नवाचार और संसाधन प्रबंधन से सशक्त होंगे पंचायत और नगरीय निकाय !

Spread the love

सागर मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने सागर संभाग में आयोजित संभागीय स्तरीय बैठक में स्पष्ट कहा कि ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों को सशक्त बनाने के लिए नवाचार, प्रतिस्पर्धा और वित्तीय आत्मनिर्भरता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कलेक्टर्स से अपेक्षा की कि वे स्थानीय निकायों को बेहतर बनाने के लिए नई पहल करें और उत्कृष्ट कार्य करने वाली पंचायतों एवं नगरीय निकायों को प्रोत्साहित करें।

कमिश्नर कार्यालय में आयोजित इस बैठक में उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों में बेहतर कार्य करने की इच्छाशक्ति और नवाचार की भावना होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिला पंचायतों और जनपद पंचायतों को दी जाने वाली राशि का सही उपयोग सुनिश्चित किया जाए और उसकी पारदर्शी लेखांकन एवं अंकेक्षण व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए।

बैठक में उन्होंने स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि पंचायतों और नगरीय निकायों को केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने स्वयं के राजस्व स्रोत विकसित करने चाहिए। इसके लिए कर संग्रह, उपयोगकर्ता शुल्क और स्थानीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन जैसे उपाय अपनाए जा सकते हैं।

सौर ऊर्जा के उपयोग को लेकर भी उन्होंने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि नगरीय क्षेत्रों और ग्राम पंचायतों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना चाहिए, जिससे बिजली की बचत होगी और भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को भी पूरा किया जा सकेगा। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक होगी, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी लाभकारी साबित होगी।

बैठक के दौरान सागर संभाग में विभिन्न जिलों द्वारा किए जा रहे नवाचारों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। पन्ना जिले का उदाहरण देते हुए बताया गया कि वहां पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायतों द्वारा सफारी वाहनों से कर वसूला जा रहा है। इसके अलावा शाहनगर क्षेत्र में जल कर की प्रभावी वसूली कर पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।

इसी प्रकार टीकमगढ़ नगर पालिका द्वारा आय बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। नगर क्षेत्र में संचालित दुकानों का किराया, जो कई वर्षों से बेहद कम था, उसे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। साथ ही उपभोक्ता प्रभार में वृद्धि कर नगर पालिका की आय में सुधार किया गया है।

बैठक में जिला पंचायतों के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर भी चर्चा हुई। विशेष रूप से कर्मचारियों के वेतन भुगतान और ईपीएफ से संबंधित मुद्दों को उठाया गया। सुझाव दिया गया कि इस व्यवस्था को अधिक व्यवहारिक बनाया जाए, ताकि स्थानीय निकायों पर अनावश्यक वित्तीय दबाव न पड़े।

जयभान सिंह पवैया ने सागर नगर निगम क्षेत्र से लगे गांवों में तेजी से विकसित हो रही कॉलोनियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन ग्राम पंचायतों को भी उचित राजस्व मिलना चाहिए, ताकि उनका समग्र विकास संभव हो सके।

बैठक में के. के. सिंह ने जानकारी दी कि केंद्रीय वित्त आयोग की अनुशंसाएं 1 अप्रैल से लागू हो चुकी हैं, जिसके तहत केंद्र सरकार के कुल राजस्व का 41 प्रतिशत राज्यों को दिया जाता है। यह राज्यों और स्थानीय निकायों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

इसके अलावा सचिव राज्य वित्त आयोग वीरेन्द्र सिंह ने नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों के वित्तीय संसाधनों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

बैठक में अनिल सुचारी सहित विभिन्न जिलों के कलेक्टर्स, नगर निगम आयुक्त, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों और चुनौतियों को साझा किया।

कुल मिलाकर, इस बैठक में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि यदि ग्राम पंचायतें और नगरीय निकाय आत्मनिर्भर बनते हैं और नवाचार को अपनाते हैं, तो विकास की गति और अधिक तेज हो सकती है। प्रशासन और स्थानीय निकायों के संयुक्त प्रयास से ही सशक्त और विकसित मध्यप्रदेश का निर्माण संभव है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *