“ओला-उबर मिनटों में, एंबुलेंस क्यों नहीं?”—कोर्ट की तीखी टिप्पणी !

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मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सड़क सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने एंबुलेंस सेवाओं की उपलब्धता पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि जब निजी कैब सेवाएं कुछ ही मिनटों में पहुंच सकती हैं, तो एंबुलेंस क्यों नहीं।


कोर्ट का तीखा सवाल: एंबुलेंस सेवा क्यों पिछड़ी?

मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की डिविजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह मुद्दा सीधे तौर पर लोगों के जीवन से जुड़ा हुआ है।

कोर्ट ने टिप्पणी की—अगर ओला और उबर जैसी सेवाएं मिनटों में उपलब्ध हो सकती हैं, तो आपातकालीन एंबुलेंस सेवा समय पर क्यों नहीं पहुंचती?

यह टिप्पणी राज्य की स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करती है।


जनहित याचिका में क्या कहा गया

डिंडोरी निवासी सेवानिवृत्त अधिकारी महावीर सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका में मांग की गई है कि एंबुलेंस सेवाओं को भी रियल टाइम ट्रैकिंग और त्वरित उपलब्धता के साथ विकसित किया जाए, ताकि दुर्घटना या आपात स्थिति में मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।

याचिका में यह भी कहा गया कि सड़क हादसों में देरी से पहुंचने वाली एंबुलेंस के कारण कई बार गंभीर मरीजों की जान चली जाती है।


हाईवे पर 300 अवैध कट-प्वाइंट्स का मुद्दा

सुनवाई के दौरान एक और गंभीर मुद्दा सामने आया—राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध कट-प्वाइंट्स। याचिकाकर्ता ने बताया कि भोपाल-जबलपुर हाईवे पर डिवाइडर तोड़कर करीब 300 अवैध कट बनाए गए हैं।

इन कट-प्वाइंट्स के कारण ट्रैफिक अव्यवस्थित हो जाता है और दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। साथ ही, एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों की आवाजाही भी बाधित होती है।


एनएचएआई और सरकार से जवाब तलब

कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), केंद्र सरकार और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

अदालत ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई में सभी पक्ष विस्तृत रिपोर्ट पेश करें और यह बताएं कि सड़क सुरक्षा और एंबुलेंस सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।


सड़क सुरक्षा पर बढ़ती चिंता

मध्यप्रदेश में सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध कट-प्वाइंट्स, खराब ट्रैफिक मैनेजमेंट और आपातकालीन सेवाओं की धीमी गति इसके प्रमुख कारण हैं।

अगर समय पर एंबुलेंस पहुंच जाए, तो कई गंभीर मामलों में जान बचाई जा सकती है। लेकिन वर्तमान व्यवस्था में यह एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।


रियल टाइम एंबुलेंस सिस्टम की जरूरत

याचिका में सुझाया गया है कि एंबुलेंस सेवाओं को भी ओला-उबर की तरह GPS आधारित और ऐप से जुड़ा बनाया जाए। इससे मरीज या उनके परिजन तुरंत नजदीकी एंबुलेंस को बुला सकेंगे और उसकी लोकेशन भी ट्रैक कर पाएंगे।

यह सिस्टम लागू होने से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।


प्रशासनिक सख्ती की उम्मीद

हाईकोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है। अवैध कट-प्वाइंट्स को बंद करने, ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने और एंबुलेंस सेवाओं को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।


जबलपुर हाईकोर्ट की यह सुनवाई केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। अदालत ने जिस तरह से एंबुलेंस सेवाओं और सड़क सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं, वह प्रशासन के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि अब सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।

अगर सरकार और संबंधित एजेंसियां समय रहते कार्रवाई करती हैं, तो यह पहल हजारों लोगों की जान बचाने में मददगार साबित हो सकती है।

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