इस हफ्ते शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के संकेत, ईरान-अमेरिका तनाव और तिमाही नतीजे तय करेंगे रुख; निफ्टी 24,500 पर मजबूत रेजिस्टेंस
शेयर बाजार आने वाले कारोबारी सप्ताह (11 मई से शुरू) में भारतीय शेयर बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव जैसे कई बड़े फैक्टर बाजार की दिशा तय करेंगे। इस दौरान निवेशकों की नजर खासतौर पर Nifty 50 और BSE Sensex के प्रमुख तकनीकी स्तरों पर रहेगी।
वैश्विक तनाव का असर: ईरान-अमेरिका विवाद बना बड़ा जोखिम
सबसे बड़ा वैश्विक फैक्टर ईरान-अमेरिका तनाव से जुड़ा हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में अस्थिरता ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर पड़ेगा।
तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ता है, जिससे निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर हो सकता है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से दबाव
भारतीय बाजार में लगातार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FIIs) बिकवाली कर रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों में हजारों करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई है। इसका असर बाजार की धारणा पर साफ दिख रहा है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) लगातार खरीदारी कर बाजार को सपोर्ट दे रहे हैं, लेकिन विदेशी बिकवाली का दबाव अभी भी बना हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक FIIs की बिकवाली थमती नहीं है, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
400 से अधिक कंपनियों के नतीजे तय करेंगे रफ्तार
इस सप्ताह 400 से अधिक कंपनियां अपने मार्च तिमाही (Q4) के नतीजे घोषित करेंगी। इनमें कई बड़ी कंपनियां जैसे टाटा समूह की कंपनियां, बैंकिंग, टेलीकॉम और फार्मा सेक्टर की दिग्गज कंपनियां शामिल हैं।
इन नतीजों में निवेशकों की खास नजर कंपनियों के मुनाफे, मार्जिन और भविष्य के गाइडेंस पर होगी। अच्छे नतीजे बाजार को सहारा दे सकते हैं, जबकि कमजोर प्रदर्शन दबाव बढ़ा सकता है।
कच्चे तेल की कीमतें बनी चिंता का कारण
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। ब्रेंट क्रूड हाल ही में लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। यदि मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से कंपनियों की लागत बढ़ती है और इसका असर शेयर बाजार की चाल पर भी पड़ता है।
वैश्विक बाजारों से मिल रहे मिले-जुले संकेत
अमेरिकी बाजार हाल के सत्रों में मजबूती के साथ बंद हुए हैं। टेक और चिप सेक्टर में तेजी और रोजगार से जुड़े बेहतर आंकड़ों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। इसका सकारात्मक असर सोमवार को भारतीय बाजार पर देखने को मिल सकता है।
हालांकि, वैश्विक अनिश्चितता के कारण यह तेजी सीमित भी रह सकती है।
निफ्टी और सेंसेक्स का तकनीकी विश्लेषण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय Nifty 50 के लिए 24,000 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट बना हुआ है। यदि यह स्तर कायम रहता है तो बाजार में रिकवरी की संभावना बनी रहेगी।
ऊपरी स्तर की बात करें तो 24,500 से 24,600 के बीच मजबूत रेजिस्टेंस देखा जा रहा है। यदि निफ्टी इस स्तर को पार करता है तो बाजार में नई तेजी देखने को मिल सकती है।
नीचे की तरफ 23,800 और 23,500 के स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माने जा रहे हैं। यदि 23,800 का स्तर टूटता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।
वहीं BSE Sensex के लिए 76,800 से 77,000 के बीच सपोर्ट और 78,000 से 78,300 के बीच रेजिस्टेंस देखा जा रहा है।
निवेशकों के लिए रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा बाजार में “बाय ऑन डिप्स” यानी गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनाई जा सकती है। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए सतर्क रहना भी जरूरी है।
निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से बचते हुए मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ध्यान दें।
कुल मिलाकर आने वाला सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। एक तरफ वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली दबाव बना सकती है, वहीं दूसरी तरफ कंपनियों के बेहतर नतीजे और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत बाजार को सहारा दे सकते हैं।
निवेशकों की नजर अब निफ्टी के 24,500 के स्तर पर टिकी रहेगी, जो इस सप्ताह बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।