भोपाल।
आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के नाम पर इलाज के बजाय सरकारी धन की लूट करने वाले निजी अस्पतालों पर अब शिकंजा कसना शुरू हो गया है। मध्यप्रदेश में लागू किए गए ‘दक्ष आयुष्मान’ फ्रेमवर्क के तहत हुई सघन जांच में स्वास्थ्य व्यवस्था की कई चौंकाने वाली और गंभीर सच्चाइयां सामने आई हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि कहीं बंद अस्पतालों में इलाज दिखाकर क्लेम किया जा रहा था, तो कहीं डॉक्टर केवल कागजों में मौजूद थे। कई मामलों में बिना जरूरत मरीजों को ICU में भर्ती दिखाकर मोटा भुगतान लिया गया।

इन गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए स्टेट हेल्थ एजेंसी ने तत्काल प्रभाव से 9 निजी अस्पतालों को सस्पेंड कर दिया है, जबकि 28 अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इन अस्पतालों द्वारा दिए जाने वाले जवाबों के आधार पर सोमवार को आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
जांच में सामने आईं ये बड़ी खामियां
‘दक्ष आयुष्मान’ के तहत की गई जांच में अस्पतालों में कई स्तर पर गड़बड़ियां पाई गईं—
- 17 अस्पतालों में वैधानिक दस्तावेजों की भारी कमी
- 8 अस्पतालों में इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी गंभीर समस्याएं
- 15 अस्पतालों में ऑपरेशनल खामियां
- 2 अस्पतालों में क्लिनिकल अप्रॉप्रियेटनेस, यानी बिना जरूरत इलाज या ICU भर्ती

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ अस्पतालों में डॉक्टर मौके पर मौजूद ही नहीं थे, जबकि कागजों में मरीजों का इलाज दर्शाया जा रहा था। कई अस्पताल पूरी तरह बंद थे, इसके बावजूद आयुष्मान पोर्टल पर एक्टिव रहकर लगातार क्लेम किए जा रहे थे। इसे मरीजों की सुरक्षा और सरकारी धन दोनों के साथ खुला खिलवाड़ माना गया।
क्या है ‘दक्ष आयुष्मान’ फ्रेमवर्क
आयुष्मान भारत योजना में फ्रॉड और दुरुपयोग पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने ‘दक्ष आयुष्मान’ फ्रेमवर्क लागू किया है। इसका मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक धन की सुरक्षा, नैतिक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा और मरीजों के अधिकारों की रक्षा करना है।
यह फ्रेमवर्क तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—
- प्रिवेंशन (रोकथाम)
- डिटेक्शन (पहचान)
- डिटरेंस (कड़ी कार्रवाई)
इसके तहत अस्पतालों की भौतिक और कार्यात्मक जांच की जा रही है। बेड, ICU, OT और स्टाफ की वास्तविक उपलब्धता का सत्यापन किया जा रहा है। प्री-ऑथराइजेशन के दौरान इलाज की जरूरत की जांच और हेल्थ बेनिफिट पैकेज (HBP) के दुरुपयोग पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि अनावश्यक ICU भर्ती या गलत पैकेज क्लेम रोके जा सकें।
बीते सप्ताह सस्पेंड किए गए 9 अस्पताल
जांच के बाद जिन 9 अस्पतालों को सस्पेंड किया गया है, उनमें शामिल हैं—
- अभिश्री हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड – बिना जरूरत ICU एडमिशन, वैधानिक उल्लंघन
- एविसेना मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल – इंफ्रास्ट्रक्चर में गड़बड़ी, 30% बेड कम
- आयुष हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर – निर्माणाधीन भवन, नॉन-ऑपरेशनल बेड, पैकेज दुरुपयोग
- कम्युनिटी वैल्यू स्पेशलिटी हॉस्पिटल – 56% बेड की कमी, AERB लाइसेंस नहीं, फायर NOC एक्सपायर्ड
- दृष्टि आई केयर – बंद अस्पताल, फिर भी आयुष्मान में सक्रिय
- करोंद मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल – बंद होने के बावजूद क्लेम जारी
- मैक्स मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल – घोस्ट डॉक्टर, गंदा ICU, मालिकाना विवाद, वैधानिक खामियां
- मुस्कान चिल्ड्रन एंड जनरल हॉस्पिटल – 34% बेड की कमी, खराब साफ-सफाई
- भोपाल टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर – बंद होने के बावजूद योजना में शामिल
AI और फील्ड टीम ने खोली पोल
‘दक्ष आयुष्मान’ के तहत तकनीक और जमीनी जांच को एक साथ जोड़ा गया है। इसमें AI आधारित ट्रिगर सिस्टम शामिल है, जो SAFU (Suspected Abuse and Fraud Unit) के डेटा एनालिसिस के जरिए फ्रॉड मामलों की पहचान करता है। इसके साथ ही फील्ड विजिट, फिजिकल इंस्पेक्शन, मरीजों की शिकायतें, सीएम हेल्पलाइन और CPGRAMS पर प्राप्त शिकायतों पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है।
इसी प्रक्रिया के तहत हाल में 57 अस्पतालों का सत्यापन किया गया, जिसमें 9 अस्पतालों में गंभीर और सिस्टमेटिक अनियमितताएं पाई गईं।
‘जीरो टॉलरेंस नीति जमीन पर उतरी’
मध्यप्रदेश आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के सीईओ योगेश भरसट ने कहा कि ‘दक्ष आयुष्मान’ के तहत की गई यह कार्रवाई साफ दिखाती है कि प्रदेश सरकार अब फ्रॉड-फ्री आयुष्मान योजना के लिए पूरी तरह गंभीर है।
उन्होंने कहा कि एनालिटिक्स, फील्ड जांच और सख्त दंड की यह व्यवस्था न केवल अस्पतालों की जवाबदेही तय करेगी, बल्कि आम मरीजों के भरोसे को भी मजबूत करेगी।
कुल मिलाकर, यह कार्रवाई साफ संदेश देती है कि आयुष्मान योजना के नाम पर किसी भी तरह की लापरवाही, धोखाधड़ी या लूट अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।