भोपाल/रीवा/सागर। मध्यप्रदेश में नौकरशाही और राजनीति के टकराव का नया अध्याय सामने आया है। कांग्रेस ने प्रदेश के दो जिलों—रीवा और सागर—के कलेक्टरों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक ओर रीवा से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने कलेक्टर प्रतिभा पाल पर पक्षपात और गैरजिम्मेदारी के आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने सागर कलेक्टर संदीप जी.आर. के ट्वीट को लेकर सरकार और प्रशासन पर कटाक्ष किया है।
🗣️ रीवा विधायक अभय मिश्रा का आरोप: “कलेक्टर ईमानदार नहीं, पोल खोल दूंगा”
रीवा जिले के सेमरिया विधायक अभय मिश्रा ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि वे प्रशासनिक कार्यशैली से बेहद नाराज हैं। उन्होंने कलेक्टर प्रतिभा पाल की ईमानदारी पर सीधा सवाल उठाते हुए कहा —
“अगर वे कह दें कि वे ईमानदार हैं, तो मैं ऐसे पोल खोल दूंगा कि सबको पता चल जाएगा।”
विधायक मिश्रा ने आगे कहा कि,
“राजनीति में मैं खुद को ईमानदार मानता हूं। कोई मेरी बेईमानी बता दे तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। मगर कलेक्टर की नीयत और कार्यशैली पर सवाल हैं। वे मुख्यमंत्री की नहीं, बल्कि उपमुख्यमंत्री की सुनती हैं। कई बार क्षेत्रीय कामों में अड़चनें डालती हैं।”
⚡ ‘विरोध और सत्याग्रह’ की चेतावनी
विधायक मिश्रा ने कहा कि उन्होंने कलेक्टर को पत्र लिखकर सूचित किया है कि वे कलेक्टर कार्यालय में छह घंटे का उपवास रखकर सत्याग्रह करेंगे।
“मेरा विरोध व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि कामकाज की खराबी के खिलाफ है। रीवा की सरकारी जमीनें लुट रही हैं, बिक रही हैं। जनता त्रस्त है, लेकिन प्रशासन मौन है।”
उन्होंने यह भी बताया कि वे बिजली बिलों में अनियमितता और बढ़ोतरी के विरोध में बीस हजार लोगों के साथ बड़ा प्रदर्शन करेंगे।
🏛️ मुख्यमंत्री की नीयत पर भरोसा, सिस्टम पर नहीं
विधायक मिश्रा ने यह भी कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की नीयत पर पूरा भरोसा है।
“मुख्यमंत्री व्यवस्था को दुरुस्त करना चाहते हैं, लेकिन प्रशासन में बैठे कुछ अफसर उनके आदेशों का पालन नहीं करते। मुख्यमंत्री कुछ कहते हैं, और यहां कुछ और होता है।”
उनका कहना है कि रीवा में आम लोगों की शिकायतें अनसुनी की जा रही हैं, और कलेक्टर की प्राथमिकता राजनीतिक निर्देशों के हिसाब से तय होती है।
📲 सागर कलेक्टर के ट्वीट पर भूपेंद्र गुप्ता का तंज
रीवा के बाद अब विवाद का दूसरा सिरा सागर से जुड़ा है। दशहरा पर्व के मौके पर सागर कलेक्टर संदीप जी.आर. ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने “सत्य पर असत्य की जीत” की शुभकामनाएं दी थीं।
इस पर कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने तीखी प्रतिक्रिया दी —
“मध्यप्रदेश में व्याप्त अव्यवस्था, भ्रष्टाचार और अन्याय के माहौल में अब कलेक्टर भी ‘सत्य पर असत्य की जीत’ की शुभकामनाएं दे रहे हैं। यह ट्वीट प्रतीक है कि अफसरशाही तक को अब राज्य में असत्य का बोलबाला महसूस हो रहा है।”
🔎 राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव का संकेत
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला केवल दो अफसरों तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य में अफसरशाही और जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ते अविश्वास की झलक दिखाता है। रीवा से लेकर सागर तक जनप्रतिनिधि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि अफसर अपनी स्वतंत्रता का हवाला दे रहे हैं।
🧩 विवाद की जड़ें: नियंत्रण या संवाद की कमी
रीवा में विधायक और कलेक्टर के बीच तालमेल की कमी लंबे समय से बनी हुई है।
सागर में दशहरा के ट्वीट को लेकर विपक्ष ने प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल उठाए हैं।
दोनों ही मामलों में कांग्रेस ने अफसरशाही को “सत्ताधारी प्रभाव में काम करने वाला” बताया है।
⚖️ प्रशासनिक मौन, लेकिन हलचल तेज
हालांकि अब तक दोनों कलेक्टरों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सरकार इस विवाद को लेकर सतर्क है।