सागर में पेयजल संकट से निपटने सख्त कदम: रहली-गढ़ाकोटा में अवैध सिंचाई पर पूर्ण प्रतिबंध !

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सागर
गर्मी के मौसम में संभावित पेयजल संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्रीमती प्रतिभा पाल के निर्देश पर सागर जिले की रहली और गढ़ाकोटा तहसील में अवैध सिंचाई पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह आदेश आगामी ग्रीष्मकाल के समाप्त होने तक लागू रहेगा और इसका उद्देश्य पेयजल के भंडार को सुरक्षित बनाए रखना है।

प्रशासन के अनुसार, रहली क्षेत्र में फिल्टर प्लांट और गढ़ाकोटा में मोठार डैम से जल आपूर्ति होती है, लेकिन नदी के किनारे बड़े पैमाने पर हो रही अवैध सिंचाई के कारण जल स्तर लगातार गिर रहा है। विशेष रूप से सुनार नदी के दोनों किनारों पर 5 किलोमीटर तक के क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी का अत्यधिक उपयोग किया जा रहा था, जिससे पेयजल संकट की आशंका और गहरी हो गई थी।

कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने स्पष्ट किया कि ग्रीष्मकाल में पेयजल की प्राथमिकता सर्वोच्च होती है। यदि समय रहते जल संरक्षण के उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में रहली और गढ़ाकोटा क्षेत्र में गंभीर जल संकट उत्पन्न हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए सिंचाई के लिए नदी के पानी के उपयोग पर रोक लगा दी है।

यह प्रतिबंध मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 एवं संशोधित अधिनियम 2002 के तहत लगाया गया है। आदेश के अनुसार, रहली में फिल्टर प्लांट और गढ़ाकोटा में मोठार डैम से सुनार नदी के किनारे दोनों ओर 5 किलोमीटर तक पेयजल के अलावा अन्य किसी भी उपयोग—जैसे सिंचाई, औद्योगिक या व्यावसायिक गतिविधियों के लिए पानी लेने पर पूरी तरह रोक रहेगी।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अधिनियम की धारा 9 के तहत दोषियों पर दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी, जिसमें जुर्माना या अन्य कानूनी कदम शामिल हो सकते हैं। प्रशासन ने स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे नियमित निगरानी करें और किसी भी अवैध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई करें।

इस निर्णय के पीछे मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को पीने के पानी की कमी का सामना न करना पड़े। गर्मी के मौसम में जल स्रोतों का स्तर स्वाभाविक रूप से कम हो जाता है, ऐसे में यदि सिंचाई के लिए अत्यधिक पानी निकाला जाए, तो पेयजल आपूर्ति बाधित हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जल संरक्षण के लिए इस प्रकार के कदम अत्यंत आवश्यक हैं। इससे न केवल वर्तमान संकट को टाला जा सकता है, बल्कि भविष्य के लिए भी जल संसाधनों का संतुलन बनाए रखा जा सकता है। प्रशासन ने किसानों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे इस आदेश का पालन करें और जल संरक्षण में सहयोग दें।

इसके साथ ही प्रशासन द्वारा वैकल्पिक उपायों पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि किसानों को न्यूनतम नुकसान हो। ड्रिप इरिगेशन, वर्षा जल संचयन और अन्य जल संरक्षण तकनीकों को बढ़ावा देने की योजना भी बनाई जा रही है।

कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने जिलेवासियों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि जल एक अमूल्य संसाधन है और इसका संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते सही कदम उठाए जाएं, तो गंभीर संकट से बचा जा सकता है।

यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और अगले आदेश तक जारी रहेगा। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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