छतरपुर, 8 सितंबर 2025: मध्यप्रदेश के छतरपुर जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आई है। रविवार को गंभीर हालत में अपनी पत्नी को लेकर अस्पताल पहुंचे एक व्यक्ति को न तो एंबुलेंस उपलब्ध हुई और न ही अस्पताल में स्ट्रेचर मिला। मजबूरन उसे अपनी पत्नी को गोद में उठाकर इमरजेंसी वार्ड तक ले जाना पड़ा। इस दौरान न कोई वार्ड बॉय मदद के लिए आया और न ही कोई गार्ड आगे बढ़ा। स्थिति तब और बिगड़ गई जब इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर नहीं मिले, और वीडियो बनाने पर मौजूद डॉक्टर भड़क गए। इस घटना ने अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है।

पति की व्यथा: गोद में लानी पड़ी पत्नी
गौरीहार निवासी रामकिशोर (नाम बदला गया) ने बताया कि उनकी पत्नी मीरा (35) कई दिनों से सांस लेने में तकलीफ और खांसी की समस्या से जूझ रही थीं। स्थानीय अस्पताल में इलाज के बाद भी कोई राहत नहीं मिली, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें छतरपुर जिला अस्पताल रेफर किया। लेकिन, गौरीहार से छतरपुर तक के लिए कोई एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी। मजबूरन रामकिशोर को 350 रुपये किराया देकर बस से अपनी पत्नी को लाना पड़ा।
जिला अस्पताल पहुंचने पर स्थिति और दयनीय हो गई। वहां न तो स्ट्रेचर उपलब्ध था और न ही कोई वार्ड बॉय या कर्मचारी उनकी मदद के लिए आगे आया। रामकिशोर ने बताया, “मेरी पत्नी चलने की हालत में नहीं थी। मैंने उसे गोद में उठाकर इमरजेंसी वार्ड तक पहुंचाया। वहां भी कोई मदद नहीं मिली।” इस दौरान मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए परिजनों ने वीडियो बनाना शुरू किया, जिस पर ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर नाराज हो गए।
ड्यूटी पर गायब डॉक्टर, निजी गार्ड की मौजूदगी
घटना के समय इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी पर डॉ. नीरज सोनी को होना चाहिए था, लेकिन उनकी जगह डॉ. राजकुमार अवस्थी मौजूद थे। सोमवार सुबह 10 बजे की शिफ्ट में भी डॉ. आशीष शुक्ला की ड्यूटी थी, लेकिन वहां भी डॉ. अवस्थी ही मिले। चौंकाने वाली बात यह थी कि इमरजेंसी वार्ड में एक निजी बॉडीगार्ड कुर्सी पर बैठा नजर आया, जो डॉ. अवस्थी के साथ था। जब परिजनों ने इस स्थिति का वीडियो बनाना शुरू किया, तो डॉ. अवस्थी और उनके गार्ड ने उन्हें रोकने की कोशिश की।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि जब जिला अस्पताल में पुलिस चौकी और नियमित गार्ड तैनात हैं, तो डॉक्टर अपने निजी गार्ड क्यों लाते हैं? इससे मरीजों को इलाज में असुविधा होती है और अस्पताल का माहौल प्रभावित होता है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है।

सीएमएचओ का जवाब: जांच के बाद कार्रवाई
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. आरपी गुप्ता ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “इमरजेंसी में एक डॉक्टर तैनात रहता है, जिसे वार्डों में भी मरीजों को देखना पड़ता है। इस कारण कभी-कभी ऐसी स्थिति बन जाती है। हम इस मामले की जांच करेंगे और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने यह भी वादा किया कि जल्द ही अस्पताल में स्ट्रेचर और एंबुलेंस की व्यवस्था को बेहतर किया जाएगा ताकि मरीजों को ऐसी परेशानी न झेलनी पड़े।
अस्पताल की लापरवाही का इतिहास
छतरपुर जिला अस्पताल में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार लापरवाही के मामले सामने आ चुके हैं। हाल ही में एक वायरल वीडियो में अस्पताल के बाहर एक लड़की के डांस करने की घटना ने सुर्खियां बटोरी थीं, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने जांच के आदेश दिए थे। इसके अलावा, गंभीर मरीजों को समय पर इलाज न मिलने और बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायतें भी बार-बार सामने आती रही हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल में वार्ड बॉय, स्ट्रेचर, और एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में प्रशासन पूरी तरह विफल रहा है।

मरीजों की बढ़ती परेशानी
रामकिशोर जैसे कई मरीजों और उनके परिजनों को जिला अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को एंबुलेंस की अनुपलब्धता के कारण निजी वाहनों या सार्वजनिक परिवहन का सहारा लेना पड़ता है। अस्पताल पहुंचने पर भी स्ट्रेचर, व्हीलचेयर, या कर्मचारियों की मदद न मिलने से उनकी परेशानी दोगुनी हो जाती है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में तत्काल सुधार करें और दोषी कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
निष्कर्ष
छतरपुर जिला अस्पताल में रामकिशोर की पत्नी मीरा के साथ हुई घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति को एक बार फिर उजागर किया है। एंबुलेंस, स्ट्रेचर, और कर्मचारियों की अनुपलब्धता के साथ-साथ ड्यूटी पर गायब डॉक्टर और निजी गार्ड की मौजूदगी जैसे मुद्दों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सीएमएचओ के जांच के वादे के बावजूद, यह देखना बाकी है कि क्या वास्तव में ठोस कदम उठाए जाएंगे। यह घटना स्वास्थ्य विभाग के लिए एक चेतावनी है कि मरीजों की जान से खिलवाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिला प्रशासन को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।