सागर जिले के खुरई एवं बनहट क्षेत्र के जंगलों में इन दिनों तेंदूपत्ता तुड़ाई का कार्य तेज गति से चल रहा है। गर्मी के मौसम में बड़ी संख्या में ग्रामीण मजदूर जंगलों में पहुंचकर तेंदूपत्ता संग्रहण में जुटे हुए हैं। इस वर्ष तेंदूपत्ता के लिए 4 हजार रुपए प्रति मानक बोरा राशि निर्धारित की गई है, जिससे मजदूरों में उत्साह देखा जा रहा है।
तेंदूपत्ता बीड़ी उद्योग का महत्वपूर्ण कच्चा माल माना जाता है। हर वर्ष वन क्षेत्रों से जुड़े गांवों के मजदूर जंगलों में जाकर पत्तों की तुड़ाई करते हैं और उन्हें निर्धारित समितियों के माध्यम से जमा कराया जाता है। खुरई-बनहट क्षेत्र में भी वन समितियों द्वारा तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य संचालित किया जा रहा है।
ग्रामीण मजदूर सुबह से जंगलों में पहुंचकर तेंदूपत्ता तोड़ते हैं और दिनभर पत्तों की गड्डियां तैयार करते हैं। शाम के समय मजदूर समिति कार्यालय पहुंचकर इन गड्डियों को जमा करते हैं। इसके बाद समितियों द्वारा तेंदूपत्ते की खरीदी की जाती है। बाद में वन समितियों के माध्यम से यह पत्ता बीड़ी उद्योग से जुड़ी कंपनियों को बेचा जाता है।

स्थानीय मजदूरों का कहना है कि तेंदूपत्ता तुड़ाई ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का महत्वपूर्ण साधन है। गर्मी के मौसम में खेती का कार्य कम होने के कारण बड़ी संख्या में परिवार इस काम से जुड़ जाते हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त होती है, जो घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सहायक बनती है।
वन क्षेत्र से जुड़े गांवों में महिलाएं और युवा भी बड़ी संख्या में तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में भाग ले रहे हैं। मजदूर जंगलों में सावधानी के साथ पत्तों की तुड़ाई कर उन्हें सुरक्षित तरीके से गड्डियों में बांधते हैं ताकि पत्तों की गुणवत्ता बनी रहे।
वन समितियों के अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष तेंदूपत्ता की गुणवत्ता अच्छी है और संग्रहण कार्य सुचारू रूप से चल रहा है। समितियों द्वारा मजदूरों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि मौसम अनुकूल रहा तो इस बार तेंदूपत्ता उत्पादन अच्छा होने की संभावना है। तेंदूपत्ता संग्रहण से वन क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों को मौसमी रोजगार मिलता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलती है।