मध्य प्रदेश के ग्वालियर में थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। डॉक्टरों के अनुसार वर्तमान में शहर में करीब 135 बच्चे इस गंभीर आनुवंशिक बीमारी से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता की कमी और समय पर जांच न होने के कारण मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
क्या आपके बच्चे में दिख रहे हैं ये लक्षण?
डॉक्टरों के मुताबिक यदि बच्चा:
- लगातार कमजोर हो रहा है,
- शरीर में खून की कमी बनी रहती है,
- भूख कम लगती है,
- चिड़चिड़ा रहता है,
- जल्दी थक जाता है,
तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह थैलेसीमिया के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

क्या है थैलेसीमिया?
थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार (Genetic Blood Disorder) है, जिसमें शरीर पर्याप्त और सामान्य हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता।
हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद वह प्रोटीन है जो शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। जब इसका निर्माण सही तरीके से नहीं होता, तो लाल रक्त कोशिकाएं जल्दी टूटने लगती हैं और मरीज को एनीमिया यानी खून की कमी हो जाती है।
बीमारी की गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति को दोषपूर्ण जीन कितनी मात्रा में विरासत में मिले हैं।
विवाह से पहले कराएं एचपीएलसी जांच
डॉ. अजय गौड़ ने बताया कि जिन परिवारों में पहले से थैलेसीमिया के मरीज हैं, उन्हें दूसरे बच्चे के जन्म से पहले जरूरी जांच जरूर करानी चाहिए।
उन्होंने सलाह दी कि जिन समुदायों में थैलेसीमिया की दर अधिक है, वहां विवाह से पहले लड़का और लड़की दोनों को एचपीएलसी (HPLC) जांच करानी चाहिए। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि कोई व्यक्ति थैलेसीमिया का कैरियर तो नहीं है।
समय रहते बोन मैरो ट्रांसप्लांट से हो सकता है इलाज
विशेषज्ञ डॉ. घनश्यामदास के अनुसार यदि बच्चे का 6 साल की उम्र से पहले बोन मैरो ट्रांसप्लांट हो जाए, तो वह पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।
लेकिन यदि समय पर इलाज नहीं हुआ, तो मरीज को बार-बार खून चढ़ाना पड़ता है। इससे शरीर में आयरन जमा होने लगता है, जो आगे चलकर कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
बार-बार खून चढ़ाने से हो सकती हैं ये समस्याएं
डॉक्टरों के अनुसार शरीर में आयरन अधिक जमा होने से:
- लिवर की बीमारी,
- हार्ट डिजीज,
- डायबिटीज,
- दिमागी समस्याएं,
- और पैनक्रियाज संबंधी दिक्कतें
हो सकती हैं।
थैलेसीमिया मरीज क्या न खाएं?
आमतौर पर खून की कमी में लोगों को पालक, गुड़ और आयरन टॉनिक लेने की सलाह दी जाती है, लेकिन थैलेसीमिया मरीजों के लिए यह नुकसानदायक हो सकता है।
डॉक्टरों ने सलाह दी है कि ऐसे मरीज:
- पालक,
- गुड़,
- और आयरन युक्त टॉनिक
का सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के बिल्कुल न करें।
क्योंकि उनके शरीर में पहले से ही आयरन की मात्रा अधिक होती है।
फॉलिक एसिड की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि थैलेसीमिया मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार फॉलिक एसिड की दवा दी जानी चाहिए, जिससे शरीर में नई रक्त कोशिकाएं बनने में मदद मिलती है।
जागरूकता ही बचाव का सबसे बड़ा तरीका
डॉक्टरों का मानना है कि:
- समय पर जांच,
- विवाह पूर्व स्क्रीनिंग,
- और सही इलाज
के जरिए थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।
ग्वालियर में बढ़ते थैलेसीमिया के मामले स्वास्थ्य व्यवस्था और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि माता-पिता और समाज समय रहते जागरूक हो जाएं, तो आने वाली पीढ़ियों को इस गंभीर बीमारी से बचाया जा सकता है।