इंदौर में हरितालिका तीज पर भजन संध्या: मंत्री विजयवर्गीय ने गाया- मच गया शोर सारी नगरी….!

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इंदौर।
हरितालिका तीज के पावन अवसर पर मंगलवार रात इंदौर के ऐतिहासिक राजबाड़ा परिसर में भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। लोक संस्कृति मंच द्वारा आयोजित भजन संध्या में हजारों महिलाएं अपने परिवारों के साथ मौजूद रहीं। सभी ने शिव-पार्वती की आराधना कर पति की लंबी आयु और परिवार की समृद्धि की कामना की।


भजनों से गूंजा राजबाड़ा

कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध भजन “देवा हो देवा गणपति देवा, तुमसे बढ़कर कौन” से हुई। भजनों की मधुर धुन और भक्तिमय माहौल में महिलाओं ने तालियां बजाकर सहभागिता की।

इसके बाद मंच पर पहुंचे प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय। उन्होंने महिलाओं पर फूल बरसाए और फिर खुद माइक संभालकर भजन गाना शुरू किया। उनके सुरों ने जैसे ही वातावरण को छुआ, पूरा राजबाड़ा तालियों और जयकारों से गूंज उठा।

विजयवर्गीय ने एक के बाद एक लोकप्रिय भजन प्रस्तुत किए –

  • “आया बिरज का बांका”
  • “राधे-राधे रटो, चले आएंगे बिहारी”
  • “मीठे रस से भरियानी”

इन भजनों पर महिलाओं ने श्रद्धा और उमंग के साथ नृत्य कर कार्यक्रम को और भी जीवंत बना दिया।


21 साल से चली आ रही परंपरा

इस भजन संध्या का आयोजन लोक संस्कृति मंच पिछले 21 वर्षों से लगातार करता आ रहा है। कार्यक्रम के संयोजक सांसद शंकर लालवानी और सतीश शर्मा ने बताया कि इसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति और पारंपरिक पर्वों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

उन्होंने कहा कि राजबाड़ा का ऐतिहासिक वातावरण जब भक्ति सुरों से भर जाता है, तो यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सांस्कृतिक पर्व का रूप ले लेता है।


महिलाओं की विशेष भागीदारी

हरितालिका तीज का पर्व मुख्यतः महिलाओं का पर्व माना जाता है। इस मौके पर राजबाड़ा पहुंचे हजारों महिलाओं ने भक्ति-भाव से झूमते हुए भजनों का आनंद लिया। कई महिलाओं ने कहा कि इस आयोजन से उन्हें न सिर्फ भक्ति का आनंद मिलता है, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव भी गहरा होता है।

फूलों की वर्षा, ढोल-नगाड़ों की गूंज और मंत्रोच्चार ने राजबाड़ा परिसर को भक्ति और उल्लास का केंद्र बना दिया।


इंदौर का यह आयोजन दर्शाता है कि आधुनिक समय में भी लोग अपनी संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़े हुए हैं। विजयवर्गीय जैसे जनप्रतिनिधियों की भागीदारी ने इसे और विशेष बना दिया।

हरितालिका तीज की रात इंदौर के राजबाड़ा में सचमुच एक सांस्कृतिक और धार्मिक महोत्सव का रूप ले चुकी थी – जहां भजनों के मधुर सुर, फूलों की बरसात और महिलाओं की श्रद्धा ने शहर को भक्ति रस में डुबो दिया।

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