बंडा
सरकार द्वारा किसानों की उपज खरीदी को आसान और लाभकारी बनाने के दावे जमीनी स्तर पर कई बार खोखले साबित होते नजर आते हैं। ऐसा ही मामला सागर जिले के बंडा क्षेत्र में सामने आया, जहां गेहूं उपार्जन केंद्र पर बारदाने (बोरी) की कमी के कारण किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह से अपनी उपज लेकर पहुंचे किसान दिनभर इंतजार करने के बाद बिना तुलाई के ही घर लौटने को मजबूर हो गए।
जानकारी के अनुसार, सेवा सहकारी समिति जगथर में गेहूं खरीदी के लिए पहुंचे करीब 15 से 20 किसान बारदाने की अनुपलब्धता के चलते परेशान रहे। किसानों ने पहले से स्लॉट बुक कराया था और नियत समय पर अपनी उपज लेकर केंद्र पहुंचे, लेकिन वहां व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई मिली।
सुबह से शाम तक इंतजार, फिर मायूसी
किसान जाहर सिंह हनोता ने बताया कि वे सुबह से केंद्र पर खड़े रहे, लेकिन बारदाना नहीं होने के कारण उनकी उपज की तुलाई नहीं हो सकी। इसी तरह भगवान सिंह गनियारी 30 बोरी गेहूं लेकर केंद्र पहुंचे थे, लेकिन उन्हें भी बिना तुलाई के लौटना पड़ा। चंद्रमा यादव जैसे कई किसान ट्रैक्टर में भरी उपज लेकर वापस घर लौट गए, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ी।
योजनाओं में देरी से छोटे किसान प्रभावित
किसानों का कहना है कि खरीदी योजनाएं पहले ही देरी से शुरू होती हैं। फरवरी में चना और मसूर की आवक शुरू हो जाती है, जबकि गेहूं मार्च में बाजार में आ जाता है। लेकिन सरकारी खरीदी की प्रक्रिया अप्रैल के मध्य या मई में शुरू होती है। ऐसे में छोटे किसान अपनी तात्कालिक जरूरतों के चलते पहले ही उपज बेचने को मजबूर हो जाते हैं और योजना का पूरा लाभ नहीं उठा पाते।

बारदाना को लेकर जिम्मेदारों में टकराव
मामले में समिति प्रबंधक बृजेश सिंह का कहना है कि उन्हें विपणन संघ से जो बारदाना मिल रहा है, वह खराब और कटा-फटा है, जिससे उपयोग में दिक्कत आ रही है। वहीं विपणन संघ की ओर से दावा किया गया है कि बारदाना पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, लेकिन समिति प्रबंधन उसे लेने में रुचि नहीं दिखा रहा है। संघ का कहना है कि यदि बारदाने में कोई खराबी निकलती है तो उसे पंचनामा बनाकर वापस किया जा सकता है।
इस विरोधाभासी बयानबाजी से साफ है कि विभागों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा सीधे किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल
इस पूरे मामले में जब खाद्य निरीक्षक प्रशांत राजपूत से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनका फोन बंद मिला। इससे प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए जिम्मेदार अधिकारी कितने सक्रिय हैं।
किसानों की मांग—तुरंत सुधार हो व्यवस्था
किसानों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि उपार्जन केंद्रों पर बारदाना और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े। उनका कहना है कि यदि स्लॉट बुकिंग और खरीदी की प्रक्रिया तय है, तो व्यवस्थाएं भी उसी के अनुरूप होनी चाहिए।बंडा के इस उपार्जन केंद्र की स्थिति यह दर्शाती है कि योजनाएं भले ही किसानों के हित में बनाई जाती हों, लेकिन उनकी सफलता सही क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। जब तक विभागों के बीच बेहतर समन्वय और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक किसानों को इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता रहेगा।