खरगोन में आरआई पर गंभीर आरोप: पालतू कुत्ता गुम होने पर कॉन्स्टेबल की बेल्ट से पिटाई, जातिसूचक गालियां भी दीं !

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खरगोन।
जिले से पुलिस महकमे की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि रिजर्व इंस्पेक्टर (आरआई) सौरभ कुशवाहा ने अपने पालतू कुत्ते के गुम होने से नाराज होकर एक कॉन्स्टेबल को देर रात सरकारी आवास पर बुलाकर बेरहमी से पीट दिया। कॉन्स्टेबल का कहना है कि आरआई और उनकी पत्नी ने न सिर्फ उसे बेल्ट और चप्पल से मारा, बल्कि जातिसूचक अपशब्द भी कहे और नौकरी से निकालने की धमकी दी।


देर रात डेढ़ बजे बुलाया और की मारपीट

पीड़ित कॉन्स्टेबल राहुल चौहान ने अपनी शिकायत में बताया कि उसकी ड्यूटी 23 अगस्त को आरआई कुशवाहा के सरकारी आवास पर लगी थी। रात करीब 10 बजे जब आरआई ड्यूटी पूरी कर घर लौट आए तो वह अपने क्वार्टर चला गया। लेकिन उसी रात करीब 1:30 बजे आरआई ने फोन कर तुरंत घर बुलाया।

राहुल के मुताबिक, जैसे ही वह वहां पहुंचा, आरआई ने गुम हुए पालतू कुत्ते पर नाराजगी जताई और गालियां देते हुए बेल्ट से उसकी पिटाई शुरू कर दी। इसी दौरान आरआई की पत्नी भी मौजूद थीं। उन्होंने भी चप्पल से मारपीट की और जातिसूचक अपशब्द कहे।


सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

घटना के बाद कॉन्स्टेबल राहुल ने अपने हाथ, पैर, पीठ और कमर पर पड़े चोटों के नीले निशान का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो वायरल होने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया। इसमें वह स्पष्ट रूप से चोटें दिखाते हुए आरोप लगाता नजर आ रहा है कि उसे बुरी तरह पीटा गया है।’


अजाक थाने में शिकायत, मेडिकल कराया गया

वायरल वीडियो के बाद राहुल ने बुधवार को अजाक (अनुसूचित जाति/जनजाति) थाने में लिखित शिकायत दी। उसकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने तुरंत उसका मेडिकल परीक्षण कराया है।

एसपी धर्मराज मीणा ने मामले को गंभीर मानते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उनके अनुसार, आरआई सौरभ कुशवाहा और उनकी पत्नी से पूछताछ की जाएगी। बयान दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।


जातिसूचक अपशब्दों से बढ़ी संवेदनशीलता

मामला केवल मारपीट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जातिसूचक अपशब्द कहने का भी आरोप है। ऐसे मामलों में एससी/एसटी एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की जाती है। यही कारण है कि यह मामला अब और संवेदनशील हो गया है।


पुलिस महकमे पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ सरकार और पुलिस प्रशासन अपने कर्मचारियों के कल्याण और शुचिता की बात करता है, वहीं दूसरी ओर उच्च पद पर बैठे अधिकारी द्वारा अधीनस्थ कर्मचारी की इस तरह पिटाई पुलिस की छवि को धूमिल कर रही है।

खरगोन की यह घटना न केवल विभागीय अनुशासन का उल्लंघन है, बल्कि मानवाधिकारों का भी हनन है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि पुलिस विभाग इस पूरे मामले में कितनी पारदर्शिता और सख्ती दिखाता है। अगर दोषी आरआई और उनकी पत्नी पर कार्रवाई नहीं हुई तो यह संदेश जाएगा कि पुलिस विभाग में जातिगत भेदभाव और शक्ति का दुरुपयोग आम बात बन चुका है।

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