावह यादें अभी ताजा ही हैं, जहां दूषित पानी के कारण 35 लोगों की मौत हो गई थी। अब शहर के देवगुराड़िया में भी पानी की स्थिति चिंताजनक हो गई है।
यहां बोरिंग से निकलने वाला पानी न सिर्फ बदबूदार है, बल्कि उसका रंग भी पीले डीजल जैसा दिखाई दे रहा है। लोग मजबूरी में इसी पानी का उपयोग कर रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है।
त्वचा रोग और बाल झड़ने की बढ़ती समस्या
स्थानीय रहवासियों के अनुसार, इस दूषित पानी के इस्तेमाल से लोगों में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं।
- शरीर में खुजली और चकत्ते
- त्वचा में जलन और एलर्जी
- तेजी से बाल झड़ना
कई महिलाओं ने बताया कि कंघी करते समय उनके बाल गुच्छों में टूट रहे हैं। पुरुष भी इस समस्या से अछूते नहीं हैं। युवाओं का कहना है कि पानी के कारण वे समय से पहले गंजे हो रहे हैं।

पानी में टीडीएस अधिक, RO भी फेल
विशेषज्ञों का मानना है कि पानी में TDS (Total Dissolved Solids) का स्तर बहुत ज्यादा है।
- आरओ फिल्टर 2-3 महीने में खराब हो रहे हैं
- बर्तन पीले पड़ रहे हैं
- पानी गर्म करने पर मोटी परत जम रही है
डॉक्टरों के अनुसार, ऐसा पानी लंबे समय तक उपयोग करने से त्वचा और बालों की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
ट्रेंचिंग ग्राउंड और CNG प्लांट पर आरोप
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड और एक बड़े CNG प्लांट से निकलने वाला गंदा पानी जमीन में रिस रहा है।
यह दूषित पानी भूजल में मिलकर आसपास की कॉलोनियों तक पहुंच रहा है।
देवगुराड़िया, पत्थर मुंडला, मानसरोवर और श्रीजी वैली जैसे क्षेत्रों में भी पानी की गुणवत्ता खराब हो चुकी है।
पीने योग्य नहीं, टैंकर पर निर्भरता
स्थिति इतनी खराब है कि:
- पानी पीने योग्य नहीं है
- नहाने और कपड़े धोने में भी उपयोग नहीं किया जा सकता
- लोग महंगे टैंकर मंगवाने को मजबूर हैं
एक टैंकर के लिए 600 से 700 रुपए तक खर्च करना पड़ रहा है, जो आम लोगों के लिए बड़ा आर्थिक बोझ बन गया है।

डॉक्टरों की चेतावनी
त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ड और दूषित पानी के उपयोग से:
- रोमछिद्र बंद हो जाते हैं
- मुंहासे और एक्जिमा बढ़ सकता है
- बाल कमजोर होकर टूटने लगते हैं
- डैंड्रफ और खुजली बढ़ती है
उन्होंने सलाह दी है कि लोग पानी को शुद्ध करने के उपाय अपनाएं और संभव हो तो फिल्टर या फिटकरी का उपयोग करें।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
मामले पर अधिकारियों का कहना है कि:
- प्रभावित क्षेत्रों से पानी के सैंपल लिए जा रहे हैं
- जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई होगी
हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहले भी कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
जन आंदोलन की चेतावनी
लगातार बढ़ती समस्याओं से नाराज लोगों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे:
- बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे
- सड़क जाम करने जैसे कदम उठाएंगे
इंदौर में दूषित पानी का संकट केवल एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा बनता जा रहा है।
भागीरथपुरा जल कांड जैसी घटना के बाद भी हालात नहीं सुधरना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है।
यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और भी बड़े संकट का रूप ले सकती है। अब जरूरत है—सख्त कार्रवाई, पारदर्शी जांच और स्थायी समाधान की।