भोपाल के 7 गांवों में टाइगर का आतंक: 12 दिन से दहशत में ग्रामीण, खेतों में जाना बंद, 5 मवेशियों का कर चुका शिकार !

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भोपाल से करीब 25 किलोमीटर दूर बैरसिया रोड से लगे गांवों में पिछले 12 दिनों से टाइगर का मूवमेंट लोगों के लिए दहशत का कारण बना हुआ है। कनेरा समेत आसपास के सात गांवों में ग्रामीण भय के साए में जी रहे हैं। हालत यह है कि किसान रात में खेतों पर सिंचाई के लिए जाना बंद कर चुके हैं, कई लोगों ने अपने आने-जाने के रास्ते बदल दिए हैं और मवेशियों को खुले में बांधना भी बंद कर दिया गया है।

वन विभाग लगातार सर्चिंग अभियान चला रहा है, लेकिन अब तक टाइगर का सटीक लोकेशन पता नहीं चल पाया है। विभाग ने इलाके में ट्रैप कैमरे लगाए हैं, मगर उसमें भी बाघ कैद नहीं हो सका है।

कनेरा से शुरू हुआ टाइगर का मूवमेंट

सबसे पहले टाइगर का मूवमेंट कनेरा गांव में देखा गया था। इसके बाद करोंदखुर्द, कधैया, छापर, अगरिया, मुगालिया कोट और चांचड़ गांवों तक उसके पहुंचने की खबरें सामने आईं। ग्रामीणों के मुताबिक बाघ रात के समय नदी किनारे और पहाड़ी रास्तों से गांवों की ओर आता है।

कनेरा गांव के पास पुल पातरा नदी और आर्मी का प्रतिबंधित क्षेत्र है। आसपास घना जंगल और सुनसान इलाका होने के कारण वन्य जीवों की आवाजाही बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी तेंदुए देखे जाते रहे हैं, लेकिन इस बार टाइगर लगातार गांवों के करीब पहुंच रहा है।

5 गाय-भैंसों का कर चुका शिकार

पिछले 12 दिनों में टाइगर पांच गाय और भैंसों का शिकार कर चुका है। इससे ग्रामीणों में डर और ज्यादा बढ़ गया है। लोग अब शाम ढलते ही घरों में कैद हो जाते हैं। गांव के बाहर बने खलिहानों और खेतों में रात बिताने वाले किसान अब वहां नहीं जा रहे।

ग्रामीणों का कहना है कि बाघ गांव के बाहर बंधे मवेशियों को आसानी से निशाना बना रहा है। यही वजह है कि अब कई परिवार अपने पशुओं को घरों के भीतर या सुरक्षित जगहों पर बांध रहे हैं।

किसान नहीं कर पा रहे सिंचाई

कनेरा गांव के रहवासी और जिला पंचायत उपाध्यक्ष मोहन सिंह जाट ने बताया कि पुल पातरा नदी और अगरिया क्षेत्र के आसपास किसानों ने सब्जियों की फसल लगा रखी है। गर्मी के मौसम में इन फसलों को रात में सिंचाई की जरूरत होती है, लेकिन टाइगर के डर से किसान खेतों तक नहीं जा पा रहे।

उन्होंने बताया कि कनेरा से अगरिया के बीच एक खेत पर बने घर में शादी का कार्यक्रम भी है, जिसके चलते ग्रामीण अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं। लोगों को डर है कि कहीं टाइगर आबादी वाले हिस्से में न पहुंच जाए।

लोगों ने बदल लिए रास्ते

अगरिया गांव के लक्ष्मण नामक ग्रामीण ने बताया कि टाइगर का मूवमेंट अधिकतर रात में देखा जा रहा है। इस वजह से लोगों ने खेतों और गांवों के बीच के छोटे रास्तों पर जाना बंद कर दिया है।

ग्रामीण अब 5 से 6 किलोमीटर लंबा रास्ता तय कर सुरक्षित मार्ग से आना-जाना कर रहे हैं। कई चरवाहों ने मवेशी चराने भी बंद कर दिए हैं। बच्चों और महिलाओं को शाम के बाद घर से बाहर न निकलने की हिदायत दी जा रही है।

टाइगर के साथ तेंदुए की भी मौजूदगी

ग्रामीणों के अनुसार इलाके में केवल टाइगर ही नहीं, बल्कि तेंदुए का मूवमेंट भी देखा जा रहा है। यह पूरा क्षेत्र रायसेन जिला की सीमा से जुड़ा हुआ है, जहां पहले भी बाघ और तेंदुओं की गतिविधियां सामने आती रही हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जंगल और नदी के रास्तों से वन्य जीव अक्सर गांवों के करीब पहुंच जाते हैं। हालांकि इस बार टाइगर लगातार सक्रिय है, जिससे लोगों में ज्यादा भय है।

वन विभाग की टीम लगातार कर रही सर्चिंग

वन विभाग की टीम सूचना मिलने के बाद से लगातार इलाके में सर्चिंग अभियान चला रही है। कई स्थानों पर ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं, लेकिन अब तक टाइगर कैमरे में कैद नहीं हुआ है। रविवार को भी विभाग की टीम ने गांवों और जंगल के आसपास तलाशी अभियान चलाया।

भोपाल के डीएफओ लोकप्रिय भारती ने बताया कि भोपाल के आसपास करीब 20 बाघ मौजूद हैं और नई रिपोर्ट में यह संख्या बढ़ सकती है। उन्होंने संभावना जताई कि यह टाइगर रायसेन जिले से भोपाल क्षेत्र में आया हो सकता है।

डीएफओ ने कहा कि फिलहाल जहां मूवमेंट की सूचना मिल रही है, वहां टाइगर स्थायी रूप से मौजूद नहीं है, लेकिन वन विभाग पूरी निगरानी रख रहा है।

दहशत के बीच सतर्कता की अपील

वन विभाग ने ग्रामीणों से रात में अकेले बाहर न निकलने, जंगल या नदी किनारे न जाने और मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर रखने की अपील की है। विभाग की टीमें लगातार गांवों में लोगों को जागरूक भी कर रही हैं।

फिलहाल टाइगर का मूवमेंट थमने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसे में सात गांवों के लोग हर रात डर के साए में गुजारने को मजबूर हैं।

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