मऊगंज पुलिस पर हमले के चार दिन बाद प्रशासनिक बदलाव और विवादित वीडियो का खुलासा !

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मऊगंज, मध्यप्रदेश – 15 मार्च को मऊगंज के शाहपुर थाना क्षेत्र में हुई पुलिस पर हमले की घटना ने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया। इस हमले में एसएएफ के एएसआई रामचरण गौतम की मौत हो गई थी, जबकि 13 अन्य पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इस हमले के चार दिन बाद, मध्यप्रदेश सरकार ने मऊगंज के प्रशासन में बड़ा बदलाव करते हुए कलेक्टर और एसपी दोनों को हटा दिया। इस बीच, पुलिस पर हुए हमले का एक नया वीडियो सामने आया है, जिससे मामले की गंभीरता और भी बढ़ गई है।

प्रशासनिक बदलाव: कलेक्टर और एसपी का स्थानांतरण

मऊगंज पुलिस पर हमले के बाद राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कलेक्टर अजय श्रीवास्तव और एसपी रसना ठाकुर को हटा दिया है। कलेक्टर अजय श्रीवास्तव को लोक परिसंपत्ति प्रबंधन और खेल एवं युवा कल्याण विभाग में उप सचिव के रूप में स्थानांतरित किया गया है। उनकी जगह 2015 बैच के आईएएस संजय कुमार जैन को मऊगंज का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। वहीं, एसपी रसना ठाकुर को एआईजी के पद पर पीएचक्यू भोपाल भेजा गया है। उनकी जगह दिलीप कुमार सोनी को मऊगंज का नया एसपी बनाया गया है।

घटना का नया वीडियो और टीआई का प्रयास

मऊगंज पुलिस पर हमले का नया वीडियो सामने आया है, जिसमें टीआई संदीप भारती महिलाओं के सामने हाथ जोड़कर बंधक को छोड़ने की अपील करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो में महिलाएं बंधक को नहीं छोड़ने पर अड़ी हुई हैं, और टीआई उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे हैं।

टीआई संदीप भारती वीडियो में कहते हुए सुनाई दे रहे हैं, “माताजी आपने अपराधी को दंड दिया, आपने ठीक किया, लेकिन हमें कानून के मुताबिक काम करना होगा। हम उसकी गिरफ्तारी करेंगे और FIR दर्ज करेंगे। कृपया हमें उस व्यक्ति को सौंप दें।” महिलाएं इस पर आरोप लगाती हैं कि पुलिस पैसे लेकर आरोपी को छोड़ देगी।

मीडियाकर्मी मोहम्मद रफीक का नाम सामने आया

पुलिस ने मीडियाकर्मी मोहम्मद रफीक पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस का दावा है कि हमले के सबूत रफीक के मोबाइल में मिले हैं, जिसके आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया है। रफीक पर आरोप है कि उसने टीआई पर दबाव डाला था कि उनके भाई के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म के मामले को कमजोर किया जाए। रफीक के खिलाफ हत्या का मामला भी दर्ज किया गया है। पुलिस ने उसके मोबाइल से कई वीडियो और संदेश जब्त किए हैं, जो इस हमले के साजिश की पुष्टि करते हैं।

रफीक को पहले ही जानकारी थी कि पुलिस की टीम गड़रा गांव में 15 मार्च को पहुंचेगी, और उसने इस मौके का फायदा उठाने की साजिश रची थी। रफीक ने गड़रा में अशोक कोल के बेटे विनोद कोल को मोहरा बनाया और सनी द्विवेदी को बंधक बना लिया। आरोप है कि रफीक ने इस दौरान घटना की लाइव वीडियो भी बनाई और पुलिस पर हमले के लिए उकसाया।

हमले की साजिश और रफीक का जिक्र

पुलिस के अनुसार, रफीक ने जानबूझकर गांव में हिंसा भड़काने की कोशिश की थी। टीआई संदीप भारती ने बताया कि रफीक को पहले से ही शंका थी कि वह पुलिस को नुकसान पहुंचाने की फिराक में है। इस कारण थाने के बल को अलर्ट कर दिया गया था। हालांकि, रफीक को मौके पर कुछ नहीं मिल सका और वह भागने में सफल हो गया।

टीआई संदीप भारती ने बताया कि गांव में रफीक को पुलिस द्वारा भड़काने के लिए देखा गया था। वह वहां लोगों को उकसाते हुए दिखाई दिया था। पुलिस ने बाद में उसकी भूमिका की जांच की और रफीक का नाम भी गिरफ्तार आरोपियों के बयान में सामने आया।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां

मऊगंज पुलिस ने अब तक इस मामले में 29 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, और मंगलवार तक पुलिस ने चार और गिरफ्तारियां की हैं। पुलिस का कहना है कि और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं, क्योंकि जांच जारी है। घटनास्थल पर 250 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है और आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है।

हमले में हुई एएसआई की मौत और हमलावरों की सजा

15 मार्च को गड़रा गांव में आदिवासी परिवार ने सनी द्विवेदी को बंधक बना लिया था। पुलिस जब उसे छुड़ाने पहुंची तो हमलावरों ने पत्थरों और लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इस हमले में एसएएफ के एएसआई रामचरण गौतम की मौत हो गई थी, जबकि 13 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हमले में मारे गए पुलिसकर्मी के परिवार को मदद का आश्वासन दिया है।

मऊगंज पुलिस पर हमले की घटना ने प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था की अहमियत को सामने लाया है। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई गिरफ्तारियां की हैं और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए पूरी ताकत से काम कर रही है। वहीं, मीडियाकर्मी मोहम्मद रफीक की भूमिका इस मामले में एक बड़ा मोड़ लाती है, जिससे इस पूरे मामले की जांच और भी दिलचस्प बन गई है। पुलिस की कार्रवाई के बाद उम्मीद की जा रही है कि इस हिंसक घटना के दोषियों को जल्द सजा मिलेगी, और समाज में कानून का राज स्थापित होगा।

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