बंडा सिंचाई परियोजना में प्रभावितों को 10 करोड़ से अधिक मुआवजा स्वीकृत, 140 अवार्डियों को मिलेगा ई-भुगतान !

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सागर जिले की महत्वपूर्ण बंडा सिंचाई परियोजना के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। कलेक्टर Pratibha Pal के निर्देशानुसार तहसील बंडा अंतर्गत परियोजना से प्रभावितों को अर्जित भूमि एवं अन्य परिसंपत्तियों के एवज में कुल 10 करोड़ रुपये से अधिक की मुआवजा राशि स्वीकृत की गई है।

प्रशासन द्वारा जारी आदेशों के अनुसार यह पूरी राशि ई-भुगतान (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना समाप्त हो।

ग्रामवार मुआवजा विवरण

परियोजना के तहत ग्राम उल्दन के कुल 21 अवार्डियों को ₹1,00,47,272 (एक करोड़, सात लाख सैतालीस हजार दो सौ बहत्तर रुपये मात्र) की मुआवजा राशि स्वीकृत की गई है। यह राशि संबंधित प्रभावित परिवारों को उनकी भूमि एवं परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के एवज में दी जाएगी।

इसी प्रकार ग्राम पिपरिया इल्लाई के कुल 119 अवार्डियों को ₹9,94,14,582 (नौ करोड़ चौानवे लाख चौदह हजार पाँच सौ बयासी रुपये मात्र) की बड़ी राशि स्वीकृत की गई है। यह मुआवजा भी ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के खातों में स्थानांतरित किया जाएगा।

इस प्रकार कुल मिलाकर 140 प्रभावित परिवारों को 10 करोड़ रुपये से अधिक की मुआवजा राशि प्रदान की जा रही है, जो इस परियोजना के तहत अब तक की एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक उपलब्धि मानी जा रही है।

प्रशासन की पारदर्शी पहल

कलेक्टर Pratibha Pal ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संपूर्ण भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि सभी पात्र हितग्राहियों को बिना किसी विलंब के उनका मुआवजा प्राप्त हो।

उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि पी.डी. (Public Deposit) खाते से राशि के भुगतान में किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा न आए और सभी औपचारिकताओं का पालन सटीक रूप से किया जाए।

परियोजना का महत्व

बंडा सिंचाई परियोजना क्षेत्र के कृषि विकास और जल प्रबंधन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस परियोजना के पूर्ण होने से आसपास के कई गांवों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा, जिससे किसानों की फसल उत्पादन क्षमता में वृद्धि होने की संभावना है।

हालांकि इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण आवश्यक होने के कारण कई परिवार प्रभावित हुए हैं, लेकिन प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी प्रभावितों को उचित और समय पर मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव कम से कम पड़े।

प्रभावित परिवारों में राहत

मुआवजा राशि स्वीकृत होने की खबर से प्रभावित परिवारों में राहत की भावना देखी जा रही है। लंबे समय से अपनी भूमि के बदले उचित मुआवजे की प्रतीक्षा कर रहे ग्रामीणों के लिए यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि राशि समय पर उनके खातों में पहुंचती है, तो वे अपने नए जीवन की शुरुआत बेहतर तरीके से कर सकेंगे। कई परिवार इस राशि का उपयोग कृषि भूमि के पुनर्निर्माण, आवास निर्माण और बच्चों की शिक्षा में करने की योजना बना रहे हैं।

ई-भुगतान प्रणाली से बढ़ी पारदर्शिता

प्रशासन द्वारा अपनाई गई ई-भुगतान प्रणाली से मुआवजा वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ी हैं। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है और राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचती है।

अधिकारियों के अनुसार, इस प्रणाली से न केवल भुगतान प्रक्रिया सरल हुई है, बल्कि शिकायतों और विवादों में भी कमी आई है।

प्रशासनिक समन्वय

इस पूरी प्रक्रिया में राजस्व विभाग, सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय देखा गया है। अधिकारियों ने समयबद्ध तरीके से सर्वेक्षण, मूल्यांकन और अवार्ड निर्धारण की प्रक्रिया पूरी की, जिसके बाद यह भुगतान आदेश जारी किए गए।

कलेक्टर ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में भी इसी प्रकार की पारदर्शी और प्रभावी प्रक्रिया अपनाई जाए, ताकि विकास परियोजनाओं के दौरान जनता को न्यूनतम असुविधा हो।

बंडा सिंचाई परियोजना के तहत 10 करोड़ रुपये से अधिक की मुआवजा राशि स्वीकृत होना प्रशासन की एक महत्वपूर्ण पहल है, जो विकास और जनहित के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास दर्शाती है। जहां एक ओर यह परियोजना क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगी, वहीं दूसरी ओर प्रभावित परिवारों को समय पर मुआवजा मिलना उनकी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा।

यह निर्णय न केवल प्रशासनिक दक्षता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि विकास कार्यों के साथ-साथ प्रभावित नागरिकों के अधिकारों की रक्षा भी समान रूप से प्राथमिकता में है।

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