सागर जिले में बंडा परियोजना के डूब क्षेत्र से प्रभावित ग्रामीणों के पुनर्वास और समस्याओं के समाधान को लेकर प्रशासन ने सक्रियता बढ़ा दी है। कलेक्टर प्रतिभा पाल के निर्देशानुसार प्रभावित ग्राम बहरोल किरौला, उल्दन, सलैया खुर्द एवं पिपरिया इल्लाई में व्यापक स्तर पर समस्या निवारण शिविर एवं डोर-टू-डोर सर्वे अभियान आयोजित किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने गांवों में पहुंचकर प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनीं और निराकरण के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
प्रशासन द्वारा आयोजित इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य डूब क्षेत्र में रहने वाले परिवारों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना तथा पुनर्वास संबंधी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना है। शिविरों में ग्रामीणों ने मुआवजा, पुनर्वास, भूमि आवंटन, आवास, पेयजल, सड़क एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं से संबंधित विषय उठाए, जिन पर अधिकारियों ने गंभीरता से चर्चा करते हुए समाधान की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।
प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट होने की अपील
शिविर के दौरान प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को स्पष्ट रूप से अवगत कराया गया कि वे 30 मई 2026 के पूर्व पनारी ग्राम स्थित पुनर्वास कॉलोनी अथवा अन्य सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित हो जाएं। अधिकारियों ने कहा कि बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए यह कदम लोगों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। प्रशासन ने ग्रामीणों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि पुनर्वास प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने में सभी की सहभागिता जरूरी है।

अधिकारियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि पुनर्वास से जुड़ी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और किसी भी पात्र परिवार को शासन की योजनाओं से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। ग्रामीणों को पुनर्वास नीति, मुआवजा प्रक्रिया और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी विस्तार से दी गई।
डोर-टू-डोर सर्वे से जुटाई जा रही जानकारी
प्रशासन द्वारा केवल शिविर आयोजन तक ही सीमित न रहते हुए गांवों में डोर-टू-डोर सर्वे अभियान भी चलाया गया। इस सर्वे के माध्यम से प्रत्येक प्रभावित परिवार की स्थिति, सदस्यों की संख्या, आवासीय स्थिति और आवश्यकताओं का विस्तृत विवरण एकत्र किया जा रहा है। अधिकारियों ने घर-घर जाकर लोगों से चर्चा की और उनकी समस्याओं को सूचीबद्ध किया।
सर्वे का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पुनर्वास प्रक्रिया में कोई भी परिवार छूटे नहीं तथा सभी पात्र लोगों को समय पर सहायता उपलब्ध हो सके। प्रशासन का मानना है कि जमीनी स्तर पर सटीक जानकारी मिलने से योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से किया जा सकेगा।
पनारी पुनर्वास कॉलोनी का सीमांकन कार्य पूरा
राजस्व एवं जल संसाधन विभाग की टीम ने पनारी ग्राम स्थित पुनर्वास कॉलोनी का सीमांकन कार्य भी किया। अधिकारियों ने बताया कि पुनर्वास कॉलोनी में प्रभावित परिवारों को व्यवस्थित रूप से बसाने की तैयारी की जा रही है। सीमांकन कार्य पूर्ण होने के बाद अब वहां आधारभूत सुविधाओं के विकास का कार्य भी तेजी से किया जाएगा।
प्रशासन का प्रयास है कि पुनर्वास स्थल पर सड़क, पेयजल, बिजली, आवास और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं, ताकि प्रभावित परिवारों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। अधिकारियों ने कहा कि पुनर्वास केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि लोगों को सुरक्षित और बेहतर जीवन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया है।
अधिकारियों ने सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं
आयोजित शिविरों में तहसीलदार, एसडीओ, उपयंत्री, राजस्व निरीक्षक, पटवारी सहित राजस्व एवं जल संसाधन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने ग्रामीणों की व्यक्तिगत समस्याएं भी सुनीं और मौके पर ही कई समस्याओं के निराकरण के निर्देश दिए।
ग्रामीणों ने पुनर्वास से संबंधित दस्तावेजों, भूमि मापन, मुआवजा वितरण और आवासीय सुविधाओं को लेकर सवाल पूछे, जिनका अधिकारियों ने विस्तार से जवाब दिया। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी कार्य शासन की निर्धारित प्रक्रिया और नियमों के अनुसार पारदर्शी तरीके से किए जाएंगे।
प्रशासन ने सुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता
प्रशासन का कहना है कि डूब क्षेत्र में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। संभावित जलभराव और बरसात के खतरे को देखते हुए प्रभावित परिवारों को पहले से सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि समय पर पुनर्वास होने से किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सकेगा।
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पुनर्वास कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और प्रत्येक प्रभावित परिवार से लगातार संपर्क बनाए रखा जाए। उन्होंने कहा कि पुनर्वास प्रक्रिया को मानवीय दृष्टिकोण के साथ पूरा किया जाए और लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए।
ग्रामीणों से सहयोग की अपील
प्रशासन ने प्रभावित गांवों के लोगों से अपील की है कि वे पुनर्वास प्रक्रिया में सहयोग करें और समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचें। अधिकारियों ने कहा कि शासन द्वारा प्रभावित परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों को यह भी आश्वस्त किया गया कि पुनर्वास के दौरान उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
बंडा परियोजना के अंतर्गत चल रही यह कार्रवाई प्रशासन की सक्रियता और संवेदनशीलता को दर्शाती है। समस्या निवारण शिविर, डोर-टू-डोर सर्वे और पुनर्वास कॉलोनी के सीमांकन जैसे कदमों से प्रभावित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है। आने वाले दिनों में प्रशासन पुनर्वास कार्यों को और तेज गति से आगे बढ़ाएगा, ताकि सभी प्रभावित परिवार सुरक्षित एवं व्यवस्थित जीवन की ओर बढ़ सकें।