रतलाम जिले में पटवारी रविशंकर खराड़ी की आत्महत्या का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के बाद परिजनों, पटवारियों और सामाजिक संगठनों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया है। नायब तहसीलदार पर कार्रवाई की मांग को लेकर धरना जारी है, वहीं प्रशासन ने फिलहाल संबंधित अधिकारी को हटाकर अटैच कर दिया है।
मामला आलोट में पदस्थ पटवारी रविशंकर खराड़ी से जुड़ा है, जिन्होंने हाल ही में अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इस घटना के बाद परिवार और पटवारी संघ ने आरोप लगाया कि उन्हें नायब तहसीलदार द्वारा लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था, जिसके कारण उन्होंने यह कदम उठाया।
घटना के बाद मंगलवार रात बड़ी संख्या में पटवारी और मृतक के परिजन थाने पहुंचे और धरने पर बैठ गए। उनका स्पष्ट कहना था कि जब तक नायब तहसीलदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होगी, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे। इस विरोध में कमलेश्वर डोडियार सहित जयस संगठन के कई नेता भी शामिल हुए, जिससे मामला और अधिक राजनीतिक रंग लेता नजर आया।

स्थिति को संभालने के लिए जिला प्रशासन को तत्काल कदम उठाने पड़े। मिशा सिंह ने नायब तहसीलदार सविता राठौर को आलोट से हटाकर रतलाम के भू-अभिलेख कार्यालय में अटैच कर दिया। हालांकि, परिजन और पटवारी संघ इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं और निलंबन तथा हत्या का मामला दर्ज करने की मांग पर अड़े हुए हैं।
बुधवार सुबह मामला और गंभीर हो गया, जब परिजन पोस्टमार्टम कराने से भी इनकार कर बैठे। उन्होंने साफ कहा कि पहले एफआईआर दर्ज की जाए, उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया होगी। बड़ी संख्या में लोग मेडिकल कॉलेज पहुंच गए और वहीं धरना शुरू कर दिया। हालात को देखते हुए प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं थे।
धरने में शामिल पटवारियों ने भी काम बंद करने की चेतावनी दी है। पटवारी संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि उनके साथी ने जो पत्र लिखा है, उसे मृत्यु पूर्व बयान माना जाए और उसी आधार पर कार्रवाई की जाए। उनका आरोप है कि नायब तहसीलदार द्वारा नियम विरुद्ध कार्य करने का दबाव बनाया जा रहा था, जिससे मृतक मानसिक तनाव में था।

मृतक के परिवार ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। मां का कहना है कि उनके बेटे को लगातार परेशान किया जाता था। वहीं, सोशल मीडिया पर वायरल एक पत्र में भी रविशंकर ने काम के अत्यधिक दबाव और अनुचित निर्देशों का जिक्र किया है। हालांकि पुलिस ने आधिकारिक तौर पर सुसाइड नोट की सामग्री का खुलासा नहीं किया है।
इस पूरे मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां सरकारी कर्मचारियों पर काम का दबाव और मानसिक तनाव की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदारी तय करने की मांग भी तेज हो गई है।

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता स्थिति को नियंत्रित करना और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है।
इस घटना ने न केवल एक परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र को भी झकझोर दिया है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और प्रशासनिक कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।