निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद भाजपा नेताओं के साथ मंच साझा करने और बीजेपी के करीब नजर आने वाली निर्मला सप्रे ने अब खुलकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को चुनौती दे दी है।
सागर में मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि यदि उमंग सिंघार बीना को जिला बनवा दें और क्षेत्र के विकास के लिए 300 करोड़ रुपए दिला दें, तो वे उनके साथ रहने को तैयार हैं। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और कांग्रेस ने इसे “राजनीतिक सौदेबाजी” करार दिया है।

निर्मला सप्रे का यह बयान ऐसे समय आया है जब उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर मामला अदालत में विचाराधीन है। कांग्रेस की ओर से उन पर दल-बदल के आरोप लगाए गए हैं और उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की गई है। ऐसे में सप्रे के बयान को राजनीतिक संकेतों के रूप में देखा जा रहा है।
मीडिया ने जब उनसे पूछा कि वे आखिर वर्तमान में किस पार्टी के साथ हैं, तो उन्होंने सीधे जवाब देने से बचते हुए कहा, “जब मामला कोर्ट में लंबित हो, तब उस पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। जो भी फैसला होगा, कोर्ट करेगा। जनता अपना फैसला दे चुकी है। जहां कोर्ट डिसाइड करेगा, मैं वहीं रहूंगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान क्षेत्र के विकास और जनता के कामों पर है। सप्रे ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रभारी मंत्री का आभार जताते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में बीना क्षेत्र में लगभग 300 करोड़ रुपए के विकास कार्य हुए हैं, जिससे जनता काफी खुश है।
जब उनसे पूछा गया कि वे स्वयं स्पष्ट क्यों नहीं करतीं कि किस पार्टी के साथ हैं, तो उन्होंने जवाब दिया, “हम कोर्ट नहीं गए थे। कोर्ट हमारी पार्टी के उमंग सिंघार गए थे। अगर उन्हें संशय है, तो वे कोर्ट में अपना संशय दूर करें। कोर्ट ही तय करेगा कि स्थिति क्या है।”
निर्मला सप्रे गुरुवार को सागर में प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ल की अध्यक्षता में आयोजित जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक में शामिल हुई थीं। इसी दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में यह बयान दिया।
कांग्रेस कार्यालय में नजर नहीं आने और भाजपा कार्यक्रमों में सक्रिय रहने के सवाल पर सप्रे ने कहा, “मुझे जहां से आमंत्रण मिलता है, मैं वहां जाती हूं। जो बुलाता है, मैं वहां चली जाती हूं।”

इसके बाद उन्होंने एक बार फिर विकास को अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा, “मैं तो चाहती हूं कि उमंग सिंघार बीना को जिला बना दें। हमारे 300 करोड़ के काम दे दें। जो जिला बनाएगा, हम उसके साथ हैं।”
उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह बयान साफ संकेत देता है कि राजनीतिक समर्थन अब विकास कार्यों और सत्ता समीकरणों के आधार पर तय हो रहा है।
निर्मला सप्रे ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान पर भी खुलकर बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेता नहीं चाहते थे कि वे सक्रिय विधायक के रूप में काम करें। सप्रे ने कहा, “27 तारीख को व्हिप जारी हुई थी और मैं वहां पहुंची। लेकिन पार्टी में कुछ लोग ऐसे हैं जो नहीं चाहते कि बीना की विधायक काम करे। यह उनका षड्यंत्र था, पार्टी का नहीं।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे बीना क्षेत्र में लंबे समय बाद बड़े विकास कार्य करा रही हैं। सप्रे ने कहा, “बीना में पिछले 15-20 वर्षों में जो काम नहीं हुए, वो मैं करवा रही हूं। यह महिलाओं को दबाने की मानसिकता भी है।”
वहीं, कांग्रेस ने निर्मला सप्रे के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने उनके बयान को राजनीतिक सौदेबाजी का खुला प्रमाण बताया है।
पीसी शर्मा ने कहा, “अगर कोई विधायक खुले मंच से यह कहे कि ‘300 करोड़ रुपए और बीना को जिला बना दो तो कांग्रेस ज्वाइन कर लूंगी’, तो इससे बड़ा सबूत और क्या होगा कि वे अब कांग्रेस में नहीं हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि पूरा मामला सत्ता और राजनीतिक दबाव का खेल है। शर्मा ने कहा कि जनता के जनादेश के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और कभी इधर तो कभी उधर की राजनीति कर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है।
उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से भी मांग की कि अब इस पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट की जाए। पीसी शर्मा ने कहा, “जब खुद विधायक यह कह रही हैं कि उन्हें कांग्रेस ज्वाइन करनी पड़ेगी, तो इसका सीधा अर्थ है कि वे वर्तमान में कांग्रेस में नहीं हैं।”
दरअसल, पूरा विवाद पिछले वर्ष लोकसभा चुनाव के दौरान शुरू हुआ था। निर्मला सप्रे ने कांग्रेस के टिकट पर बीना विधानसभा सीट से चुनाव जीता था। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान वे मुख्यमंत्री मोहन यादव के मंच पर पहुंचीं और भाजपा का गमछा पहन लिया था।
इसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए याचिका दायर की थी। मामला अभी विचाराधीन है और अदालत में इसकी सुनवाई चल रही है।
निर्मला सप्रे लगातार यह कहती रही हैं कि उनका मकसद केवल बीना क्षेत्र का विकास और बीना को जिला बनाना है। उनका दावा है कि वे जनता के हित में निर्णय ले रही हैं। लेकिन उनके ताजा बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में “डील पॉलिटिक्स” की चर्चा फिर तेज हो गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निर्मला सप्रे का बयान केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सत्ता और संगठन के बीच चल रहे संघर्ष का संकेत भी है। यह मामला अब केवल दल-बदल तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि विकास, क्षेत्रीय राजनीति और राजनीतिक वफादारी के बड़े सवालों से भी जुड़ गया है।
आने वाले दिनों में अदालत का फैसला और कांग्रेस-भाजपा की रणनीति इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी, लेकिन फिलहाल निर्मला सप्रे के बयान ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नया भूचाल जरूर ला दिया है।