टीकमगढ़ में पटवारी संघ का अनोखा विरोध: तहसीलदार के सामने नाक रगड़कर जताई नाराजगी, लंबित मांगों को लेकर चेतावनी !

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टीकमगढ़। जिले में पटवारी संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया है। बल्देवगढ़ तहसील में बुधवार को उस समय हैरानी भरा दृश्य देखने को मिला, जब पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष ने तहसीलदार के सामने नाक रगड़कर अपनी नाराजगी जाहिर की। यह विरोध प्रदर्शन प्रशासनिक स्तर पर लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान न होने के कारण किया गया।

जानकारी के अनुसार, पटवारी संघ के पदाधिकारी बल्देवगढ़ तहसील पहुंचे थे, जहां उन्होंने तहसीलदार अनिल गुप्ता को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान संघ के जिला अध्यक्ष चंद्रभान समारी ने अपनी मांगों के प्रति गंभीरता दिखाने के लिए अनोखा तरीका अपनाया और तहसीलदार के सामने नाक रगड़ते हुए विरोध जताया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

चंद्रभान समारी ने बताया कि पटवारी संघ पिछले काफी समय से अपनी मांगों को लेकर प्रशासन से गुहार लगा रहा है। कई बार कलेक्टर और अन्य अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इसी के चलते संघ के पदाधिकारियों में गहरी नाराजगी है।

पटवारी संघ की प्रमुख मांगों में समयमान वेतनमान का मुद्दा सबसे अहम है। संघ का कहना है कि जिले के कई पटवारियों को 10, 20, 30 और 35 वर्षों की सेवा पूर्ण करने के बाद मिलने वाला समयमान वेतनमान अब तक नहीं दिया गया है। इससे कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

इसके अलावा महंगाई भत्ते (डीए) के एरियर का भुगतान भी कई स्थानों पर लंबित है। पटवारियों का कहना है कि उन्हें पुराने डीए का बकाया नहीं मिला है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। संघ ने इस बकाया राशि को जल्द जारी करने की मांग की है।

एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा नए पटवारियों के नियमितीकरण का है। संघ के अनुसार, कई पटवारी संविदा पर कार्य कर रहे हैं और उनकी संविदा अवधि समाप्त हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद उनका नियमितीकरण नहीं किया गया है। इससे उनके भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। संघ ने मांग की है कि निर्धारित समय सीमा में सभी पात्र पटवारियों को नियमित किया जाए।

पटवारी संघ ने यह भी आरोप लगाया कि कलेक्टर द्वारा पहले ही एसडीएम और तहसीलदारों को लंबित मामलों की सूची तैयार करने और समाधान करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है।

संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। उन्होंने कहा कि जिले की सभी तहसीलों में जाकर इसी तरह विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और ज्ञापन सौंपे जाएंगे।

इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन और कर्मचारियों के बीच संवाद की स्थिति पर भी सवाल खड़े किए हैं। जहां एक ओर कर्मचारी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद ठोस परिणाम नहीं मिल रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह का विरोध प्रदर्शन यह दर्शाता है कि कर्मचारियों में कितनी निराशा और हताशा है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि कर्मचारियों की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए और जल्द समाधान निकाला जाए, ताकि स्थिति सामान्य हो सके।

फिलहाल, इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, उम्मीद की जा रही है कि इस विरोध के बाद संबंधित अधिकारी इस मुद्दे को गंभीरता से लेंगे और जल्द ही समाधान की दिशा में कदम उठाएंगे।

यह घटना न केवल कर्मचारियों की समस्याओं को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जब संवाद और समाधान के रास्ते बंद हो जाते हैं, तो लोग अपनी बात रखने के लिए असामान्य तरीकों का सहारा लेने को मजबूर हो जाते हैं।

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