मालथौन में 2 करोड़ की लागत से बनेगा भगवान बुद्ध मंदिर और पार्क : भूपेंद्र सिंह !

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पातीखेड़ा (मालथौन)। पातीखेड़ा में नवनिर्मित ऋषिपत्तन बौद्ध विहार में भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापना समारोह श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर पूर्व गृहमंत्री एवं Bhupendra Singh ने कहा कि पातीखेड़ा में निर्मित भव्य बौद्ध विहार ध्यान, ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया युद्ध, हिंसा और अशांति के दौर से गुजर रही है, लेकिन भारत में शांति, समरसता और सहअस्तित्व की भावना जीवित है, क्योंकि इस धरती पर भगवान बुद्ध जैसे महापुरुष ने जन्म लिया, जिन्होंने मानवता को करुणा, शांति और अहिंसा का संदेश दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भूपेंद्र सिंह ने कहा कि भगवान बुद्ध शांति के महासागर थे और उनकी शिक्षाओं की लहरें सदियों से मानवता को शीतलता और मार्गदर्शन प्रदान कर रही हैं। उन्होंने घोषणा की कि मालथौन में दो करोड़ रुपए की लागत से भगवान बुद्ध का भव्य मंदिर और पार्क बनाया जाएगा, जिससे क्षेत्र में बौद्ध संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि पातीखेड़ा जैसे ग्रामीण क्षेत्र में भगवान बुद्ध का इतना भव्य विहार बनना अत्यंत गौरव की बात है। इस निर्माण में सहयोग देने वाले सभी लोगों की उन्होंने सराहना करते हुए धन्यवाद और शुभकामनाएं दीं। मंच पर उपस्थित बौद्ध भिक्षु संतों को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के दर्शन कर मन अत्यंत प्रसन्न हुआ और उनका आशीर्वाद सदैव समाज को दिशा देता रहेगा।

भूपेंद्र सिंह ने भगवान बुद्ध के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सिद्धार्थ गौतम एक राजकुमार थे, जिन्होंने 29 वर्ष की आयु में अपना राजपाट त्यागकर मानव कल्याण का मार्ग चुना। इस घटना को महाभिनिष्क्रमण कहा जाता है। उन्होंने बताया कि वैशाख पूर्णिमा की ऐतिहासिक रात्रि में सिद्धार्थ गौतम को बोधि प्राप्त हुआ और वे बुद्ध कहलाए। इसके बाद उन्होंने एक ऐसे धर्म और दर्शन की स्थापना की, जिसने भारत ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण एशिया और वैश्विक सभ्यता को प्रभावित किया।

उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध ने समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव और ऊंच-नीच की भावना का विरोध किया। बुद्ध का स्पष्ट संदेश था कि व्यक्ति जन्म से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से महान बनता है। उन्होंने समाज में समानता, मानवता और आत्मसम्मान की भावना को मजबूत किया। भूपेंद्र सिंह ने कहा कि बुद्ध की सामाजिक क्रांति ने दलितों और पिछड़े वर्गों को पहली बार सम्मान और आध्यात्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिलाया।

महिलाओं के अधिकारों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय महिलाओं को धार्मिक अधिकारों से वंचित रखा जाता था, लेकिन भगवान बुद्ध ने इस सोच को चुनौती देते हुए भिक्षुणी संघ की स्थापना की अनुमति दी। उन्होंने कहा कि बुद्ध द्वारा स्थापित भिक्षु संघ लोकतंत्र का प्रारंभिक स्वरूप था और इन्हीं लोकतांत्रिक मूल्यों से प्रेरित होकर B. R. Ambedkar ने भारतीय संविधान निर्माण में समानता और न्याय के सिद्धांतों को शामिल किया।

भूपेंद्र सिंह ने कहा कि छुआछूत गुलामी से भी बदतर है, क्योंकि यह आत्मा को आहत करती है। उन्होंने बताया कि खुरई विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति वर्ग के उत्थान के लिए अनेक कार्य किए गए हैं। खुरई में बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर म्यूजियम, मालथौन में बाबा साहेब अंबेडकर पार्क, संत रविदास प्रतिमा एवं पार्क, छात्रावास और सामुदायिक भवन जैसे कई विकास कार्य कराए गए हैं। उन्होंने बताया कि खुरई विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 12 हजार 200 प्रधानमंत्री आवास बनवाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने सांची में बौद्ध दर्शन के अध्ययन के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना कराई है तथा श्रीलंका से पवित्र बोधिवृक्ष लाकर सांची में रोपित किया गया है। इसके साथ ही बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए अध्ययन केंद्र और अन्य सुविधाएं भी विकसित की गई हैं।

कार्यक्रम के दौरान पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह ने नवनिर्मित बौद्ध विहार को पांच सीलिंग फैन भेंट किए। आयोजन समिति द्वारा उन्हें भगवान बुद्ध का छायाचित्र एवं स्टेशनरी सामग्री भेंट कर सम्मानित किया गया। उन्होंने स्वागत में प्राप्त समस्त स्टेशनरी सामग्री कार्यक्रम में उपस्थित बच्चों को वितरित कर दी।

कार्यक्रम का संचालन प्रमोद बौद्ध ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। समारोह में श्रद्धा, आध्यात्मिकता और सामाजिक समरसता का विशेष वातावरण देखने को मिला।

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