छतरपुर। जिले के एक मूक-बधिर दलित युवक के साथ नाई की दुकान पर मारपीट और जातिगत भेदभाव का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि कुर्सी पर बैठने को लेकर युवक के साथ न केवल गाली-गलौज की गई, बल्कि लोहे की रॉड से हमला भी किया गया। घटना में युवक के सिर पर गंभीर चोट आई और उसे कई टांके लगाने पड़े। घटना के करीब 10 से 12 दिन बाद भी FIR दर्ज नहीं होने पर पीड़ित परिवार ने पुलिस पर सवाल उठाए हैं।
पीड़ित युवक की पहचान Ramkishan Ahirwar के रूप में हुई है, जो मूक-बधिर है और अपने पिता के साथ न्याय की मांग को लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा।
बाल कटाने गया था युवक, कुर्सी पर बैठने से शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार घटना लुगासी चौकी क्षेत्र के बनगांय गांव की है। पीड़ित युवक अपने बाल कटवाने के लिए नाई की दुकान पर गया था। वहां भीड़ होने के कारण वह कुर्सी पर बैठ गया।

इसी दौरान कथित तौर पर कुछ लोगों ने उसके नाम और जाति को लेकर सवाल किए। चूंकि युवक मूक-बधिर था, वह जवाब नहीं दे सका। इसके बाद विवाद बढ़ गया।
जातिसूचक शब्दों और मारपीट का आरोप
परिजनों का आरोप है कि गांव के ही एक व्यक्ति Hannu Vishwakarma ने युवक के कुर्सी पर बैठने का विरोध किया और जातिसूचक शब्द कहे। इसके बाद उसे जबरन कुर्सी से उठाने की कोशिश की गई।

आरोप है कि विरोध करने पर आरोपी और अन्य लोगों ने युवक पर पानी डाल दिया और फिर मारपीट शुरू कर दी। इतना ही नहीं, लोहे की रॉड से भी हमला किया गया, जिससे युवक गंभीर रूप से घायल हो गया।
घटना में युवक के सिर, हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आईं और सिर से खून बहने लगा।
परिजनों का आरोप: थाने में नहीं लिखी गई FIR
पीड़ित के पिता Kamat Ahirwar ने आरोप लगाया कि घायल अवस्था में जब वे बेटे को लेकर लुगासी चौकी पहुंचे तो पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज नहीं की।

परिजनों का कहना है कि पुलिस ने यह कहते हुए रिपोर्ट दर्ज करने से इनकार कर दिया कि चूंकि युवक मूक-बधिर है, इसलिए पहले साइन लैंग्वेज विशेषज्ञ की मदद से उसका बयान दर्ज किया जाएगा, तभी आगे कार्रवाई होगी।
परिवार ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पिता स्वयं पूरी घटना बता रहे हैं, तो FIR दर्ज करने में देरी क्यों की जा रही है।
पुलिस की सफाई और जांच प्रक्रिया
मामले पर लुगासी चौकी प्रभारी Osho Gupta ने कहा कि चूंकि पीड़ित मूक-बधिर है, इसलिए उसका बयान विशेषज्ञ की मदद से दर्ज करना आवश्यक है, ताकि कानूनी प्रक्रिया सही तरीके से पूरी की जा सके।
वहीं, पुलिस अधीक्षक Rajat Saklecha ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि अब पीड़ित के पिता के बयान के आधार पर FIR दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की संभावना
मामले की गंभीरता को देखते हुए माना जा रहा है कि पुलिस अब एससी-एसटी एक्ट सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर सकती है। फिलहाल पुलिस सभी पक्षों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
ग्रामीणों में नाराजगी, उठे सवाल
इस घटना को लेकर इलाके में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं, तो यह न केवल मारपीट का मामला है, बल्कि जातिगत भेदभाव का भी गंभीर उदाहरण है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा है कि दिव्यांग (मूक-बधिर) व्यक्ति के मामलों में त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि पीड़ित को न्याय मिलने में देरी न हो।
परिवार को न्याय की उम्मीद
पीड़ित परिवार अब पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर जल्द कार्रवाई की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि दोषियों को सख्त सजा मिले और भविष्य में किसी भी दिव्यांग व्यक्ति के साथ ऐसा व्यवहार न हो।
फिलहाल मामला पुलिस जांच में है और FIR दर्ज होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।