उज्जैन: शिप्रा नदी में पुलिस की कार गिरने से एक की मौत, दो लापता; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

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उज्जैन, 8 सितंबर 2025: मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में शनिवार (6 सितंबर) रात शिप्रा नदी के पुल से एक पुलिस वाहन के अनियंत्रित होकर गिरने की दुखद घटना में तीन पुलिसकर्मियों में से एक की मौत हो गई, जबकि दो अन्य अब भी लापता हैं। रविवार को दिनभर चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बावजूद नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF), होमगार्ड, और स्थानीय गोताखोरों की टीमें लापता सब-इंस्पेक्टर (एसआई) मदनलाल निनामा और कॉन्स्टेबल आरती पाल को नहीं ढूंढ सकीं। इस बीच, कार का बंपर घटनास्थल से 3 किलोमीटर दूर भृतहरि गुफा के पास घाट पर मिला है, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि कार भी आसपास हो सकती है। दैनिक भास्कर के पास इस घटना का एक्सक्लूसिव सीसीटीवी वीडियो उपलब्ध है, जिसमें कार के नदी में गिरने का दृश्य कैद हुआ है।

घटना का विवरण: पुल से गिरी कार

शनिवार रात करीब 8:45 बजे, उज्जैन के बड़नगर रोड पर शिप्रा नदी के बड़े पुल से एक सफेद रंग की कार (नंबर MP13 CC 7292) अनियंत्रित होकर नदी में जा गिरी। इस कार में तीन पुलिसकर्मी—उन्हेल थाना प्रभारी (टीआई) अशोक शर्मा, एसआई मदनलाल निनामा, और कॉन्स्टेबल आरती पाल—सवार थे। कार को कॉन्स्टेबल आरती पाल चला रही थीं, जो उनकी निजी कार थी। उज्जैन के पुलिस अधीक्षक (एसपी) प्रदीप शर्मा ने बताया कि कार पुल के बाईं ओर से असंतुलित होकर 12 फीट नीचे नदी में गिरी। पुल पर रेलिंग न होने के कारण कार सीधे नदी में जा डूबी। नदी में तेज बहाव के कारण कार तुरंत डूब गई, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी चुनौतियां आईं।

घटना की सूचना मिलते ही एसपी प्रदीप शर्मा, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, अपर आयुक्त संतोष टैगोर, SDRF, होमगार्ड, और नगर निगम की टीमें मौके पर पहुंचीं। रेस्क्यू ऑपरेशन रात 8:30 बजे शुरू हुआ, लेकिन अंधेरे और तेज बहाव के कारण रात 1:30 बजे इसे रोकना पड़ा। रविवार सुबह 5:30 बजे ऑपरेशन फिर शुरू हुआ।

रेस्क्यू ऑपरेशन और टीआई अशोक शर्मा की मौत

रविवार सुबह करीब 8 बजे, NDRF और अन्य रेस्क्यू टीमों ने घटनास्थल से 4 किलोमीटर दूर मंगलनाथ क्षेत्र में टीआई अशोक शर्मा (58) का शव बरामद किया। रविवार शाम अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन फिर रोक दिया गया। सोमवार सुबह NDRF के 30 सदस्य, होमगार्ड के 20 से अधिक जवान, और शिप्रा तैराक दल के 22 गोताखोरों की टीम ने फिर से एसआई मदनलाल निनामा और कॉन्स्टेबल आरती पाल की तलाश शुरू की। रविवार को कार का बंपर भृतहरि गुफा के पास घाट से 3 किलोमीटर दूर मिला, जिससे पुलिस को उम्मीद है कि कार भी आसपास हो सकती है। हालांकि, तेज बहाव और गहरे पानी के कारण कार और लापता पुलिसकर्मियों को ढूंढना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

मिशन के पीछे का कारण: लापता लड़की की जांच

एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि तीनों पुलिसकर्मी 6 सितंबर को उन्हेल थाना क्षेत्र से लापता हुई 14 वर्षीय लड़की के मामले की जांच के लिए उज्जैन से चिंतामन जा रहे थे। इस दौरान उनकी कार पुल से अनियंत्रित होकर शिप्रा नदी में जा गिरी। पुलिस ने बताया कि कार कॉन्स्टेबल आरती पाल (41) की थी, जो अविवाहित थीं और छह महीने पहले ही उनके भाई की मृत्यु हुई थी।

टीआई अशोक शर्मा का अंतिम संस्कार

रविवार को टीआई अशोक शर्मा का अंतिम संस्कार उज्जैन के चक्र तीर्थ घाट पर किया गया। उनके बड़े बेटे दर्श शर्मा ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) उमेश जोगा, एसपी प्रदीप शर्मा, और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। एसपी शर्मा ने कहा कि अशोक शर्मा के परिवार को जल्द ही अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी और पेंशन सहित अन्य सरकारी कार्यों में पूरी सहायता प्रदान की जाएगी।

नदी का तेज बहाव बना चुनौती

पुलिस के अनुसार, शनिवार रात घटनास्थल पर तैनात एएसआई लोकेश सिंह तोमर ने कार के अनियंत्रित होने और नदी में गिरने की घटना देखी थी। नदी का तेज बहाव और पुल पर रेलिंग की अनुपस्थिति इस हादसे का प्रमुख कारण रही। रेस्क्यू ऑपरेशन में ड्रोन, नाव, और गोताखोरों का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन नदी की गहराई और तेज बहाव के कारण कार और लापता पुलिसकर्मियों को खोजना मुश्किल हो रहा है।

प्रशासन और जनता में शोक

इस दुखद घटना ने उज्जैन पुलिस और स्थानीय समुदाय में शोक की लहर पैदा कर दी है। टीआई अशोक शर्मा की मृत्यु और दो अन्य पुलिसकर्मियों के लापता होने से पुलिस विभाग में गम का माहौल है। स्थानीय लोग इस घटना को लेकर पुलों की सुरक्षा और रेलिंग की कमी पर सवाल उठा रहे हैं। कई लोगों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नदी के पुलों पर रेलिंग लगाई जाए।

निष्कर्ष

उज्जैन में शिप्रा नदी में पुलिस वाहन के गिरने की यह घटना न केवल एक दुखद हादसा है, बल्कि यह सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की खामियों को भी उजागर करती है। रेलिंग की कमी और नदी के तेज बहाव ने इस हादसे को और गंभीर बना दिया। NDRF और अन्य रेस्क्यू टीमें लापता पुलिसकर्मियों को खोजने में जुटी हैं, लेकिन तेज बहाव इस कार्य में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। इस घटना ने प्रशासन को यह सोचने पर मजबूर किया है कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए। साथ ही, यह पुलिसकर्मियों के कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान की भावना को भी दर्शाता है, जो अपनी ड्यूटी के दौरान ऐसी विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हैं।

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