छतरपुर जिले के महाराजपुर में 14 जनवरी से शुरू हुए पारंपरिक मेले में एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं का अभाव दुकानदारों और दूर-दराज से आए लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। नगर पालिका परिषद द्वारा अभी तक मेले में ठंड से बचाव, अलाव और कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
कचरे और ठंड से जूझ रहे लोग
दुकानदारों ने बताया कि वे वर्षों से महाराजपुर मेले में व्यापार करते आए हैं, लेकिन इस बार जैसी खराब व्यवस्थाएं उन्होंने पहले कभी नहीं देखी। ठंड के इस मौसम में रहने के लिए कोई उचित इंतजाम नहीं है। कई दुकानदार अपने छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हैं।
मेला स्थल पर कचरा नियमित रूप से नहीं उठाया जा रहा, जिससे जगह-जगह गंदगी फैली हुई है और स्वास्थ्य की दृष्टि से खतरा उत्पन्न हो रहा है।
अलाव और ठंड से बचाव की कोई सुविधा नहीं

दुकानदारों का कहना है कि सर्दी से बचने के लिए न तो अलाव की उचित व्यवस्था की गई है और न ही लकड़ी या अन्य साधन उपलब्ध कराए गए हैं। ठंड से बचने के लिए वे दुकानों से निकलने वाले कचरे को जलाकर हाथ सेंकने को मजबूर हैं। इसका सबसे अधिक असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है।
प्रशासन से मांग
दुकानदारों ने प्रशासन और नगर पालिका परिषद से अनुरोध किया है कि जल्द से जल्द अलाव, लकड़ी और ठंड से बचाव की अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे सुरक्षित तरीके से मेले की अवधि पूरी कर सकें।
गौरतलब है कि हाल ही में कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने ठंड को देखते हुए नगर पालिका, नगर परिषद और पंचायत स्तर पर अलाव की व्यवस्था करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसके बावजूद महाराजपुर मेले में इन आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है।
दुकानदारों और श्रद्धालुओं का कहना है कि अगर जल्द व्यवस्था नहीं की गई, तो वे अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और मेले में आने वाले पर्यटकों व ग्रामीणों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
महाराजपुर मेला न केवल सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि यह स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में प्रशासन की लापरवाही से मेले का उद्देश्य और आयोजन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।