सेवन, बांदरी।
श्रद्धेय गुरु नानक देव जी द्वारा प्रारंभ की गई लंगर और पंगत की परंपरा सामाजिक समरसता का सशक्त प्रतीक है। यही भाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भी देखने को मिलता है, जहां किसी से जाति, धर्म या पंथ नहीं पूछा जाता। सामाजिक समरसता हमारे धर्म, संस्कृति और भारतीय दर्शन का मूल है। यह उद्गार पूर्व गृहमंत्री एवं खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह ने सेवन, बांदरी में आयोजित सामाजिक समरसता सम्मेलन को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

मुख्य अतिथि भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की स्वतंत्रता की नींव सत्य और बलिदान पर आधारित होती है। उन्होंने गुरु गोविंद सिंह जी के चार साहिबजादों के अद्वितीय बलिदान को स्मरण करते हुए कहा कि देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए उन्होंने अपने प्राणों का उत्सर्ग किया। चमकौर के युद्ध में बड़े साहिबजादों ने मुगलों से संघर्ष करते हुए वीरगति प्राप्त की, जबकि छोटे साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह को इस्लाम स्वीकार न करने पर जीवित दीवार में चुनवा दिया गया। उन्होंने बताया कि जब मुगल सेनापति वजीर खां ने इन बालकों को मृत्यु से डराने का प्रयास किया, तो उन्होंने निर्भीक होकर कहा कि यह दीवार उनकी मृत्यु का नहीं, बल्कि अत्याचार के अंत का स्मारक बनेगी।
भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि ऐसे महान बलिदानों को सम्मान देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने उनके बलिदान दिवस को वीर बाल दिवस के रूप में देशभर में मनाने की पहल की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राष्ट्र में पुनर्जागरण के साथ हिंदुत्व, संस्कृति और राष्ट्र संरक्षण का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।

उन्होंने कहा कि संघ का स्पष्ट मत है कि कोई भी राष्ट्र तभी सशक्त बन सकता है जब समाज में सामाजिक समरसता हो। सिख समाज की लंगर परंपरा आज भी समरसता का जीवंत उदाहरण है। भारतीय संस्कृति में मूल रूप से कभी जाति प्रथा को महत्व नहीं दिया गया। जाति, धर्म और पंथ के आधार पर समाज को बांटने का कार्य विदेशी आक्रांताओं ने किया, और आज भी कुछ तत्व राजनीतिक स्वार्थों के लिए इसी विभाजनकारी मानसिकता को बढ़ावा दे रहे हैं।
उन्होंने धार्मिक उदाहरणों के माध्यम से सामाजिक समरसता की परंपरा को रेखांकित करते हुए कहा कि भगवान राम ने शबरी के जूठे बेर खाकर और निषादराज को गले लगाकर समाज को समरसता का संदेश दिया। भगवान कृष्ण ने दुर्योधन के राजसी भोज के आमंत्रण को ठुकराकर महात्मा विदुर के घर भोजन स्वीकार किया। इससे स्पष्ट होता है कि सामाजिक समरसता हमारी संस्कृति में प्राचीन काल से विद्यमान रही है।

भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण सबसे प्रामाणिक रामायण है। संत कबीर दास जी का दोहा—“जाति पाति पूछे नहीं कोई, हरि को भजै सो हरि को होई”—सामाजिक समरसता की भावना को प्रकट करता है। वहीं संत रविदास जी का स्वप्न था—“ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिलै सभी को अन्न, छोटे-बड़े सब सम बसें, रैदास रहें प्रसन्न।”
उन्होंने संघ परिवार की कुटुंब प्रबोधन की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परिवार हमारे संस्कारों की पहली पाठशाला है। संयुक्त परिवार व्यवस्था पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण में सहायक है। सप्ताह में कम से कम एक दिन परिवार का एक साथ बैठना, भोजन करना, भजन-कीर्तन करना, पृथ्वी को माता मानकर पर्यावरण संरक्षण करना, स्वदेशी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना और स्वयं का बोध विकसित करना संघ की पंच निष्ठाओं में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि संघ सत्ता के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र गौरव के लिए समाज को संगठित करता है और हिंदुत्व को एक जीवन पद्धति मानता है।
भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि आज आतंकवाद, लव-जिहाद, धर्मांतरण और युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति देश के सामने गंभीर चुनौतियां हैं। इन सभी समस्याओं का समाधान सामाजिक समरसता और एकजुटता से ही संभव है। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों और युवाओं को संघ की शाखाओं से जोड़ें, जहां संपूर्ण व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण के साथ राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित होती है।
कार्यक्रम का आयोजन भारत भारती शोध संस्थान, ग्राम भारती एवं विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सागर गुरुद्वारा प्रबंध समिति के ज्ञानी रंजीत सिंह ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में रानी अवंतीबाई विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. शक्ति जैन उपस्थित रहीं, जिन्होंने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं भारत माता के पूजन से हुआ। आईजी सिंह ने संघ गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के संयोजक मधुसूदन खेमरिया ने अतिथि परिचय दिया और बताया कि सेवन गांव से जुड़े वरिष्ठ संघ प्रचारक गजाधर यादव एवं स्वर्गीय हरिश्चन्द्र जैन के परिजन भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। भूपेन्द्र सिंह ने अशोक यादव एवं रश्मि जैन को शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम का संचालन एकता खेमरिया ने किया। इस अवसर पर सहसंयोजक इंजीनियर एस.आर. सिंह, बीना से जिला ग्रामीण प्रमुख महादेव कुशवाहा, सेवन ग्राम के सरपंच प्रतिनिधि विनय श्रीवास्तव, कु. मित्रा जैन, वर्षा जैन, भाजपा मंडल अध्यक्ष अनिल पाराशर सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।