हरि सिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में NSUI का उग्र प्रदर्शन — प्रत्यक्ष छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर सौंपा राष्ट्रपति को ज्ञापन, कुलपति का पुतला दहन !

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सागर।
हरि सिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय एक बार फिर छात्र राजनीति के केंद्र में आ गया है। शुक्रवार को राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) ने विश्वविद्यालय परिसर में एक उग्र प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति महोदय को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में NSUI ने विश्वविद्यालय में लिंगदोह समिति की अनुशंसाओं एवं सुप्रीम कोर्ट के 2006 (University of Kerala vs. Council of Principals) के आदेशों के अनुरूप प्रत्यक्ष छात्रसंघ चुनाव (Direct Student Union Elections) कराने की मांग की है।


🔹 लिंगदोह समिति की सिफारिशें और लोकतंत्र की मांग

ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया कि छात्रसंघ चुनाव केवल विश्वविद्यालयों में लोकतांत्रिक संस्कृति को बनाए रखने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह छात्रों को नेतृत्व, संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर भी प्रदान करते हैं।
NSUI का कहना है कि हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय में पिछले कई वर्षों से प्रत्यक्ष चुनाव नहीं कराए जा रहे, जिससे छात्र प्रतिनिधित्व और विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक वातावरण पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

NSUI ने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन लिंगदोह समिति की सिफारिशों का उल्लंघन कर मेरठ मॉडल पर आधारित चुनाव की तैयारी कर रहा है, जिसमें छात्रों की सीधी भागीदारी नगण्य है। इसी विरोध में NSUI कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसर में कुलपति का पुतला दहन किया।


🔹 प्रदर्शन के दौरान तनाव — पुलिस और छात्रों में झड़प

पुतला दहन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। जैसे ही NSUI कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए मुख्य द्वार की ओर बढ़े, पुलिस बल ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिस पर छात्रों और पुलिस के बीच झड़प की स्थिति उत्पन्न हो गई
हालांकि बाद में वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ, लेकिन छात्रों का गुस्सा और असंतोष प्रशासन के खिलाफ साफ दिखाई दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शन में छात्र “लोकतंत्र बहाल करो, लिंगदोह लागू करो, चुनाव कराओ – वाइस चांसलर हटाओ” जैसे नारे लगा रहे थे। कई छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन जानबूझकर चुनावों को टाल रहा है, ताकि छात्र आवाज़ को दबाया जा सके।


🔹 छात्रों की समस्याओं का मुद्दा भी उठा

ज्ञापन में NSUI ने छात्रसंघ चुनाव के साथ-साथ छात्रों की मूलभूत समस्याओं पर भी विस्तार से बात की। संगठन ने कहा कि

  • विश्वविद्यालय के होस्टलों में मेस सुविधा बेहद खराब है और कई जगहों पर भोजन की व्यवस्था तक नहीं है।
  • प्रोफेसर और नॉन-टीचिंग स्टाफ की सैकड़ों पद रिक्त हैं, जिससे अकादमिक गतिविधियों पर सीधा असर पड़ रहा है।
  • छात्र कल्याण विभाग पूरी तरह निष्क्रिय है और छात्रों की समस्याओं को सुनने या समाधान करने की कोई पारदर्शी व्यवस्था नहीं है।
  • स्थानीय आरक्षण नीति को लेकर भी स्पष्टता और पारदर्शिता का अभाव बताया गया।

NSUI का कहना है कि इन समस्याओं के समाधान के बिना विश्वविद्यालय का शैक्षणिक वातावरण सुधर नहीं सकता।


🔹 नेताओं के वक्तव्य — लोकतंत्र की रक्षा के लिए आंदोलन

इस अवसर पर NSUI जिला अध्यक्ष अक्षत कोठारी ने कहा,

“हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय मध्य भारत का प्रमुख शैक्षणिक केंद्र है, जहाँ लोकतंत्र का वातावरण समाप्त हो रहा है। छात्रों के हितों की रक्षा और लोकतांत्रिक परंपरा की पुनर्स्थापना के लिए यह आवश्यक है कि विश्वविद्यालय प्रशासन शीघ्र चुनाव कराए और लिंगदोह समिति की सभी सिफारिशों का पालन करे।”

वहीं विश्वविद्यालय अध्यक्ष अंशुल शर्मा ने कहा,

“पिछले एक वर्ष से NSUI लगातार धरना, प्रदर्शन और आंदोलन के माध्यम से छात्रसंघ चुनाव की मांग कर रही है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की आवाज़ के प्रति पूरी तरह उदासीन है। यह रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।”


🔹 प्रशासन का पक्ष

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कहा कि छात्रों की मांगों और ज्ञापन को संज्ञान में लिया गया है। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि मामले पर नियमों के तहत विचार किया जाएगा।
हालांकि, सूत्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय फिलहाल “मेरठ मॉडल” पर आधारित अप्रत्यक्ष चुनाव प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार कर रहा है, जिससे NSUI के विरोध की संभावना और बढ़ सकती है।


🔹 प्रदर्शन का नेतृत्व और संगठन की भागीदारी

कार्यक्रम का नेतृत्व विश्वविद्यालय उपाध्यक्ष जतिन सिंह गौड़ ने किया।
इस मौके पर संगठन के सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से आलोक सोनी, नूर खान, महासचिव ध्रुव शर्मा, प्रदुमन कुमार गुप्ता, अनस पठान, वैभव धुरिया, राहुल खटीक, पारस साहू, रोहित पाल, दीपेंद्र राय, पुण्य प्रताप पटेल, साहित्य ठाकुर, लक्ष्मण सोलंकी, नील ठाकुर, आदित्य राजपूत, डी. पाठक, आदित्य सिंह, अभिषेक अहिरवार, कुंवर सिंह, कृष्णा सोनी, मुन्ना बाबू, कमलेश, मधुर जय, प्रमोद और अभिषेक सहित अनेक पदाधिकारी शामिल रहे।


🔹 राजनीतिक पृष्ठभूमि और भविष्य की संभावनाएँ

हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय में NSUI और ABVP के बीच लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव को लेकर रस्साकशी चल रही है।
2006 में सुप्रीम कोर्ट ने लिंगदोह समिति की सिफारिशों को लागू करने का निर्देश दिया था, जिसके अनुसार देश के सभी विश्वविद्यालयों में प्रत्यक्ष और पारदर्शी छात्रसंघ चुनाव कराना आवश्यक है।
लेकिन गौर विश्वविद्यालय में लंबे समय से यह चुनाव टलता आ रहा है।
अब NSUI ने संकेत दिए हैं कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा और “लोकतंत्र बचाओ” अभियान को राज्यस्तर तक ले जाया जाएगा।

ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
7806077338, 9109619237

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