श्री राम कथा में गूंजा धर्म, संस्कृति और नारी सम्मान का संदेश !

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मालथौन — क्षेत्र में आयोजित श्री राम कथा एवं 21 कुंडात्मक श्री शतचंडी महायज्ञ के पावन अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में पूर्व गृहमंत्री एवं खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह ने धर्म, संस्कृति और नारी सम्मान पर आधारित प्रेरणादायक संबोधन दिया। उन्होंने अपने उद्बोधन में भगवान श्रीराम के जीवन आदर्शों को वर्तमान समय से जोड़ते हुए समाज को महत्वपूर्ण संदेश दिए।

अपने संबोधन में भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि भगवान श्री राम ने नारी सम्मान की रक्षा के लिए रावण से युद्ध किया था, वहीं आज देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नारी सम्मान को सशक्त बनाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम की कथा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि लोक जीवन की कथा है और जब तक यह कथा जीवित रहेगी, भारतीय संस्कृति भी अमर बनी रहेगी।

उन्होंने कथा वाचक विपिन बिहारी जी की सराहना करते हुए कहा कि वे लोकभाषा में कथा प्रस्तुत करते हैं, जिससे बुंदेलखंड क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता अत्यधिक है। साथ ही आयोजन समिति के परिश्रम और भक्ति भाव की भी उन्होंने प्रशंसा की।

अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम का जीवन हमें मर्यादा, कर्तव्य और धैर्य का पाठ सिखाता है। उन्होंने राम के वनवास प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन में परिस्थितियां अचानक बदल सकती हैं, इसलिए मनुष्य को केवल कर्म पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि फल देना ईश्वर के हाथ में होता है।

नारी सम्मान पर बोलते हुए उन्होंने माता सीता को भारतीय नारी शक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं सुख और समृद्धि का वास होता है। इस संदर्भ में उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम का भी उल्लेख किया, जिसे महिलाओं को अधिकार संपन्न बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को भगवद्गीता, रामायण, रामचरितमानस और महाभारत जैसे ग्रंथों का अध्ययन कराएं। उनका मानना है कि इन शास्त्रों से बच्चों में संस्कार, मूल्य और नैतिकता का विकास होता है, जिससे उनका चरित्र मजबूत बनता है।

कलियुग में कथा की महत्ता बताते हुए उन्होंने कहा कि कथा श्रवण से मन को शांति मिलती है। उन्होंने भगवान हनुमान और भगवान शिव का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां भी राम कथा होती है, वहां हनुमान जी किसी न किसी रूप में उपस्थित रहते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भगवान शिव स्वयं श्रीराम को अपना इष्ट मानते हैं और निरंतर ‘राम-राम’ का जप करते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि केवल भगवान श्री राम के चित्र की पूजा करने के बजाय उनके चरित्र को जीवन में उतारना अधिक आवश्यक है। राम का नाम और उनके आदर्श जीवन के हर युग में मानवता के लिए मार्गदर्शक रहे हैं।

यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यज्ञ हमें त्याग और समर्पण का संदेश देता है। जिस प्रकार यज्ञ में आहुति दी जाती है, उसी प्रकार मनुष्य को अपने अहंकार का त्याग करना चाहिए। यज्ञ मनुष्य की नकारात्मक प्रवृत्तियों को सकारात्मक दिशा में बदलने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

कार्यक्रम के अंत में भूपेन्द्र सिंह ने आयोजन समिति के सभी सदस्यों—दुर्गा प्रसाद प्रजापति, डालचंद पाटकर, हरनाम लोधी, महेश साधु, माधव परिहार, हक्के पाटकर, रामस्वरूप प्रजापति, पप्पू साहू, सोनू यादव, दुरग यादव सहित सभी सहयोगियों—का आभार व्यक्त किया।

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि समाज को नैतिकता, संस्कृति और मानवीय मूल्यों का संदेश देने वाला भी सिद्ध हुआ।

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