सागर, 25 अक्टूबर 2025।
जिले में प्रतिबंधित कार्बाइड गन के निर्माण, भंडारण और विक्रय पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने सख्ती दिखाना शुरू कर दिया है। कलेक्टर संदीप जी आर ने शुक्रवार को आतिशबाजी विक्रेता रमेश ताला वाला भाग्योदय के गोदाम का आकस्मिक निरीक्षण किया और निर्देश दिए कि ऐसी खतरनाक गनों का किसी भी रूप में न तो निर्माण हो और न ही बिक्री। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस संबंध में किसी भी तरह की लापरवाही पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने आतिशबाजी भंडारण केंद्र का गहन परीक्षण किया और मौके पर ही फायर सेफ्टी उपकरणों की जांच कराई। उन्होंने दुकानदारों को निर्देश दिए कि वे सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करें और किसी भी प्रतिबंधित सामग्री का भंडारण न करें। इस निरीक्षण के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेश सिन्हा, एसडीएम अमन मिश्रा, तहसीलदार संदीप तिवारी, और राहुल गौंड उपस्थित रहे।

कलेक्टर संदीप जी आर ने बताया कि हाल ही में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से कैल्शियम कार्बाइड गन के कारण हुई दुर्घटनाओं की खबरें आई हैं, जिनमें कई बच्चे घायल हुए हैं और कुछ की आंखों की रोशनी तक चली गई। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्बाइड गन के उपयोग पर सख्ती के निर्देश जारी किए हैं। उनके निर्देशों के पालन में सागर जिला प्रशासन ने भी बाजारों और गोदामों में विशेष निरीक्षण अभियान शुरू किया है।
कलेक्टर ने सभी एसडीएम और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कार्बाइड गन के निर्माण, भंडारण, बिक्री और उपयोग को रोकने के लिए विशेष जांच अभियान चलाएं। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति कार्बाइड गन बनाते, बेचते या उपयोग करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने जनता से अपील की कि वे इस तरह के खतरनाक उपकरणों का उपयोग न करें और बच्चों को भी इससे दूर रखें। उन्होंने कहा कि कार्बाइड गन से उत्पन्न गैस न केवल आंखों और त्वचा के लिए हानिकारक है, बल्कि यह आगजनी और विस्फोट जैसी घटनाओं का कारण भी बन सकती है।
स्वास्थ्य विभाग ने भी इस विषय पर चेतावनी जारी की है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ममता तिमोरे और डॉ. प्रवीण खरे (बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर) ने बताया कि कार्बाइड गन की चिंगारी या धुआं आंखों के संपर्क में आने पर गंभीर चोट पहुंचा सकता है। डॉ. खरे ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की आंख में कार्बाइड का धुआं या चिंगारी चली जाए, तो तुरंत 15–20 मिनट तक साफ पानी से आंखें धोएं, प्रेशर अधिक न रखें और कॉन्टैक्ट लेंस लगे हों तो निकाल दें। आंखों को किसी कपड़े या वस्तु से न ढकें और तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें।

कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्बाइड गन से जुड़ी घटनाओं की रोकथाम के लिए जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि स्कूलों और बाजारों में लोगों को इसके दुष्प्रभावों के बारे में बताया जाए ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
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