डूब क्षेत्र के गांवों में प्रशासन सक्रिय: सागर में शिविर लगाकर प्रभावित परिवारों की समस्याएं सुनी गईं !

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बंडा परियोजना के अंतर्गत डूब क्षेत्र से प्रभावित गांवों में जिला प्रशासन द्वारा सक्रिय पहल करते हुए विशेष शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी प्रतिभा पाल के निर्देशानुसार ग्राम सलैया खुर्द और पिपरिया इल्लाई में आयोजित इन शिविरों में प्रभावित परिवारों की समस्याओं को सुना गया और उनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।

प्रभावित गांवों में पहुंचा प्रशासन

बंडा परियोजना के चलते जिन गांवों के डूब क्षेत्र में आने की संभावना है, वहां के निवासियों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर बसाने के उद्देश्य से प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में सलैया खुर्द और पिपरिया इल्लाई गांवों में शिविर आयोजित किए गए, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित हुए।

इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य प्रभावित परिवारों को उनकी स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी देना, उनकी समस्याओं को समझना और पुनर्वास की प्रक्रिया को सुगम बनाना था।

समस्याओं का मौके पर समाधान

शिविर के दौरान ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न समस्याएं अधिकारियों के समक्ष रखीं। इनमें पुनर्वास स्थल से जुड़ी चिंताएं, मुआवजा, भूमि आवंटन, बुनियादी सुविधाएं और स्थानांतरण से संबंधित प्रश्न प्रमुख रहे।

अधिकारियों ने प्रत्येक समस्या को गंभीरता से सुना और संबंधित विभागों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए। प्रशासन का प्रयास रहा कि अधिकतर समस्याओं का निराकरण मौके पर ही किया जाए, ताकि ग्रामीणों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

30 मई तक स्थानांतरण के निर्देश

प्रशासन द्वारा स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि प्रभावित परिवारों को 30 मई 2026 के पूर्व पनारी या अन्य सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित होना होगा। इस संबंध में ग्रामीणों को पूरी जानकारी दी गई और उन्हें यह भी बताया गया कि समय पर स्थानांतरण न करने पर भविष्य में जोखिम बढ़ सकता है।

अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि पुनर्वास के दौरान उन्हें सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

अधिकारियों की मौजूदगी से बढ़ा भरोसा

शिविर में आरती यादव (एसडीएम बंडा), अनिरुद्ध आनंद (परियोजना प्रबंधक) और प्रदीप वाल्मीकि (एसडीओपी) सहित राजस्व एवं जल संसाधन विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

अधिकारियों की मौजूदगी से ग्रामीणों में विश्वास बढ़ा और उन्हें यह भरोसा मिला कि प्रशासन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर है।

पुनर्वास प्रक्रिया को लेकर जागरूकता

शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों को पुनर्वास प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं के बारे में जागरूक किया गया। उन्हें बताया गया कि किस प्रकार उन्हें मुआवजा मिलेगा, नई जगह पर किस तरह की सुविधाएं उपलब्ध होंगी और स्थानांतरण के दौरान किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।

यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कई बार जानकारी के अभाव में ग्रामीण पुनर्वास प्रक्रिया को लेकर असमंजस में रहते हैं।

मानवीय दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रहा प्रशासन

इस पूरे अभियान में प्रशासन का दृष्टिकोण केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवीय संवेदनशीलता पर आधारित है। अधिकारियों ने ग्रामीणों से संवाद स्थापित कर उनकी भावनाओं और चिंताओं को समझने का प्रयास किया।

बंडा परियोजना के तहत डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों के लिए आयोजित ये शिविर प्रशासन की सक्रियता और संवेदनशीलता का प्रमाण हैं। समय रहते पुनर्वास और समस्याओं के समाधान की दिशा में उठाए गए ये कदम भविष्य में किसी भी प्रकार की असुविधा या संकट को टालने में सहायक होंगे।

प्रशासन का यह प्रयास न केवल प्रभावित परिवारों के लिए राहतकारी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि विकास परियोजनाओं के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा और हितों का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है।

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