मध्य प्रदेश के दमोह में बढ़ते जल संकट के बीच प्रशासनिक सक्रियता देखने को मिली। रविवार दोपहर क्षेत्रीय विधायक एवं पूर्व वित्तमंत्री जयंत मलैया ने शहर के फिल्टर प्लांट का निरीक्षण कर जल व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों से विस्तार से जानकारी ली और व्यवस्थाओं में सुधार के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

निरीक्षण के दौरान विधायक मलैया ने साफ तौर पर कहा कि जल संकट की स्थिति में प्रशासन और आम नागरिक दोनों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जल आपूर्ति व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाए, ताकि लोगों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।
दमोह शहर इस समय पानी की कमी से जूझ रहा है। कई क्षेत्रों में दो-दो दिन के अंतराल पर पानी मिल रहा है, जबकि कुछ इलाकों में इससे भी अधिक समय लग रहा है। ऐसे में लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
विधायक मलैया ने बताया कि कुछ वर्षों पहले भी दमोह गंभीर जल संकट से गुजरा था, लेकिन जुझार घाट से पाइपलाइन शुरू होने के बाद स्थिति में काफी सुधार आया था। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह की समस्याओं से स्थायी समाधान के लिए राजनगर तालाब में एक और इंटेक वेल का निर्माण कार्य जारी है। इसके पूरा होने के बाद दो अलग-अलग लाइनों के माध्यम से फिल्टर प्लांट तक पानी पहुंचेगा, जिससे शहर में प्रतिदिन जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल जिन क्षेत्रों में पानी का दबाव कम है, वहां टंकियों के माध्यम से पर्याप्त दबाव बनाकर जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इससे उन इलाकों में भी पानी सुचारू रूप से पहुंच सकेगा, जहां अभी समस्या बनी हुई है।
निरीक्षण के दौरान नगर पालिका के अधिकारी, जिनमें सीएमओ राजेंद्र सिंह लोधी सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। विधायक ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जल वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लोगों तक समय पर पानी पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस मौके पर विधायक मलैया ने आम नागरिकों से भी अपील की कि वे पानी का उपयोग सोच-समझकर करें। उन्होंने कहा कि जल एक अमूल्य संसाधन है और इसका संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि यदि कहीं पानी का वाल्व खुला दिखे तो उसे तुरंत बंद करें और जहां वाल्व नहीं है, वहां संबंधित अधिकारियों को सूचित कर उसकी व्यवस्था करवाई जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि छोटे-छोटे प्रयासों से पानी की बड़ी बचत की जा सकती है। जैसे अनावश्यक रूप से नल खुला न छोड़ना, पानी का सीमित उपयोग करना और रिसाव की जानकारी तुरंत देना—ये सभी कदम जल संकट से निपटने में मददगार साबित हो सकते हैं।
दमोह में बढ़ते जल संकट के बीच यह निरीक्षण न केवल प्रशासन की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि आने वाले समय में जल प्रबंधन को लेकर और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। यदि योजनाओं को समय पर पूरा किया गया और नागरिकों का सहयोग मिला, तो शहर को इस संकट से उबारना संभव हो सकेगा।