रहली के युवाओं ने अपनाई मशरूम की खेती, बना आत्मनिर्भरता की मिसाल !

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सागर। सागर जिले के रहली विकासखंड के वार्ड नंबर 03 निवासी मोनू तिवारी ने अपने साथी सोनू के साथ मिलकर मशरूम की खेती को आजीविका का साधन बनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाया है। सीमित संसाधनों के बावजूद इन युवाओं ने नवाचार और मेहनत के बल पर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का प्रयास शुरू किया है, जो आज क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।

मोनू तिवारी ने बताया कि उन्होंने मशरूम की खेती की तकनीक किसी औपचारिक प्रशिक्षण के बिना, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से सीखी। उन्होंने अपने घर के एक छोटे से कमरे में मशरूम उत्पादन का पहला प्रयोग किया है। शुरुआती सफलता मिलने के बाद उन्होंने अपनी पहली फसल के सैंपल दमोह, जबलपुर, सागर और स्थानीय सब्जी मंडी में भेजे हैं। जबलपुर में उनकी मशरूम की क्वालिटी को पास कर लिया गया है, जिससे उन्हें आगे बड़े स्तर पर उत्पादन की उम्मीद जगी है।

मोनू का कहना है कि उन्होंने 10 नवंबर से मशरूम की खेती शुरू की थी और 30 से 40 दिनों के भीतर फसल तैयार हो जाती है। फिलहाल अब तक लगभग 10 किलो मशरूम का उत्पादन किया जा चुका है। बाजार में इसकी फुटकर कीमत 350 से 400 रुपये प्रति किलो तक मिल रही है, जबकि थोक में 150 से 200 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक्री हो रही है।

उन्होंने बताया कि मशरूम की खेती में देखरेख बेहद जरूरी होती है, खासकर गर्मियों के मौसम में। उत्पादन के दौरान कमरे का तापमान करीब 25 डिग्री सेल्सियस बनाए रखना पड़ता है। लागत की बात करें तो लगभग 80 से 90 रुपये प्रति किलो खर्च आता है, जबकि मुनाफा इससे कहीं अधिक होने की संभावना है।

मोनू तिवारी का कहना है कि यह अभी छोटा सा प्रयोग है, लेकिन इससे कम लागत में अच्छी आमदनी संभव है। इससे परिवार के खर्चों के साथ बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी आसानी से निकाला जा सकता है। उनकी इस पहल से आसपास के युवा भी प्रेरित हो रहे हैं और भविष्य में बड़े स्तर पर मशरूम की खेती कर रोजगार के अवसर सृजित करने की योजना बना रहे हैं।

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