इंदौर। शहर में रविवार को एक रोमांचक और खतरनाक घटना सामने आई। धार रोड स्थित एक आश्रम के पीछे खेत में बने लगभग 60 फीट गहरे कुएं में 5 फीट लंबा जहरीला कोबरा सांप गिर गया। दो दिन से सांप कुएं में ही फंसा हुआ था। कभी वह कुएं की दीवार पर चढ़ने की कोशिश करता, तो कभी दीवार की ईंटों के सहारे बैठ जाता। कुएं में इतनी गहराई पर एक विशाल कोबरा को देखकर ग्रामीणों के होश उड़ गए और उन्होंने तुरंत स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना दी।

कुएं में उतरना था जान जोखिम का काम
सूचना मिलने पर स्नेक रेस्क्यू विशेषज्ञ महेंद्र श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे। कुएं की गहराई और जहरीले सांप की मौजूदगी के चलते रेस्क्यू बेहद चुनौतीपूर्ण था। कुएं में न तो सुरक्षित सीढ़ियां थीं और न ही उतरने की कोई व्यवस्था। इतना ही नहीं, गहरे कुएं में जहरीली गैस का भी खतरा था। ऐसे में सीधे नीचे उतरकर सांप को पकड़ना लगभग असंभव था।

तकनीक से किया गया रेस्क्यू
कोबरा की जान बचाने के लिए महेंद्र श्रीवास्तव ने विशेष तकनीक का सहारा लिया। उन्होंने 50 फीट लंबी रस्सी का इंतजाम किया और उसके सिरे पर एक मजबूत बांस बांधा। बांस पर एक बड़ी टहनी भी कसकर बांधी गई, ताकि सांप उस पर चढ़ सके। धीरे-धीरे इस व्यवस्था को कुएं में उतारा गया।
पहली बार में कोबरा सांप टहनी पर नहीं आया। लेकिन कुछ देर बाद उसने टहनी पर चढ़कर वहां शरण ले ली। मौके पर मौजूद लोग सांस थामकर ये नजारा देखते रहे। जैसे ही सांप सुरक्षित टहनी पर आ गया, धीरे-धीरे रस्सी को ऊपर खींचा गया और आखिरकार सांप को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

हमले की कोशिश और लोगों में दहशत
कोबरा को बाहर निकालते ही वह फन फैलाकर खड़ा हो गया और रेस्क्यू टीम पर हमला करने की कोशिश की। मौके पर मौजूद ग्रामीण भी घबराकर पीछे हट गए। हालांकि महेंद्र श्रीवास्तव ने धैर्य और अनुभव से स्थिति संभाली और सांप को अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित पिंजरे में रख लिया।
कोबरा की सेहत पर नजर
महेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि सांप को दो दिन तक कुएं में फंसे रहने के बावजूद कोई गंभीर चोट नहीं आई। उसका शरीर पूरी तरह से स्वस्थ पाया गया। हालांकि, लंबे समय तक पानी में रहने के कारण उसकी स्किन हल्की सफेद हो गई थी, लेकिन कुछ ही घंटों में वह सामान्य दिखने लगी।
उन्होंने बताया कि सांप को एक दिन तक ऑब्जर्वेशन में रखा जाएगा। यदि वह पूरी तरह स्वस्थ पाया गया, तो उसे जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया जाएगा, ताकि वह प्राकृतिक वातावरण में लौट सके।

ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
गांववालों ने इतने बड़े और जहरीले सांप को कुएं से बाहर निकलते देखा तो सभी ने राहत की सांस ली। उनका कहना था कि अगर सांप कुएं से खुद बाहर निकल आता, तो खेतों और बस्ती के लिए बड़ा खतरा बन सकता था। लोगों ने स्नेक रेस्क्यू टीम की हिम्मत और साहस की सराहना की।

निष्कर्ष
इंदौर का यह मामला एक ओर जहां खतरे से भरा रेस्क्यू रहा, वहीं यह प्रकृति संरक्षण की संवेदनशीलता का भी उदाहरण है। यदि ग्रामीण और रेस्क्यू टीम लापरवाह होते तो कोबरा की जान जाना तय था। लेकिन समय पर सूझबूझ और तकनीक के इस्तेमाल से न केवल सांप को सुरक्षित बचाया गया, बल्कि पर्यावरण के एक अहम हिस्से को भी संरक्षित किया गया।