सागर जिले में जलप्रदाय व्यवस्था को लेकर एक गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। सागर नगर निगम ने मकरोनिया नगर पालिका को 12 करोड़ 13 लाख 18 हजार 726 रुपए की बकाया जलकर राशि को लेकर अंतिम चेतावनी दी है। निगम ने साफ कर दिया है कि यदि यह भुगतान 6 अक्टूबर 2025 तक नहीं किया गया, तो अगले ही दिन यानी 7 अक्टूबर से मकरोनिया क्षेत्र की पेयजल सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। यह स्थिति वहां के हजारों नागरिकों के लिए भीषण जलसंकट की चेतावनी जैसी है।
मामला कैसे शुरू हुआ?
- 1 अप्रैल 2024 से बल्क कनेक्शन के जरिए सागर नगर निगम मकरोनिया नगर पालिका को पेयजल सप्लाई कर रहा है।
- इस सप्लाई पर हर महीने लगभग 1.5 करोड़ रुपए खर्च आ रहा है।
- परंतु पिछले डेढ़ साल में नगर पालिका ने भुगतान नहीं किया, जिससे बकाया राशि 12 करोड़ रुपए से ऊपर पहुंच गई।
- नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री ने हाल ही में समीक्षा बैठक बुलाई, जिसमें यह पूरा ब्योरा सामने आया।

निगम की चेतावनी
सागर नगर निगम की जलप्रदाय शाखा द्वारा जारी अंतिम नोटिस में कहा गया है –
- 6 अक्टूबर तक राशि का भुगतान अनिवार्य है।
- यदि समयसीमा में भुगतान नहीं हुआ तो 7 अक्टूबर से सप्लाई बंद कर दी जाएगी।
- इस कदम का सीधा असर मकरोनिया क्षेत्र के हजारों परिवारों पर पड़ेगा।
वित्तीय संकट और निगम का पक्ष
आयुक्त खत्री का कहना है कि –
- मकरोनिया क्षेत्र में पानी सप्लाई करने पर निगम को भारी खर्च उठाना पड़ रहा है।
- नगर पालिका भुगतान न करके नगर निगम पर वित्तीय बोझ डाल रही है।
- इससे निगम की अन्य विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं पर असर पड़ सकता है।
मकरोनिया नगर पालिका का पक्ष (संभावित तर्क)
हालांकि इस मामले पर नगर पालिका की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सामान्यतः ऐसे मामलों में पालिका द्वारा दिए जाने वाले तर्क कुछ इस प्रकार हो सकते हैं –
- नगर निगम द्वारा पानी की कीमत अधिक वसूली जा रही है।
- राज्य शासन से अनुदान/ग्रांट मिलने में विलंब हो रहा है।
- राजस्व संग्रह में कठिनाई के कारण भुगतान नहीं हो पा रहा।
नागरिकों की परेशानी
यदि 7 अक्टूबर से सप्लाई बंद होती है तो –
- मकरोनिया क्षेत्र के लाखों लोग पानी की भीषण समस्या से जूझेंगे।
- वैकल्पिक व्यवस्था के लिए नगर पालिका के पास संसाधन नहीं हैं।
- टैंकर व्यवस्था पर निर्भरता बढ़ सकती है, जिससे स्थिति और गंभीर होगी।

राजनीतिक पहलू
- यह विवाद केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील है।
- मकरोनिया क्षेत्र अलग नगर पालिका है, जबकि जलस्रोत और सप्लाई सागर नगर निगम के हाथ में है।
- इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष दोनों राजनीतिक दबाव बना सकते हैं।
संभावित समाधान
- राज्य शासन के हस्तक्षेप से कोई समझौता निकल सकता है।
- नगर पालिका आंशिक भुगतान कर सकती है और शेष राशि किस्तों में देने का प्रस्ताव रख सकती है।
- यदि यह न हुआ, तो सचमुच जलसंकट खड़ा हो जाएगा।